राजस्थान के पाली जिले में अरावली पर्वतमाला की सुरम्य वादियों के बीच स्थित बाली उपखंड का बीजापुर क्षेत्र इन दिनों आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर है। जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर बसा हर हर गंगे तीर्थ स्थल स्थानीय श्रद्धालुओं और सैलानियों के बीच मिनी हरिद्वार के रूप में विख्यात हो चुका है। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान इस ऐतिहासिक स्थल पर मां गंगा के स्वरूप के दर्शन करने और पवित्र कुंड में आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तों का भारी तांता लग रहा है। करीब पांच सदी पुराने इस तीर्थ स्थल का वातावरण प्राकृतिक सौंदर्य, ट्रैकिंग के रोमांच और गहरी धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
गौमुख से अविरल बहती है निर्मल जलधारा
इस पवित्र धाम का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर परिसर में मां गंगे के विग्रह के ठीक नीचे एक प्राचीन गौमुख स्थापित है, जिससे वर्ष के 12 महीने और चौबीसों घंटे प्राकृतिक जलधारा निरंतर बहती रहती है। मंदिर के पुजारी बाबूलाल गर्ग के अनुसार, उनके परिवार की पांच पीढ़ियां लगातार इस पावन स्थल पर पूजा-अर्चना और सेवा कार्य संभालती आ रही हैं। उनका कहना है कि इस प्राकृतिक जलस्रोत की पवित्रता और विशेषताएं हरिद्वार के गंगाजल के समान मानी जाती हैं, क्योंकि इस पानी को लंबे समय तक रखने पर भी इसमें कभी कीड़े नहीं पड़ते। इसी विश्वास के चलते यहां आने वाले श्रद्धालु इस जल को बोतलों व बरतनों में भरकर अपने घरों को ले जाते हैं।
अस्थि विसर्जन और पूर्वजों के तर्पण की परंपरा
हरिद्वार की ही तरह इस पावन कुंड की धार्मिक मान्यता बेहद व्यापक है। स्थानीय देवासी समाज के साथ-साथ राजस्थान और आसपास के कई अन्य समाजों के लोग भी अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां पहुंचते हैं। मान्यता के अनुसार, परिजन अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन इसी हर हर गंगे कुंड में करते हैं। नवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहां आने वाले लोग न केवल पूजा-अर्चना करते हैं बल्कि अपने कुल की सुख-समृद्धि की कामना भी करते हैं। अरावली की घाटियों में अवस्थित होने के कारण यहां का वातावरण शांति और आध्यात्मिक एकाग्रता प्रदान करता है।
एक ही यात्रा में तीन सिद्ध पीठों के दर्शन
इस धार्मिक यात्रा का मार्ग प्रकृति प्रेमियों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए बेहद खास है। मुख्य पार्किंग स्थल से पैदल यात्रा शुरू करने पर श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में तीन प्रमुख सिद्ध पीठों के दर्शन का अवसर मिलता है
- नागेश्वर महादेव मंदिर: पैदल यात्रा का सबसे पहला पड़ाव नागेश्वर महादेव मंदिर है। यहां यात्री देवाधिदेव महादेव के दर्शन कर अपनी आगे की चढ़ाई के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
- हर हर गंगे मां मंदिर: लगभग 40 मिनट की पैदल चढ़ाई तय करने के बाद श्रद्धालु दूसरे मुख्य पड़ाव हर हर गंगे मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर परिसर के बाहर ठंडे और स्वच्छ पानी के दो बड़े कुंड बने हुए हैं। अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं से रिसकर आने वाले इस शीतल जल में स्नान करते ही भक्तों की घंटों की थकान पूरी तरह मिट जाती है।
- प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर: कुंड में पवित्र स्नान और दर्शन के पश्चात श्रद्धालु लगभग 1.5 किलोमीटर की सीधी व बेहद खड़ी पहाड़ी चढ़ाई पार करते हैं। चोटी पर स्थित मां हिंगलाज के प्राचीन मंदिर में शीश नवाकर यह पावन यात्रा पूर्ण होती है।
ट्रैकिंग, प्रकृति और भक्ति का अनूठा संगम
नवरात्रि के पावन दिनों में इस समूचे अरावली परिक्षेत्र की छटा देखते ही बनती है। पहाड़ियों पर कल-कल बहते प्राकृतिक झरने, ठंडी पहाड़ी हवाएं, पेड़ों की शाखाओं पर अठखेलियां करते बंदर और चारों ओर हरियाली की चादर इस स्थल को दर्शनीय बनाती है। जो लोग दूरस्थ तीर्थ स्थलों की लंबी यात्रा पर नहीं जा पाते, उनके लिए बीजापुर का यह मिनी हरिद्वार आस्था और प्रकृति भ्रमण का एक संपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।























