कारगिल विजय दिवस के गौरवशाली अवसर पर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए द्रास का दौरा किया। वहां बने ऐतिहासिक कारगिल वॉर मेमोरियल में रक्षा मंत्री ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सैनिकों के अद्वितीय बलिदान को नमन किया। इस गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी उपस्थित रहे, जिन्होंने युद्ध स्मारक पर पहुंचकर वीर जवानों की शहादत को याद किया और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। द्रास में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का माहौल देखा गया, जहां देश के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों ने मिलकर भारतीय सेना के ऐतिहासिक शौर्य को याद किया।
शहीदों के बलिदान को याद करते हुए एक्स पर साझा किए विचार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल कैलेंडर की कोई सामान्य तारीख नहीं है, बल्कि इस दिन की भावना एक सशक्त और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण करती है। यह ऐतिहासिक दिन भारत के प्रत्येक युवा को राष्ट्रप्रेम, निस्वार्थ सेवा और सर्वोच्च बलिदान की सीख देता है। इतिहास के पन्नों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 27 साल पहले पाकिस्तान ने अत्यंत धोखेबाजी के साथ भारतीय चोटियों पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया था। लेकिन हमारे जांबाज सैनिकों ने अपनी अटूट वीरता और असाधारण साहस के बल पर दुश्मन के हर नापाक इरादे को मिट्टी में मिला दिया और देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की।
पाकिस्तान से बातचीत के लिए भारत का कड़ा रुख और पीओके की शर्त
सीमाओं की सुरक्षा और पड़ोसी देश के रवैये पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने दोनों देशों के बीच के बड़े अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आज जहां भारत निरंतर प्रगति, नए नवाचारों और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं पाकिस्तान आज भी आतंकवाद और अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने की अपनी पुरानी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। रक्षा मंत्री ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान ने भारत की शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के मार्ग में कोई भी बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की, तो उसे इसका अत्यंत करारा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने भारत की विदेश नीति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ अब कोई भी बातचीत तभी संभव होगी, जब चर्चा का मुख्य विषय पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके होगा। उन्होंने दोहराया कि पीओके हमेशा से भारत का अटूट हिस्सा रहा है, जिस पर पाकिस्तान ने अनधिकृत कब्जा जमा रखा है।
ऑपरेशन सिंदूर का पराक्रम और भारतीय सेना की हर चुनौती के लिए तैयारी
अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री ने सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से हमारी सेना ने आतंकवादियों और सीमा पार बैठे उनके आकाओं को ऐसा करारा सबक सिखाया था, जिसे वे कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाले हर नापाक कदम का यही अंजाम होगा। कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर राजनाथ सिंह ने द्रास सेक्टर में मुस्तैद जवानों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज भी छद्म युद्ध और घुसपैठ जैसी कायराना हरकतों में लगा हुआ है, लेकिन भारतीय सेना देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। वीर सैनिकों के इसी हौसले और त्याग के कारण ही देश के आम नागरिक पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं और बिना किसी डर के अपने सपनों को साकार कर पा रहे हैं।
आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन और शौर्य भोज का आयोजन
इस विशेष स्मृति समारोह के दौरान द्रास में आधुनिक सैन्य तकनीक का बेहतरीन प्रदर्शन किया गया, जिसमें सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले उन्नत ड्रोन और पहाड़ी क्षेत्रों में काम आने वाले रोबोटिक म्यूल का प्रदर्शन शामिल था। इसके साथ ही भारतीय सेना के जवानों ने अपनी मार्शल आर्ट्स ड्रिल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और लद्दाख की अनूठी सांस्कृतिक विरासत पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। समारोह के समापन पर रक्षा मंत्री ने आयोजित 'शौर्य भोज' में भाग लिया। इस विशेष भोज में लद्दाख के उपराज्यपाल, भारतीय सेना प्रमुख, वरिष्ठ सैन्य कमांडर, कारगिल युद्ध के वीर सेनानी, वीरता पुरस्कारों से सम्मानित विजेता, वीर नारियां, शहीदों के परिवारजन और भारी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।

















