नई दिल्ली के प्रतिष्ठित बीकानेर हाउस में युवा फोटोग्राफर और कलाकार रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी ‘No Idea Is Final’ को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रदर्शनी के शुरू होने से ठीक पहले आयोजकों और प्रबंधन द्वारा कई तस्वीरों को हटाए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर कला जगत तक हलचल मच गई है। इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा अपने बेटे रेहान वाड्रा के समर्थन में पूरी मजबूती के साथ सामने आई हैं और उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी है।
रेहान वाड्रा की यह कला प्रदर्शनी 22 से 25 अक्टूबर तक आयोजित की जानी थी। इसमें प्रकृति, वन्यजीव, एब्स्ट्रैक्ट आर्ट के साथ-साथ दिल्ली में हुए युवा आंदोलनों की तस्वीरें भी शामिल थीं। रेहान का आरोप है कि प्रदर्शनी में कुल 105 तस्वीरें लगाई जानी थीं, लेकिन बीकानेर हाउस प्रबंधन ने दिल्ली के युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को दर्शाने वाली तस्वीरों को आपत्तिजनक बताते हुए हटाने के निर्देश दिए। उनका यह भी दावा किया गया कि तिरंगे से जुड़ी तस्वीरों को भी हटाने के लिए कहा गया था, जिससे विवाद और ज्यादा गहरा गया।
तस्वीरें हटाने और प्रदर्शनी के सीमित होने का पूरा मामला
रेहान वाड्रा के अनुसार, प्रदर्शनी के उद्घाटन से महज कुछ घंटे पहले प्रबंधन ने उन्हें उन तस्वीरों को हटाने के लिए कहा जो पिछले कुछ महीनों के दौरान राजधानी में हुए युवा आंदोलनों को कैमरे में कैद करती थीं। उनका तर्क था कि इन तस्वीरों का उद्देश्य किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में प्रचार करना नहीं था, बल्कि यह केवल एक दृश्यात्मक दस्तावेज के रूप में थीं। प्रबंधन की तरफ से यह चेतावनी भी दी गई थी कि यदि तस्वीरें नहीं हटाई गईं तो पूरी प्रदर्शनी को ही रद्द कर दिया जा सकता है।
शुरुआत में रेहान ने इन तस्वीरों को हटाने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में कड़े दबाव और विवाद के बीच प्रदर्शनी बेहद सीमित रूप में आगे बढ़ सकी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 105 में से करीब 70 से अधिक तस्वीरों को हटा दिया गया और अंततः प्रदर्शनी की दीवारों पर केवल 40 के आसपास तस्वीरें ही शेष बचीं। इस कार्रवाई को लेकर रेहान और उनके समर्थकों में गहरी नाराजगी देखने को मिली, क्योंकि इससे उनकी मूल कलात्मक परिकल्पना को बड़ा झटका लगा।
प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा का खुला समर्थन
इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक और कड़ा संदेश साझा करते हुए अपने बेटे रेहान का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि जब सत्ता या ताकत रखने वाला कोई व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से भयभीत होने लगता है, तो उसे इस बात का अहसास तक नहीं होता कि वह अपनी उस ताकत को पहले ही गंवा चुका है जिसे वह बचाने का प्रयास कर रहा था। प्रियंका ने रेहान को संबोधित करते हुए कहा कि वह हमेशा सच्चाई के मार्ग पर खड़े रहें और हर खूबसूरत चीज अपना रास्ता स्वयं ढूंढ लेती है। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि उन्हें अपने बेटे पर हमेशा गर्व है और हमेशा रहेगा।
प्रियंका गांधी के इस तीखे बयान को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कला पर लगाई जाने वाली कथित पाबंदियों के एक बड़े सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके साथ ही प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा ने भी अपने बेटे की पोस्ट को साझा करते हुए समर्थन जताया। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इस पूरे मामले को सीधी सेंसरशिप करार दिया और सरकार तथा प्रबंधन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि जब देश का तिरंगा झंडा भी आपत्ति का विषय बनने लगे, तो यह सोचना होगा कि असल समस्या कला में है या फिर सत्ता में बैठे लोगों के रवैये में। पवन खेड़ा ने यह भी रेखांकित किया कि किस तरह से 74 आर्टवर्क्स को प्रदर्शनी की दीवारों से हटा दिया गया और अब वहां केवल खाली कीलें ही नजर आ रही हैं।
प्रबंधन की प्रतिक्रिया और कला जगत में छिड़ी बहस
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बीकानेर हाउस प्रबंधन की ओर से तत्काल कोई भी विस्तृत या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यही वजह है कि रेहान वाड्रा और कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को प्रबंधन की ओर से पूरी तरह पुष्ट नहीं माना जा सकता है। इसके बावजूद ‘No Idea Is Final’ के इस आयोजन और उसके बहाने पैदा हुए विवाद ने देश में कलात्मक और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
यह विवाद अब केवल कुछ तस्वीरों को हटाने तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है कि सार्वजनिक सांस्कृतिक परिसरों और गैलरी में रचनात्मक स्वतंत्रता का दायरा कितना सुरक्षित है। एक तरफ जहां रेहान का पक्ष यह है कि उनकी तस्वीरें केवल युवा आंदोलनों का एक तथ्यात्मक दस्तावेज मात्र थीं, वहीं दूसरी तरफ प्रबंधन का विस्तृत दृष्टिकोण आना अभी बाकी है। प्रियंका गांधी के इस राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हस्तक्षेप ने इस मामले को तूल दे दिया है, और अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या रेहान अपनी उन तस्वीरों को किसी अन्य वैकल्पिक मंच पर प्रदर्शित कर पाते हैं या नहीं।


















