जयपुर में इन दिनों नगरीय निकाय चुनाव का प्रचार अपने पूरे परवान पर है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच किशनपोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अमीन कागजी का एक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। शहर के परकोटे के भीतर एक मुस्लिम बहुल इलाके में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कागजी ने जनता से अपील की कि अगर वे बंटेंगे तो कटेंगे। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
जब इस संबंध में अमीन कागजी से सवाल किया गया और उनके इस बयान के मायने पूछे गए, तो उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी अक्सर इसी तरह की बात कहते हैं। कागजी ने अपने इस बयान का स्पष्टीकरण देते हुए इसके पीछे की अपनी मंशा को भी जनता के सामने रखा और बताया कि आखिर उन्होंने इस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया था।
मुस्लिम वोटों में सेंधमारी रोकने का प्रयास
अमीन कागजी के अनुसार, नगरीय निकाय चुनाव के दौरान मुस्लिम मतों में भारतीय जनता पार्टी की सेंधमारी को रोकने के लिए उन्होंने यह बयान दिया था। उनका मुख्य उद्देश्य मुस्लिम मतदाताओं को यह समझाना था कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट रहें और अलग-अलग धड़ों में न बंटें। कागजी ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपनाए गए टिकट वितरण के तरीकों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आमतौर पर भाजपा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को चुनावी मैदान में टिकट नहीं देती है, लेकिन इस बार के नगरीय निकाय चुनावों में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से मुस्लिम उम्मीदवारों को ही टिकट थमाए गए हैं। कागजी का मानना था कि इसी रणनीति के तहत उन्होंने मतदाताओं को सतर्क करने की कोशिश की थी।
चुनावी गणित और दोनों दलों की नजरें
जयपुर के परकोटे के इलाकों में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों में मुस्लिम मतदाता हमेशा से ही एक निर्णायक चुनावी कारक माने जाते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस विधायक अमीन कागजी का यह बयान सीधे तौर पर स्थानीय चुनावी गणित और समीकरणों से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। खुद कांग्रेस विधायक इसे भाजपा द्वारा अल्पसंख्यक वोटों में लगाए जाने वाले संभावित आघात को नाकाम करने की कोशिश बता रहे हैं। उनके इस बयान से यह बात भी पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है कि मौजूदा चुनाव प्रचार अब केवल सामान्य स्थानीय मुद्दों या उम्मीदवारों के व्यक्तिगत चेहरे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तमाम राजनीतिक दल अपने पारंपरिक और निर्णायक वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस प्रकार मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों का रणनीतिक चयन और नेताओं के ऐसे बयान चुनावी माहौल को पूरी तरह प्रभावित करने का माद्दा रखते हैं।
नारे की राजनीतिक पृष्ठभूमि
राजनीतिक हलकों में 'बंटोगे तो कटोगे' वाला यह नारा कोई नया नहीं है और इसे लेकर पहले भी तीखी राजनीतिक बयानबाजी और बहसें होती रही हैं। जब अमीन कागजी से इस नारे के इस्तेमाल पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी। हालांकि, कागजी ने इस बात को लेकर कोई असमंजस नहीं रखा कि उनके कहने का उद्देश्य क्या था। उन्होंने दोहराया कि उनका एकमात्र मकसद मुस्लिम मतदाताओं को किसी भी तरह के बिखराव से बचाना और उन्हें एक मंच पर एकजुट होकर रहने की सलाह देना था।
चुनावी माहौल पर पड़ने वाला असर
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमीन कागजी के इस बयान का असर चुनावी परिणामों और प्रचार अभियान पर कितना गहरा पड़ता है। फिलहाल इस एक बयान ने जयपुर के नगरीय निकाय चुनाव में मुस्लिम वोटों को अपने पाले में करने के लिए चल रही सियासी खींचतान को सतह पर ला दिया है। विशेष रूप से परकोटे के मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही दलों की चुनावी रणनीतियों पर अब इस बयान के बाद पैनी नजर रखी जा रही है। कांग्रेस विधायक का यह बयान ठीक ऐसे समय पर सामने आया है जब दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में ताबड़तोड़ प्रचार कर रहे हैं, जिसके कारण यह पूरा घटनाक्रम चर्चा का एक नया केंद्र बन गया है।





















