राजस्थान के कोटा शहर में नदी पार के नान्ता इलाके से सांप के काटने की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें दो मासूम बच्चों की जान चली गई. मरने वालों में 5 साल का प्रशांत और 9 साल का विशु शामिल हैं. दोनों बच्चे नान्ता क्षेत्र के बड़गांव और पार्श्वनाथ अपार्टमेंट इलाके में रहते थे. थोड़े ही समय के अंतराल पर हुई इन दोनों मौतों ने नदी किनारे बसे इस इलाके के लोगों को हिलाकर रख दिया है.
अलग-अलग जगहों पर हुआ सर्पदंश
मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों बच्चों को अलग-अलग घटनाओं में सांप ने डसा था. सांप के काटते ही परिजन दोनों बच्चों को लेकर तुरंत अस्पताल पहुंचे, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके. लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान दोनों मासूमों ने दम तोड़ दिया. बच्चों की मौत की खबर मिलते ही परिवारों में मातम छा गया और परिजन फूट-फूटकर रोने लगे. दोनों घटनाएं इलाके के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर हुईं, जिसने आसपास रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है.
मां रामप्यारी की हालत नाजुक
इन दो घटनाओं में एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि प्रशांत की मौत वाली घटना में उसकी मां रामप्यारी को भी सांप ने डस लिया. उन्हें भी तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है. डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे हुए है और इलाज जारी है. डॉक्टरों ने अभी तक यह साफ नहीं बताया है कि उनकी हालत कब तक स्थिर होगी, ऐसे में परिवार बेसब्री से अस्पताल से मिलने वाली हर अपडेट का इंतजार कर रहा है. बेटे को खोने के गम के बीच रामप्यारी खुद भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं.
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही नान्ता थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मामलों की जानकारी जुटाई. दोनों मासूम बच्चों के शव फिलहाल कोटा के एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाए गए हैं. पुलिस जरूरी कानूनी कार्रवाई पूरी कर रही है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे. फिलहाल दोनों मामलों में किसी अन्य कानूनी अड़चन की जानकारी सामने नहीं आई है. नान्ता थाना पुलिस दोनों घटनाओं की अलग-अलग जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चों को सांप ने किन हालात में काटा.
मानसून में क्यों बढ़ जाता है सर्पदंश का खतरा
बारिश के मौसम में सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतु अक्सर अपने बिलों में पानी भर जाने की वजह से बाहर निकलकर आबादी वाले इलाकों की तरफ आ जाते हैं, जिससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं. स्थानीय स्तर पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इसी मानसूनी सीजन में अब तक आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की सांप के काटने से मौत हो चुकी है, जबकि इस साल अब तक एक दर्जन से भी ज्यादा लोग सर्पदंश का शिकार हो चुके हैं. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने आबादी वाले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके की वही नालियां और खाली प्लॉट, जो हर मानसून में पानी से भर जाते हैं, बार-बार डूबे हुए बिलों से निकलकर भागने वाले सांपों के लिए रास्ता बनते रहे हैं. ऐसे में विशेषज्ञ घरों और आसपास सफाई बनाए रखने और सांप दिखने पर तुरंत दूरी बनाने की सलाह दे रहे हैं.



















