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गुरुग्राम की सोसायटियों में कागजी OC का खेल, अधूरे निर्माण के बीच बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे लोगहरियाणा
30 अग॰ 2026, 10:56 am (57 मिनट पहले)· 3

गुरुग्राम की सोसायटियों में कागजी OC का खेल, अधूरे निर्माण के बीच बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे लोग

गुरुग्राम में कई रिहायशी सोसायटियों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद वहां बिजली, पानी और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। हालिया सरकारी जांच में सामने आया है कि करीब 1500 प्रोजेक्ट्स में नियमों को ताक पर रखकर तय समय से पहले ही प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।

हरियाणा के तेजी से विकसित हो रहे शहर गुरुग्राम में मकान खरीदने का सपना देखने वाले नागरिकों के सामने एक अजीबोगरीब संकट खड़ा हो गया है। कागजी दस्तावेजों के मुताबिक कई आवासीय परियोजनाएं पूरी तरह बसने के लिए तैयार घोषित की जा चुकी हैं, लेकिन जब आवंटी उन सोसायटियों में पहुंचते हैं तो हालात पूरी तरह से उलट मिलते हैं। कहीं आने-जाने के लिए पक्की सड़क नहीं बनी है, तो कहीं बिजली और पानी के कनेक्शन के नाम पर केवल आश्वासन दिया जा रहा है। जिन सुख-सुविधाओं का सपना दिखाकर लोगों से निवेश कराया गया था, वे मौके पर नदारद मिलती हैं। शहर के तमाम रिहायशी इलाकों के निवासियों का कहना है कि उनके परिसरों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिल चुका है, जिसका अर्थ है कि प्रशासन की तरफ से वहां रहने की औपचारिक अनुमति दी जा चुकी है। इसके बावजूद बुनियादी सहूलियतें हासिल करने के लिए उन्हें आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

सेक्टर-108 की परियोजनाओं और एम्बियंस लैगून का हाल

सेक्टर-108 में बनी आरओएफ एलांते सोसाइटी इस संकट का एक बड़ा उदाहरण पेश करती है। वहां रहने वाले परिवारों का आरोप है कि उनकी सोसाइटी तक पहुंचने के लिए कोई ढंग की सड़क तक नहीं बनाई गई है। इसके अलावा बिजली और पानी की निरंतर आपूर्ति को लेकर भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिस जगह को कागजों पर पूरी तरह सुरक्षित और रहने योग्य मान लिया गया था, वहां जमीन पर पहुंचकर अपनी गृहस्थी बसाना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एम्बियंस मॉल के समीप स्थित एम्बियंस लैगून के निवासियों ने भी ठीक इसी तरह की गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि फ्लैट खरीदते समय बिल्डर ने जिन सुविधाओं का वादा किया था, वे आज तक धरातल पर नहीं उतरीं। कुछ रहवासियों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि मूल रिहायशी प्रोजेक्ट के लिए निर्धारित जमीन का व्यावसायिक उपयोग कहीं और किया गया है।

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छापेमारी और औचक निरीक्षण में खुले राज

यह गड़बड़ी कोई नई बात नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का पुराना सिलसिला है। इस साल अप्रैल के महीने में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने संयुक्त रूप से कई आवासीय परिसरों का औचक निरीक्षण किया था। इस जांच-पड़ताल के दौरान जो दृश्य सामने आया, उसने सीधे तौर पर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने की पूरी प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया। जिन 22 रिहायशी परिसरों की जांच की गई थी, उन सबके पास वैध ओसी मौजूद थे। इसके बावजूद उनमें से 14 प्रोजेक्ट्स के भीतर निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहा था। निरीक्षकों ने पाया कि कई इमारतें केवल कंक्रीट के कच्चे ढांचे जैसी हैं। कई स्थानों पर दीवारों का प्लास्टर तक पूरा नहीं हुआ था, फर्श अधूरे पड़े थे और रसोईघर तथा स्नानघर की प्लंबिंग लाइनें पूरी तरह निष्क्रिय थीं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब इमारतें रहने लायक थीं ही नहीं, तो उन्हें रहने की अनुमति का यह प्रमाण पत्र आखिर मिला कैसे?

पड़ताल के घेरे में डेढ़ हजार से अधिक प्रमाण पत्र

इस संयुक्त जांच के बाद संबंधित अधिकारियों ने 1 जुलाई 2025 से 15 मार्च 2026 के बीच बांटे गए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट्स की गहन छानबीन शुरू कर दी। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस आंतरिक पड़ताल में लगभग 1,500 ओसी जल्दबाजी में या समय से पहले जारी किए जाने का मामला उजागर हुआ। अब बहस सिर्फ उन घरों तक सीमित नहीं है जिनमें लोग बिना पानी और बिजली के जीवन गुजार रहे हैं, बल्कि असल समस्या उस प्रशासनिक तंत्र की है जिसने अधूरे ढांचे को पूर्ण मानकर नागरिकों को वहां जोखिम में रहने की छूट दे दी। गुरुग्राम के जिला नगर योजनाकार प्रवीण चौहान ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें ऐसे करीब 1,500 मामले मिले जिनमें इमारतें अधूरी होने के बावजूद ओसी जारी कर दिए गए थे, और इसके चलते दोषी पाए गए संबंधित आर्किटेक्ट्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

आर्किटेक्ट्स की भूमिका और सिस्टम पर बढ़ता अविश्वास

सरकारी गलियारों से आ रही जानकारियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर जाकर भौतिक निरीक्षण करने वाले वास्तुकारों की भूमिका भी अब गंभीर संदेह के घेरे में आ गई है। ऐसा आरोप है कि इन्हीं लोगों की तरफ से सौंपी गई झूठी निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर दर्जनों प्रोजेक्ट्स को ओसी मिलने का रास्ता साफ हुआ। गुरुग्राम जैसे अत्यधिक रफ्तार से फैलते महानगर में मकान केवल चार दीवारों और छत का मोहताज नहीं होता, बल्कि उसके साथ सड़क, जलापूर्ति, बिजली और तमाम नागरिक सुविधाएं जुड़ी होती हैं। लेकिन यदि किसी के पास ओसी का कागज सुरक्षित हो और जमीन पर घर अब भी निर्माण की प्रक्रिया में हो, तो यह महज एक तकनीकी खामी नहीं बल्कि उस भरोसे का टूटना है जो एक आम खरीदार सरकारी तंत्र पर रखता है।

विधानसभा में उठे सवाल और तेजी से बदलता द्वारका एक्सप्रेसवे

वर्ष 2022 के दौरान हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में बादशपुर के तत्कालीन विधायक राकेश दौलताबाद की तरफ से एक अनस्टार्ड प्रश्न पूछा गया था। उसके लिखित उत्तर से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि वर्ष 1992 से लेकर उस समय तक गुरुग्राम क्षेत्र में केवल 93 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को ही नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की तरफ से कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल पाया था। दूसरी तरफ, द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास संपत्ति के दामों में लगभग चार गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके चलते वहां रहने वाले लोगों की संख्या में भी तीव्र उछाल आया है। वर्तमान में वहां लगभग 450 परिवार निवास कर रहे हैं, जो बीते वर्ष के मुकाबले करीब नौ गुना अधिक हैं। लोग इस इलाके की बेहतरीन लोकेशन से आकर्षित होकर यहां आए हैं क्योंकि यह एक्सप्रेसवे से मात्र 3 किलोमीटर और हवाई अड्डे से आधे घंटे से भी कम दूरी पर है। इसके बावजूद, मौके पर रह रहे लोगों का यही दर्द है कि जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर है।

सवाल-जवाब

गुरुग्राम में सोसायटियों के सामने किस तरह की समस्या आ रही है?
कई रिहायशी प्रोजेक्ट्स को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह गायब हैं।
हालिया जांच में कितने संदिग्ध ओसी सामने आए हैं?
सरकारी सूत्रों के अनुसार 1 जुलाई 2025 से 15 मार्च 2026 के बीच जारी किए गए करीब 1,500 ओसी समय से पहले जारी किए जाने की बात सामने आई है।
प्रशासन ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
दोषी पाए जाने वाले संबंधित आर्किटेक्ट्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और जिला नगर योजनाकार विभाग ने मामलों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
द्वारका एक्सप्रेसवे के पास कितनी आबादी बढ़ चुकी है?
वहां वर्तमान में लगभग 450 परिवार रहते हैं जो पिछले साल की तुलना में लगभग नौ गुना अधिक हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·14 मिनट पहले

गुरुग्राम में कागजी ओसी का यह खेल केवल प्रशासनिक मिलीभगत का नतीजा नहीं है, बल्कि यह बिल्डर-नोकरशाही गठजोड़ का गंभीर उदाहरण है। जब तक औचक निरीक्षण के बाद दोषी अधिकारियों और बिल्डरों पर आपराधिक मुकदमे और भारी वित्तीय जुर्माने जैसी कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यूपी और एनसीआर के इस पूरे क्षेत्र में आम खरीदारों का यह शोषण थमता नजर नहीं आएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 मिनट पहले

रोहन वर्मा की इस पड़ताल से स्पष्ट होता है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला है। जब वैध कागजों के आड़ में कच्चे कंक्रीट के ढांचों को रहने योग्य प्रमाणित किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। यदि इस संगठित भ्रष्टाचार पर सख्त कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया, तो गुरुग्राम की अन्य आवासीय परियोजनाओं में भी यही आपराधिक पैटर्न हावी रहेगा, जिससे कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर आम जनता का भरोसा डगमगाएगा।

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