पांच दिवसीय दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस पर राजस्थान के करौली जिले में व्यापारिक गतिविधियों में जबरदस्त उछाल देखा गया। शुक्रवार को सुबह से ही शहर के प्रमुख बाजारों में खरीदारों का तांता लगा रहा, जो देर रात तक बना रहा। स्थानीय कारोबारियों के अनुमान के मुताबिक, इस एक दिन में जिले में लगभग 25 करोड़ रुपये का सामूहिक कारोबार दर्ज किया गया है। आभूषणों से लेकर वाहनों और घरेलू बिजली के उपकरणों की रिकॉर्ड बिक्री ने स्थानीय व्यापार क्षेत्र में नई ऊर्जा भर दी है।
सोने और चांदी के बाजार में छाया ग्राहकों का उत्साह
धनतेरस के पावन अवसर पर सबसे अधिक सर्राफा बाजार में रौनक देखी गई। कीमती धातुओं की कीमतों में आई हालिया कमी ने ग्राहकों को आभूषण खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया। सर्राफा व्यवसायी दिनेश सर्राफ के अनुसार, सोने-चांदी के दामों में आई नरमी का सकारात्मक असर खरीदारी पर स्पष्ट रूप से नजर आया। लोगों ने पारंपरिक गहनों के साथ-साथ चांदी के सिक्के, बर्तन और अन्य धार्मिक वस्तुओं की जमकर खरीदारी की। अकेले करौली के सर्राफा बाजार में ही करीब 15 करोड़ रुपये के लेनदेन का अनुमान लगाया गया है।
बर्तनों और नए परिधानों की खरीदारी में तेजी
धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने की परंपरा के चलते शहर के बर्तन बाजार में भी दिनभर हलचल बनी रही। खरीदारों ने दैनिक उपयोग के स्टील, तांबे और पीतल के बर्तनों के अलावा पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली थाली, घंटी और दीवाली पूजन से जुड़ी अन्य सामग्रियों की खरीद में विशेष रुचि दिखाई। बर्तन विक्रेताओं का मानना है कि इस बार 15 लाख रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक के बर्तनों का कारोबार हुआ है। इसी तरह कपड़ा बाजार में भी ग्राहकों ने त्योहार के लिए नए कपड़े, साड़ियां और पारंपरिक परिधान खरीदे।
वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य पूजन सामग्रियों की भारी बिक्री
ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम्स पर भी धनतेरस के मौके पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ी। दोपहिया वाहनों, जैसे बाइक और स्कूटी के शोरूम पर लोग सुबह से ही शुभ मुहूर्त में वाहनों की डिलीवरी लेने पहुंचे। कई ग्राहकों ने पहले से की गई बुकिंग के आधार पर नए वाहन प्राप्त किए। इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों पर एलईडी टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, मिक्सर, जूसर, ग्राइंडर और माइक्रोवेव जैसे उपकरणों की भी अच्छी बिक्री हुई। बाजारों में मिठाइयों, सूखे मेवों, मिट्टी के दीयों, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और रंग-बिरंगी सजावटी झालरों की दुकानों पर भी देर रात तक व्यापार चलता रहा।



















