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झुंझुनूं में हाईवे किनारे बाइक सवार हेड कांस्टेबल को अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी, अस्पताल में मौतराजस्थान
5 सित॰ 2026, 6:11 pm (4 घंटे पहले)· 2

झुंझुनूं में हाईवे किनारे बाइक सवार हेड कांस्टेबल को अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी, अस्पताल में मौत

झुंझुनूं जिले में नवलगढ़-झुंझुनूं हाईवे पर बदराणा के पास एक अज्ञात वाहन ने हेड कांस्टेबल महेंद्र मीणा की बाइक में टक्कर मार दी, जिसके बाद नवलगढ़ जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस वाहन और चालक की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में नवलगढ़ पुलिस थाने में तैनात एक हेड कांस्टेबल की सड़क हादसे में जान चली गई। बदराणा गांव के पास हुई इस घटना में एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए।

घर से ड्यूटी की ओर निकले थे महेंद्र मीणा

पुलिस के मुताबिक मृतक हेड कांस्टेबल का नाम महेंद्र मीणा है। वे नवलगढ़ के सीकर रोड इलाके में अपने घर से बाइक लेकर बलवंतपुरा फाटक की तरफ रवाना हुए थे। रास्ते में बदराणा के पास एक तेज गति से आ रहे वाहन ने अचानक उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर की रफ्तार इतनी तेज थी कि वे सड़क पर दूर जा गिरे और बुरी तरह जख्मी हो गए। इस पूरे इलाके में यह हाईवे रोजाना भारी आवाजाही वाला रास्ता माना जाता है, जहां रात और सुबह के वक्त वाहन तेज रफ्तार में गुजरते हैं।

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108 एंबुलेंस से पहुंचाया गया अस्पताल

हादसे के तुरंत बाद वहां से गुजर रहे राहगीर और आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। किसी ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम और एंबुलेंस सेवा को दी। खबर मिलते ही 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायल महेंद्र मीणा को तुरंत नवलगढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि जांच में डॉक्टरों ने पाया कि उनकी सांसें थम चुकी हैं और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

थानाधिकारी खुद अस्पताल पहुंचे

जैसे ही अपने ही महकमे के एक साथी की मौत की खबर फैली, नवलगढ़ थाने के थानाधिकारी अजय सिंह खुद जिला अस्पताल पहुंच गए और पूरे मामले की जानकारी ली। उनके निर्देश पर शव को अस्पताल के मुर्दाघर में सुरक्षित रखवाया गया। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर हादसे की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि टक्कर मारने वाला वाहन कौन सा था और उसे चला कौन रहा था, इसलिए पुलिस आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाल रही है ताकि वाहन और चालक तक पहुंचा जा सके।

सीकर के सांखू गांव के रहने वाले थे महेंद्र मीणा

महेंद्र मीणा मूल रूप से सीकर जिले के बलारां थाना क्षेत्र स्थित मीणा की ढाणी सांखू गांव के निवासी थे और उनके पिता का नाम बनवारी लाल है। वे लंबे समय से नवलगढ़ थाने में हेड कांस्टेबल के पद पर सेवाएं दे रहे थे। उनकी अचानक हुई मौत की खबर से पुलिस महकमे में मातम पसर गया, सहकर्मियों और जान-पहचान वालों में शोक की लहर देखी जा रही है। पुलिस ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके बाद पार्थिव देह परिजनों को सौंपी जाएगी और अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं पूरी हो सकेंगी।

सवाल-जवाब

हादसा कहां हुआ?
यह हादसा नवलगढ़-झुंझुनूं स्टेट हाईवे पर बदराणा गांव के पास हुआ।
मृतक हेड कांस्टेबल का नाम क्या है?
मृतक का नाम महेंद्र मीणा है, जो नवलगढ़ पुलिस थाने में हेड कांस्टेबल थे।
हादसा कैसे हुआ?
वे बाइक से बलवंतपुरा फाटक की ओर जा रहे थे, तभी एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
उन्हें अस्पताल कैसे पहुंचाया गया?
सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और उन्हें नवलगढ़ जिला अस्पताल ले जाया गया।
उनकी मौत कब और कहां हुई?
नवलगढ़ जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
महेंद्र मीणा मूल रूप से कहां के रहने वाले थे?
वे सीकर जिले के बलारां थाना क्षेत्र के मीणा की ढाणी सांखू गांव के निवासी थे और बनवारी लाल के पुत्र थे।
टक्कर मारने वाले वाहन की पहचान हुई या नहीं?
नहीं, पुलिस अब तक अज्ञात वाहन और उसके चालक की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 घंटे पहले

यह घटना न केवल एक पुलिसकर्मी की असमय मौत है, बल्कि हाईवे पर अनियंत्रित गति और निगरानी तंत्र की कमजोरियों को भी उजागर करती है। अज्ञात वाहन की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालना और तकनीकी साक्ष्य जुटाना इस मामले की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि आरोपी चालक को जल्द से जल्द न्याय के दायरे में लाया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·4 घंटे पहले

यह हादसा राज्य के प्रमुख मार्गों पर तेज रफ्तार वाहनों के बेकाबू होने और सुरक्षा उपायों की पोल खोलता है। ड्यूटी पर जाते वक्त इस तरह की दुर्घटनाएं सड़क सुरक्षा ऑडिट की अनिवार्यता को बल देती हैं। पुलिस महकमे के लिए यह बड़ी क्षति है, और अब त्वरित तकनीकी जांच के जरिए फरार वाहन चालक तक पहुँचना ही न्याय की पहली और सबसे अहम शर्त होगी।

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