राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच बीकानेर जिले से सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मिसाल की एक बेहद अनूठी तस्वीर सामने आई है. राज्य के तमाम ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पंचायती राज व्यवस्था के तहत सरपंच और वार्ड पंच के पदों को हासिल करने के लिए उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला और चुनावी खींचतान देखने को मिलती है, वहीं बीकानेर की पूगल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले पार्वती तलाई गांव ने सर्वसम्मति की एक नई राह दिखाई है. इस ग्राम पंचायत के बाशिंदों ने आपसी विचार विमर्श के बाद पूरी पंचायत कार्यकारिणी का चयन बिना किसी मतदान या चुनावी टकराव के पूरा कर लिया है. इस साझा निर्णय के तहत गांव के मुखिया यानी सरपंच पद के साथ-साथ सभी सात वार्डों के पंचों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है.
आपसी सहमति से महेंद्र सिंह भाटी के सिर सजा सरपंच का ताज
पार्वती तलाई ग्राम पंचायत में सरपंच पद के चयन को लेकर गांव के प्रबुद्धजनों और आम नागरिकों ने एक जाजम पर बैठकर गहन मंथन किया. इस सामूहिक चर्चा में सभी पक्षों ने गांव के विकास और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से महेंद्र सिंह भाटी के नाम पर अपनी मुहर लगाई. ग्रामीणों के इस एकजुट रुख के बाद किसी अन्य व्यक्ति ने चुनावी मैदान में ताल ठोकने की जरूरत नहीं समझी, जिससे मतदान की नौबत ही नहीं आई. इस सर्वसम्मत फैसले में पूर्व जिला महामंत्री सवाई सिंह तंवर सहित गांव के अनेक गणमान्य नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई और महेंद्र सिंह भाटी की उम्मीदवारी का पुरजोर समर्थन किया. ग्रामीणों का मानना है कि आपसी रजामंदी से मुखिया चुनने का यह कदम गांव में शांति और प्रगति का नया मार्ग प्रशस्त करेगा.
सातों वार्डों में भी नहीं हुआ चुनावी मुकाबला
पार्वती तलाई ग्राम पंचायत की इस अनूठी पहल की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि सर्वसम्मति का यह सिलसिला केवल सरपंच पद तक ही सीमित नहीं रहा. गांव के सभी सातों वार्डों में भी वार्ड पंच चुनने के लिए किसी तरह की प्रतिद्वंद्विता देखने को नहीं मिली. अमूमन ग्रामीण इलाकों में वार्ड स्तर पर भी राजनीतिक गुटबाजी और तनाव का माहौल बन जाता है, लेकिन यहां प्रत्येक वार्ड के निवासियों ने आपसी समझदारी का परिचय देते हुए एक-एक प्रतिनिधि के नाम पर एकराय बना ली. इस तरह पंचायत के सभी सातों वार्ड पंच भी निर्विरोध चुन लिए गए और पूरी ग्राम सरकार बिना किसी औपचारिक मतदान प्रक्रिया के गठित हो गई.
छत्तीस कौम के भाईचारे ने पेश की सामाजिक एकता की मिसाल
इस निर्विरोध चुनाव के संपन्न होते ही पूरे पार्वती तलाई गांव में उत्सव और उल्लास का वातावरण बन गया है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रहने वाली छत्तीस कौम के लोगों ने आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुटता का ऐतिहासिक परिचय दिया है. सामाजिक सौहार्द की यह मिसाल साबित करती है कि यदि ग्रामीण समाज मिलकर सोचे, तो चुनावी कटुता से बचते हुए गांव के सामूहिक हितों को सर्वोपरि रखा जा सकता है. ग्रामीणों के अनुसार, चुनाव अक्सर गांवों में आपसी रंजिश और दूरियां पैदा कर देते हैं, लेकिन पार्वती तलाई की छत्तीस कौम ने आपसी विश्वास को प्राथमिकता देकर पूरे प्रदेश को भाईचारे का गहरा पैगाम दिया है.
पूरे पूगल क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी ग्राम पंचायत
पार्वती तलाई का यह अभूतपूर्व फैसला अब पूरे पूगल क्षेत्र में प्रशंसा का विषय बना हुआ है. आसपास के इलाकों के लोग इस गांव की समझदारी और एकता की खुले दिल से सराहना कर रहे हैं. ग्रामीणों को पूरा भरोसा है कि नई पंचायत कार्यकारिणी बिना किसी राजनीतिक द्वेष या भेदभाव के गांव के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में अपनी पूरी ऊर्जा लगाएगी. इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र में चुनावी होड़ से कहीं अधिक महत्व आपसी संवाद, सामाजिक संतुलन और सर्वसम्मति का होता है.



















