हाथ में एक छोटा सा इंजेक्शन, सिर पर पारंपरिक पगड़ी और ग्रामीण पहनावा देखकर पहली नजर में कोई भी अनुपाराम को एक साधारण ग्रामीण समझ सकता है। लेकिन उनके पास अनुभव का वह पुराना खजाना और हुनर है जो आज की पीढ़ी में बहुत कम देखने को मिलता है। जब भी इस इलाके में किसी जानवर को मदद या चिकित्सा की आवश्यकता होती है, अनुपाराम बिना किसी देरी के अपनी पारंपरिक शैली में उनका उपचार करने निकल पड़ते हैं।
परंपरागत ज्ञान और जड़ी-बूटियों का चमत्कार
एक ऐसा दौर भी था जब सुदूर ग्रामीण अंचलों में इंसानों के लिए भी डॉक्टर आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे, जानवरों की बात तो दूर की है। उस समय वैद्य और गांव के बुजुर्ग लोग ही जड़ी-बूटियों और देसी नुस्खों के जरिए बीमारियों का इलाज करते थे। आधुनिक चिकित्सा के इस दौर में भी अनुपाराम ने इस पुरानी परंपरा और प्राचीन ज्ञान को पूरी तरह जीवित रखा हुआ है। वे जंगलों के भीतर जाकर दुर्लभ जड़ी-बूटियां और पत्तियां खुद एकत्र करते हैं। इसके बाद वे इनसे ऐसा अचूक लेप और दवा तैयार करते हैं, जिसके इस्तेमाल से जानवरों के गंभीर से गंभीर घाव और कठिन बीमारियां बहुत कम समय में ठीक हो जाती हैं।
वन्यजीवों के लिए खास पहचान रखता है जवाई क्षेत्र
राजस्थान का जवाई इलाका अपनी अनूठी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध वन्यजीवों के लिए पूरी दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान रखता है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रेनाइट की विशाल और भव्य पहाड़ियों के बीच स्वतंत्र रूप से घूमने वाले तेंदुओं के लिए जाना जाता है। तेंदुओं के अलावा यहां मगरमच्छ, नीलगाय, लोमड़ी, लकड़बग्घे और विभिन्न दुर्लभ प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भी बड़ी संख्या में निवास करते हैं। अनुपाराम केवल पालतू मवेशियों की ही देखभाल नहीं करते, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर इन सभी वन्यजीवों की मदद के लिए भी पूरी तत्परता से आगे आते हैं।
इंसानों और तेंदुओं का अनोखा सह-अस्तित्व
इस पूरे इलाके की सबसे बड़ी विशेषता यहां का देवासी यानी रबारी समुदाय और तेंदुओं के बीच का गहरा और शांतिपूर्ण संबंध है। देवासी परिवार सदियों से इन खतरनाक माने जाने वाले तेंदुओं के साथ बेहद आत्मीयता और तालमेल के साथ रहते आए हैं। इस क्षेत्र में कभी भी इंसानों पर तेंदुओं के हमले की कोई घटना सामने नहीं आती है। अनुपाराम भी इसी अनूठी देवासी संस्कृति का एक अहम हिस्सा हैं, जहां वन्यजीवों को डर या खतरे की बजाय अपना साथी और प्रकृति का एक अनमोल वरदान माना जाता है।
प्रकृति और जीव-दया का अनूठा संदेश
अनुपाराम की यह निस्वार्थ सेवा सिर्फ जानवरों का उपचार करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को प्रकृति और जीव-दया से जोड़ने का एक प्रेरणादायक संदेश भी देती है। वे बिना किसी प्रकार की सरकारी सहायता या किसी भी आर्थिक लाभ की परवाह किए बिना काम करते हैं। दिन हो या रात, बस एक पुकार मिलते ही वे बेजुबान जानवरों का दर्द दूर करने के लिए पहुंच जाते हैं। आज के इस आधुनिक और भागदौड़ भरे युग में अनुपाराम जैसी शख्सियतें जवाई के वन्यजीवों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रही हैं।



















