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कोटा के मुर्गी फार्म में घुसा आठ फीट लंबा अजगर, मुर्गियों की चीख-पुकार से मचा हड़कंपराजस्थान
24 अग॰ 2026, 8:57 am (2 घंटे पहले)· 2

कोटा के मुर्गी फार्म में घुसा आठ फीट लंबा अजगर, मुर्गियों की चीख-पुकार से मचा हड़कंप

राजस्थान के कोटा में रविवार शाम एक मुर्गी फार्म में विशालकाय अजगर घुस आया। स्नेक कैचर ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ दिया।

राजस्थान के कोटा शहर में रावतभाटा रोड पर स्थित एक मुर्गी फार्म में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब वहां एक विशालकाय अजगर आ धमका। करीब सात से आठ फीट लंबे इस अजगर ने बाड़े के भीतर घुसकर एक मुर्गी को अपना निवाला बना लिया। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

मुर्गियों के अजीब बर्ताव से हुआ शक

रविवार शाम को रावतभाटा रोड स्थित इस फार्म में अचानक मुर्गियां जोर-जोर से शोर मचाने लगीं और घबराकर इधर-उधर भागने लगीं। मुर्गियों की इस अजीब हरकत और चीख-पुकार को भांपते हुए फार्म संचालक अब्दुल सलाम को किसी अनहोनी का संदेह हुआ। जब वह हालात का जायजा लेने के लिए बाड़े के अंदर पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। बाड़े के एक कोने में सात से आठ फीट लंबा अजगर बैठा हुआ था, जो पहले ही एक मुर्गी का शिकार कर चुका था। इस खतरनाक नजारे को देखकर वहां काम कर रहे तमाम कर्मचारियों में डर फैल गया।

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स्नेक कैचर ने संभाला मोर्चा

विशालकाय सांप को सामने पाकर अब्दुल सलाम ने बिना वक्त गंवाए स्नेक कैचर गोविंद शर्मा को फोन किया और पूरी स्थिति से अवगत कराया। सूचना मिलते ही गोविंद शर्मा जरूरी उपकरणों के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पूरी सावधानी और पेशेवर तरीके से बाड़े के भीतर मौजूद अजगर को काबू करने की मुहिम शुरू की। काफी देर तक चली मशक्कत के बाद आखिरकार अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया, जिसके बाद फार्म के मालिक और कर्मचारियों ने चैन की सांस ली।

लाडपुरा के जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया

सफलतापूर्वक रेस्क्यू करने के बाद स्नेक कैचर उस अजगर को लाडपुरा इलाके के घने जंगल में ले गए और उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों को भी दे दी गई। गोविंद शर्मा ने इस बारे में बताया कि बदलते मौसम और मानसून के सीजन के दौरान अक्सर वन्यजीव खाने की तलाश में या सुरक्षित ठिकाने की चाहत में बस्तियों और इंसानी आबादी के करीब आ जाते हैं।

वन विभाग की अहम चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के दिनों में सांप और अजगर जैसे जीवों के बिलों में पानी भर जाता है, जिसकी वजह से वे बाहर निकलने को मजबूर होते हैं। ऐसी स्थिति में आम जनता को यह सलाह दी जाती है कि यदि रिहाइशी इलाकों या घरों के आसपास कोई भी खतरनाक वन्यजीव नजर आए, तो खुद उसे पकड़ने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। किसी भी बड़े हादसे से बचने के लिए तुरंत किसी प्रशिक्षित स्नेक कैचर या वन विभाग की टीम को संपर्क करना चाहिए।

सवाल-जवाब

यह घटना कहाँ हुई?
यह घटना राजस्थान के कोटा शहर में रावतभाटा रोड पर स्थित एक मुर्गी फार्म में हुई।
अजगर ने क्या किया था?
करीब 7 से 8 फीट लंबे इस अजगर ने मुर्गी के बाड़े में घुसकर एक मुर्गी का शिकार कर लिया था।
अजगर को किसने और कहाँ सुरक्षित छोड़ा?
स्नेक कैचर गोविंद शर्मा ने अजगर का रेस्क्यू किया और उसे लाडपुरा क्षेत्र के घने जंगल में छोड़ा।
वन विभाग और विशेषज्ञों की क्या सलाह है?
विशेषज्ञों की सलाह है कि रिहाइशी इलाकों में वन्यजीव दिखने पर खुद पकड़ने की कोशिश न करें और तुरंत प्रशिक्षित स्नेक कैचर या वन विभाग को सूचित करें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·56 मिनट पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे मानसून के दौरान जलभराव के कारण वन्यजीव मानव बस्तियों का रुख करने लगे हैं। हालांकि इस मामले में स्नेक कैचर की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में वन विभाग को त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और स्थानीय स्तर पर जागरूक टीमों की संख्या बढ़ानी होगी ताकि इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव को टाला जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·55 मिनट पहले

यह मामला साफ तौर पर मानव बस्तियों के दायरे में वन्यजीवों के लगातार बढ़ते दखल को उजागर करता है। जब प्राकृतिक आवासों के पास मानवीय गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इस तरह की घटनाएं आम हो जाती हैं। हालांकि स्नेक कैचर ने समय रहते स्थिति संभाल ली, लेकिन भविष्य में इस तरह के वन्यजीव संघर्षों से निपटने के लिए वन विभाग को अर्ध-शहरी और ग्रामीण सीमाओं पर नियमित गश्त और त्वरित सहायता केंद्रों का ढांचा मजबूत करना होगा, ताकि स्थानीय जनता बिना किसी जोखिम के तुरंत मदद पा सके।

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