राजस्थान के ऐतिहासिक शहर बीकानेर में स्थित रांगड़ी चौक इस बार जन्माष्टमी पर्व पर धार्मिक आस्था, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक तकनीक के अद्भुत मेल का केंद्र बनने जा रहा है। प्रतिवर्ष की तरह इस साल भी स्थानीय नागरिक शहर की सबसे विशाल और आकर्षक झांकियों की प्रदर्शनी की तैयारियों में जुटे हुए हैं। इन सांस्कृतिक झांकियों में बीकानेर के विश्वप्रसिद्ध जूनागढ़ किले के विशाल प्रवेश द्वार से लेकर भगवान श्रीकृष्ण के आलौकिक विराट स्वरूप तक के अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक प्रसंगों को बेहद जीवंत ढंग से उकेरा जा रहा है। इस भव्य आयोजन का साक्षी बनने और इन अनोखी कलाकृतियों के दर्शन करने के लिए जन्माष्टमी के दिन पूरे बीकानेर शहर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु रांगड़ी चौक पहुंचते हैं।
20 फीट ऊंचे वराह अवतार और धार्मिक प्रसंगों का सजीव चित्रांकन
आयोजन व्यवस्था से जुड़े स्थानीय निवासी विश्वनाथ शर्मा के अनुसार, श्रद्धालुओं को हर बार की तरह इस बार भी नए धार्मिक विषयों और पौराणिक कथाओं पर आधारित कलाकृतियां देखने को मिलेंगी। इस साल आयोजन स्थल के मुख्य प्रवेश मार्ग पर बीकानेर के ऐतिहासिक जूनागढ़ किले की भव्य प्रतिकृति तैयार की गई है। इस द्वार से गुजरते ही दर्शकों को असली किले के भीतर प्रवेश करने जैसा अहसास होगा। प्रवेश द्वार के आगे वासुदेव द्वारा बाल रूप श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर उफनती यमुना नदी को पार कराने का दृश्य चित्रित किया गया है।
इस पूरी प्रदर्शनी का सबसे प्रमुख और मुख्य आकर्षण भगवान विष्णु के वराह अवतार का लगभग 20 फीट ऊंचा विशाल ढांचा है। इस भव्य झांकी में भगवान वराह को अपने दांतों पर पूरी पृथ्वी को संतुलित रूप से उठाए हुए दिखाया गया है। इसके अतिरिक्त, बीकानेर के सुप्रसिद्ध पूनरासर हनुमान मंदिर का कलात्मक मॉडल और महाभारत ग्रंथ की रचना करते भगवान श्रीगणेश की सुंदर झांकी भी बनाई गई है। तकनीकी नवाचार का प्रदर्शन करते हुए एक राक्षस के हाथों में बाल गोपाल श्रीकृष्ण की झांकी को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए चारों दिशाओं में घूमते हुए दिखाया जाएगा।
भगवद्गीता ज्ञान, विराट स्वरूप और 35 वर्षों की अटूट परंपरा
धार्मिक झांकियों की इस श्रृंखला में कुरुक्षेत्र युद्धभूमि का दृश्य भी बेहद सजीव रूप में तैयार किया जा रहा है। इस दृश्य में भगवान श्रीकृष्ण अपने प्रिय मित्र और शिष्य अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर उपदेश देते हुए अपने दिव्य विराट स्वरूप के दर्शन कराते नजर आएंगे। इन सभी कलाकृतियों को सजीव और देखने में सम्मोहक बनाने के लिए विद्युत उपकरणों, विशेष प्रकाश प्रभाव और रंग-बिरंगी रोशनी का बेहतरीन समन्वय किया गया है।
रांगड़ी चौक में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भव्य झांकियां सजाने की यह गौरवशाली परंपरा पिछले 35 वर्षों से बिना किसी रुकावट के लगातार चली आ रही है। हर साल मोहल्ले के नागरिक अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक कौशल से इन झांकियों में नए प्रयोग करते हैं। यही कारण है कि यह आयोजन पूरे बीकानेर शहर के लोगों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहता है।
वेस्ट मटेरियल का उपयोग और सामूहिक श्रमदान की अनूठी मिसाल
इन विशाल और मनमोहक झांकियों की सबसे बड़ी खासियत इनका पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल और पुनर्चक्रित निर्माण है। इन्हें बनाने के लिए किसी महंगे सामान के बजाय पुराने अखबारों, कबाड़ और बेकार पड़ी वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले लकड़ी की छोटी छड़ों और टुकड़ों से मूल ढांचा बनाया जाता है। इसके बाद घरों से एकत्र किए गए पुराने समाचार पत्रों को गोंद की परतों के साथ चिपकाकर संरचना को मजबूती प्रदान की जाती है। जब यह ढांचा पूरी तरह सूख जाता है, तो उस पर आकर्षक रंगों से चित्रकारी करके धार्मिक स्वरूप दिया जाता है।
इन भव्य झांकियों को आकार देने के लिए पिछले एक महीने से मोहल्ले के लगभग 40 से 50 लोग रोजाना निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं। इन श्रमदानियों में बच्चे, पुरुष और महिलाएं सभी शामिल हैं, जो प्रतिदिन रात में 7 से 8 घंटे मेहनत करते हैं। इस पूरे आयोजन का अनुमानित खर्च करीब 1.5 लाख रुपये से अधिक आता है, जिसका वहन मोहल्ले के सभी निवासी आपस में मिलकर और सहयोग राशि जुटाकर करते हैं।



















