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धौलपुर में संदीप की हींग कचौड़ी की भारी मांग, स्वाद चखने आगरा और ग्वालियर से आते हैं लोगराजस्थान
3 सित॰ 2026, 11:38 am (1 दिन पहले)· 2

धौलपुर में संदीप की हींग कचौड़ी की भारी मांग, स्वाद चखने आगरा और ग्वालियर से आते हैं लोग

धौलपुर में आरएसी बटालियन के पास लगने वाले बृजवासी कचौड़ी के ठेले पर रोज 800 कचौड़ियां बिकती हैं। मात्र 20 रुपये में मिलने वाली यह देसी घी कचौड़ी दूर-दराज के शहरों से ग्राहकों को खींच लाती है।

धौलपुर शहर में सुबह की शुरुआत स्वादिष्ट नाश्ते के साथ करने वालों के लिए एक खास ठिकाना बना हुआ है। आरएसी बटालियन के ठीक सामने सजने वाले बृजवासी कचौड़ी के ठेले पर भोर होते ही लोगों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। शुद्ध देसी घी की सोंधी खुशबू और हींग के तीखे स्वाद से भरपूर खस्ता कचौड़ियों का लुत्फ उठाने के लिए स्थानीय निवासी ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के यात्री भी खिंचे चले आते हैं। पिछले 5 वर्षों से लगातार इस ठेले का संचालन कर रहे संदीप की मेहनत का ही नतीजा है कि आज यह जगह शहर के सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड केंद्रों में शुमार हो चुकी है।

अनोखा परोसने का तरीका और जायकेदार मसाले

बृजवासी कचौड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका विशेष सर्विंग स्टाइल है। आमतौर पर दुकानों पर साबुत कचौड़ी दी जाती है, लेकिन संदीप कचौड़ी को प्लेट में रखने से पहले हाथों से छोटे-छोटे टुकड़ों में अच्छी तरह मसलते हैं। इसके बाद इसे पारंपरिक दोने में रखकर ऊपर से मसालेदार आलू की सब्जी डाली जाती है। कचौड़ी को पूरी तरह से देसी घी में ही तला जाता है, जिससे इसका खस्तापन और स्वाद अनोखा हो जाता है।

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इसके साथ मिलने वाली आलू की सब्जी भी बेहद खास होती है। इसे तैयार करने के लिए संदीप किसी रेडीमेड मसाले के बजाय अपने घर पर पिसे हुए ताजा मसालों का प्रयोग करते हैं। सब्जी में हींग का गाढ़ा पानी मिलाया जाता है, जो पाचन के लिहाज से भी बढ़िया रहता है और कचौड़ी के जायके को दोगुना कर देता है। इसके अलावा स्वाद को और बढ़ाने के लिए दोने में देसी घी में ही तली हुई हरी मिर्च भी साथ दी जाती है।

सस्ता नाश्ता और रोजाना 800 कचौड़ियों की बिक्री

महंगाई के इस दौर में स्वाद के साथ-साथ जेब का ध्यान रखना भी इस ठेले की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह है। यहाँ मात्र 20 रुपये में 2 भरपेट कचौड़ियां आलू की सब्जी और हरी मिर्च के साथ परोसी जाती हैं। किफायती दाम और बेहतरीन गुणवत्ता का असर यह है कि संदीप रोजाना 700 से 800 कचौड़ियां आसानी से बेच लेते हैं। सुबह से दोपहर तक ग्राहकों का आना लगातार जारी रहता है।

यदि आप भी इस लजीज कचौड़ी का स्वाद चखना चाहते हैं, तो आपको अपने समय का विशेष ध्यान रखना होगा। संदीप का यह ठेला सुबह 6:00 बजे लगता है और दोपहर 12:00 बजे बंद हो जाता है। महज 6 घंटे के इस सीमित समय में ही पूरे दिन का स्टॉक खत्म हो जाता है। इसलिए दोपहर होने से पहले ही यहाँ पहुँचना जरूरी होता है।

आगरा, मुरैना और ग्वालियर तक फैला कचौड़ी का क्रेज

संदीप की कचौड़ी की शोहरत अब सिर्फ धौलपुर शहर तक सीमित नहीं रही है। धौलपुर के आसपास के ग्रामीण इलाकों के अलावा पडोसी राज्यों और जिलों से आने वाले लोग भी इस स्वाद के कायल हैं। आगरा, मुरैना और ग्वालियर जाने-आने वाले यात्री विशेष रूप से आरएसी बटालियन के पास रुककर कचौड़ी का नाश्ता करते हैं।

कई ग्राहक तो ऐसे हैं जो यहाँ नाश्ता करने के साथ-साथ अपने परिवार और दोस्तों के लिए भी कचौड़ियां पैक कराकर ले जाते हैं। दूर-दूर से आने वाले ग्राहकों की यह भीड़ साबित करती है कि अगर भोजन में शुद्धता और स्वाद हो, तो लोग खुद-ब-खुद खिंचे चले आते हैं।

सवाल-जवाब

बृजवासी कचौड़ी का ठेला धौलपुर में कहां लगता है?
यह ठेला धौलपुर में आरएसी बटालियन के सामने स्थित सड़क पर लगता है।
संदीप की कचौड़ी की दुकान खुलने का समय क्या है?
यह ठेला सुबह 6:00 बजे खुलता है और दोपहर 12:00 बजे तक ही संचालित होता है।
बृजवासी कचौड़ी में 2 कचौड़ी की कीमत कितनी है?
यहां 2 खस्ता कचौड़ी और आलू की सब्जी का दोना मात्र 20 रुपये में मिलता है।
रोजाना संदीप कितनी कचौड़ियां बेच लेते हैं?
संदीप हर दिन लगभग 700 से 800 कचौड़ियां बेच देते हैं।
कचौड़ी तलने के लिए किस घी का उपयोग किया जाता है?
बृजवासी कचौड़ी को तलने के लिए शुद्ध देसी घी का उपयोग किया जाता है।
कचौड़ी के साथ क्या-क्या परोसा जाता है?
कचौड़ी के साथ घर के पिसे मसालों और हींग के पानी से बनी आलू की सब्जी और घी में तली हरी मिर्च दी जाती है।
क्या दूसरे शहरों से भी लोग यह कचौड़ी खाने आते हैं?
हां, धौलपुर के अलावा आगरा, मुरैना और ग्वालियर से आने वाले लोग भी यहां कचौड़ी खाते हैं और पार्सल ले जाते हैं।
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