बीकानेर के PBM अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला अब भी चर्चा के केंद्र में है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन दोनों ही इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसी सिलसिले में रविवार शाम केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल खुद अस्पताल पहुंचे और भर्ती प्रसूताओं की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया।
मेडिकल बोर्ड के साथ लंबी बैठक
अस्पताल पहुंचने के बाद केंद्रीय मंत्री ने मौजूद मेडिकल बोर्ड के साथ विस्तृत बैठक की और पूरे इलाज प्रबंधन की एक-एक जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों से मरीजों की मौजूदा हालत, इलाज की प्रक्रिया और अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों को लेकर विस्तार से बातचीत की। मेघवाल ने बोर्ड को साफ निर्देश दिए कि किसी भी मरीज के उपचार में जरा-सी भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए और हर प्रसूता को बेहतरीन चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री और शासन सचिव को दी जानकारी
दौरे के बाद केंद्रीय मंत्री ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को फोन पर दी और उन्हें अब तक की पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके अलावा उन्होंने प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से भी बात की और अस्पताल में चल रहे इलाज तथा व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।
21 दिन बाद तारा देवी को मिली राहत
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक इस वक्त कुल पांच प्रसूताएं ICU में भर्ती हैं, जिन पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी रखे हुए है। राहत की सबसे बड़ी खबर तारा देवी को लेकर आई, जो 21 दिन से ICU में भर्ती थीं और जिनकी हालत में सुधार के बाद अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उनकी घर वापसी से परिजनों के साथ-साथ इलाज में जुटे चिकित्सकों ने भी राहत की सांस ली।
हालांकि सभी के लिए स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। प्रीति और शारदा की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और दोनों वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। इनकी स्थिति नाजुक जरूर है, लेकिन डॉक्टर लगातार नजर रखते हुए जरूरी उपचार दे रहे हैं। बाकी बची तीन प्रसूताओं की सेहत में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है, जिसे चिकित्सा टीम एक सकारात्मक संकेत मान रही है।
हर घंटे हो रही ICU की निगरानी
मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों का कहना है कि हर मरीज के लिए अलग और विशेष उपचार योजना तैयार की गई है और ICU में भर्ती सभी प्रसूताओं की स्थिति की हर घंटे समीक्षा की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने भी दोहराया कि किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं बरती जा रही और तमाम संसाधन मरीजों की देखभाल में झोंक दिए गए हैं। जाते-जाते केंद्रीय मंत्री ने प्रबंधन को हिदायत दी कि मरीजों के परिजनों को समय-समय पर सही जानकारी दी जाए और पूरी इलाज प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।













