राजस्थान के दौसा जिले में स्थित एक सरकारी विद्यालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जहरीले बीज खाने के चलते 14 मासूम विद्यार्थियों की हालत अचानक बिगड़ गई। यह गंभीर मामला सिकराय उपखंड के अंतर्गत आने वाले गनीपुर गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का है। प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों ने जहरीले बीजों को साधारण मूंगफली समझ लिया और अनजाने में खा लिया, जिसके तुरंत बाद उन्हें गंभीर शारीरिक परेशानियां होने लगीं।
मूंगफली का भ्रम और जहरीले बीजों का वितरण
इस पूरे मामले की जड़ एक गलतफहमी बनी। विद्यालय में अध्ययनरत पूजा नाम की एक छात्रा अपने घर से रतनजोत के बीज लेकर स्कूल पहुंची थी। छात्रा स्वयं इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि वे बीज जहरीले हैं और उसने उन्हें खाने योग्य मूंगफली समझ रखा था। कक्षा में आने के बाद उसने यह बीज अपने सहपाठियों और अन्य विद्यार्थियों में बांट दिए। पहली से लेकर पांचवीं कक्षा तक के कई छोटे बच्चों ने इन बीजों को मूंगफली मानकर खा लिया। बीज खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों के शरीर पर इसका विषैला प्रभाव दिखने लगा।
उल्टी और घबराहट के बीच शिक्षकों की तत्परता
बीज निगलने के थोड़ी देर बाद ही बच्चों को पेट में दर्द, लगातार उल्टी, सिर चकराना और बेचैनी जैसी गंभीर शिकायतें होने लगीं। कई बच्चों को एक साथ तड़पते देख परिसर में हड़कंप मच गया। विद्यालय की प्रिंसिपल ललिता तथा अन्य शिक्षकों ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत भांप लिया। शिक्षकों ने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय बिना कोई समय गंवाए निजी और उपलब्ध वाहनों की व्यवस्था की और सभी 14 प्रभावित बच्चों को तुरंत सिकराय के उपजिला अस्पताल पहुंचाया। समय रहते अस्पताल पहुंचने के कारण किसी बड़े खतरे को समय पर टाल दिया गया।
उपजिला अस्पताल में सघन चिकित्सकीय निगरानी
सिकराय अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए बीमार बच्चों की जांच और प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया। चिकित्सकों ने बताया कि रतनजोत के बीजों में विषाक्त तत्व पाए जाते हैं, जिससे पेट और पाचन तंत्र में तेज जहर फैलने का खतरा बन जाता है। इसी वजह से सभी 14 विद्यार्थियों को निरंतर निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार सभी बच्चों की स्थिति स्थिर बनी हुई है और उनके स्वास्थ्य मानकों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ग्रामीणों में बेचैनी और सतर्कता बरतने की जरूरत
जैसे ही विद्यालय में जहरीले बीज खाने की सूचना फैली, बच्चों के परिजन और स्थानीय ग्रामीण घबराकर अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। अस्पताल परिसर में बच्चों के परिवारजन उनका हाल जानने के लिए मौजूद हैं। इस अप्रत्याशित घटना ने शिक्षा विभाग और अभिभावकों दोनों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटे बच्चों को घातक और विषैले पेड़-पौधों के बारे में जागरूक किया जाए ताकि वे किसी भी अनजान बीज या फल को खाने की गलती न दोहराएं।


















