बूंदी जिले के कराड खेड़ी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक आम दिन अचानक तब खौफनाक स्थिति में बदल गया, जब स्कूल परिसर के अंदर एक बेहद जहरीला कोबरा सांप रेंगता हुआ दिखाई दिया। इस खतरनाक जीव के अचानक सामने आने से वहां मौजूद छोटे-छोटे स्कूली बच्चों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के बीच भारी दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे शिक्षा का यह मंदिर कुछ देर के लिए खतरे के साये में आ गया।
शिक्षकों की सतर्कता से सुरक्षित बचे छात्र
स्कूल में इतनी बड़ी संख्या में मासूम बच्चों की मौजूदगी के कारण स्थिति किसी भी पल बेकाबू या जानलेवा हो सकती थी। लेकिन, विद्यालय के अध्यापकों ने खतरे को भांपते हुए जबरदस्त सूझबूझ और मुस्तैदी का परिचय दिया। उन्होंने बिना कोई समय गंवाए छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। घबराए हुए बच्चों को शांत करते हुए, शिक्षकों ने तुरंत एक सुरक्षित निकासी अभियान चलाया और सभी छात्र-छात्राओं को सांप वाले स्थान से दूर निकालकर परिसर के एक पूरी तरह से सुरक्षित हिस्से में पहुंचा दिया, जिससे एक बड़ा संभावित हादसा टल गया।
खतरनाक कोबरा और 30 मिनट की कड़ी मशक्कत
बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के तुरंत बाद, स्कूल प्रशासन ने स्थानीय वन्यजीव और सर्प रेस्क्यू एक्सपर्ट बहादुर सिंह को तत्काल घटना की सूचना दी। चूंकि मामला छोटे बच्चों की जान से जुड़ा था, इसलिए रेस्क्यू एक्सपर्ट ने स्थिति की गंभीरता को समझा और बिना एक भी पल बर्बाद किए तुरंत स्कूल के लिए दौड़ पड़े। मौके पर पहुंचते ही उन्होंने हालात का सावधानीपूर्वक जायजा लिया। यह रेस्क्यू ऑपरेशन बिल्कुल भी आसान नहीं था, क्योंकि वहां मौजूद कोबरा उस वक्त बेहद खतरनाक और अत्यधिक आक्रामक मुद्रा में था। करीब 30 मिनट तक चली सांस थमा देने वाली मशक्कत और बेहद सावधानी भरे कदमों के बाद, एक्सपर्ट ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए कोबरा को बिना कोई चोट पहुंचाए सफलतापूर्वक काबू में कर लिया। जब सांप को सुरक्षित तरीके से एक डिब्बे में बंद कर दिया गया, तब जाकर वहां मौजूद घबराए हुए शिक्षकों, कर्मचारियों और बच्चों ने राहत की एक बड़ी सांस ली।
प्राकृतिक आवास में वापसी और मानसून अलर्ट
स्कूल परिसर से सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद, रेस्क्यू टीम उसे इंसानी आबादी वाले इलाके से काफी दूर एक घने जंगल की ओर ले गई। वहां पहुंचकर कोबरा को उसके प्राकृतिक आवास में पूरी तरह से सुरक्षित छोड़ दिया गया, ताकि वह अपना जीवन जी सके। इस सफल ऑपरेशन के बाद, स्नेक कैचर बहादुर सिंह ने वहां मौजूद शिक्षकों, बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एक बेहद अहम संदेश दिया। उन्होंने लोगों को समझाया कि मानसून और भारी बारिश के मौसम में जमीन के अंदर रहने वाले जीवों के बिलों में पानी भर जाता है। अपनी जान बचाने और एक सूखी, सुरक्षित जगह की तलाश में ये सांप और अन्य जहरीले जीव अक्सर मजबूरी में इंसानी बस्तियों या इमारतों का रुख कर लेते हैं। एक्सपर्ट ने आम जनता से अपील की कि अगर उन्हें कहीं भी सांप या कोई अन्य खतरनाक जीव दिखाई दे, तो वे बिल्कुल न घबराएं और ना ही उस बेजुबान को मारने की कोशिश करें, क्योंकि ऐसा करना जानलेवा हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि ऐसी स्थिति में हमेशा विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम को तुरंत फोन करना चाहिए, ताकि जीव को सुरक्षित बचाकर वापस जंगल में छोड़ा जा सके। अंत में, स्कूल प्रशासन ने समय पर पहुंचकर बच्चों की जान बचाने और कोबरा को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ने के लिए रेस्क्यू एक्सपर्ट का दिल से आभार व्यक्त किया।



















