राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर एक नए सरकारी सर्वे के जरिए सामने आई है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। प्रदेशभर में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। राज्य के कुल 64,484 सरकारी स्कूल भवनों में से 3,767 भवन पूरी तरह जर्जर स्थिति में पाए गए हैं। इनमें से सरकार ने अब तक केवल 2,558 स्कूल भवनों को ही आधिकारिक तौर पर जर्जर घोषित किया है, जबकि लगभग 1,210 भवनों को अभी भी जर्जर घोषित किया जाना बाकी है। सबसे डराने वाली बात यह है कि करीब 41,178 स्कूल भवन यानी लगभग 75 फीसदी इमारतों को तत्काल बड़ी मरम्मत की सख्त आवश्यकता है। यदि इन भवनों की समय रहते सुधि नहीं ली गई, तो आने वाले समय में ये कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, प्रदेश के 611 स्कूल ऐसे भी हैं जिनका अपना कोई भवन ही नहीं है।
जयपुर और अन्य जिलों की जमीनी हकीकत
राजधानी जयपुर से लेकर दूरदराज के जिलों तक स्कूलों की स्थिति बेहद दयनीय है। जयपुर के पास रामपुरा में एक सरकारी स्कूल तबेले में चलते हुए पहले ही सामने आ चुका है, हालांकि यहां 1 सितंबर से नई बिल्डिंग का निर्माण शुरू होने की बात कही गई है। लेकिन यह इकलौता मामला नहीं है। जयपुर के जवाहर नगर स्थित टीला नंबर 5 के सरकारी स्कूल में भी हालात बद से बदतर हैं। स्कूल के भूतल में पानी भर जाने के कारण कमरों की स्थिति जर्जर हो चुकी है, जिसके चलते इन कमरों पर ताले लगा दिए गए हैं और अब बच्चों को पहली मंजिल के केवल एक कमरे में पढ़ाया जा रहा है। इस स्कूल की दीवारों में जगह-जगह बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं, इसके बावजूद इस भवन को अभी तक आधिकारिक तौर पर जर्जर घोषित नहीं किया गया है। सरकारी नियमों के अनुसार, जब तक किसी भवन को जर्जर घोषित नहीं किया जाता, तब तक वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया जा सकता, जिससे इन बच्चों की जान पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।
जिलावार आंकड़ों और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
विभिन्न जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। झालावाड़ में सबसे अधिक 327 स्कूल भवन जर्जर पाए गए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 19 भवनों को ही अब तक जर्जर घोषित किया गया है। इसी तरह प्रतापगढ़ में 276 भवन जर्जर मिले जिनमें से 86 को जर्जर घोषित किया गया, जबकि जयपुर में 142 जर्जर भवनों में से सरकार ने केवल 32 भवनों को ही जर्जर माना है। बुनियादी सुविधाओं का संकट सिर्फ दीवारों और छतों तक सीमित नहीं है। सरकार द्वारा विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली के एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी गई कि प्रदेश के 2,047 सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही, 1,049 स्कूलों में पीने के साफ पानी का भी कोई इंतजाम नहीं है। यानी मासूम बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं के भारी अभाव के बीच अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
कक्षा-कक्षों की सुरक्षा और आगामी रोडमैप
सरकारी सर्वे में कुल 5,40,127 कक्षा-कक्षों की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया था, जिनमें से केवल 2,36,441 कक्षा-कक्ष ही पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि आधे से भी कम कक्षा-कक्ष बच्चों के बैठने के लिए सुरक्षित हैं। वहीं दूसरी ओर, 45,365 कक्षा-कक्षों में तत्काल मरम्मत की आवश्यकता बताई गई है, लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इनमें से केवल 4,187 कक्षा-कक्षों के लिए ही मरम्मत कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति मिल पाई है। इन तमाम गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने अगले तीन वर्षों के वास्ते करीब 12,500 करोड़ रुपये का एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इस योजना के तहत पुराने स्कूल भवनों की मरम्मत और नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि विधायक निधि का 20 प्रतिशत हिस्सा सीधे स्कूलों के विकास पर खर्च किया जाएगा और कुल 3,587 नए स्कूल भवन बनाने की योजना भी बनाई गई है। अब देखना यह होगा कि इन योजनाओं और घोषणाओं को जमीन पर उतारने का काम कितनी तेजी से होता है ताकि बच्चों को एक सुरक्षित शैक्षणिक माहौल मिल सके।



















