झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में खानपान के शौकीनों के लिए हमेशा कुछ न कुछ नया और अनोखा देखने को मिलता रहता है। शहर की विभिन्न गलियों और बाजारों में घूमते हुए लोगों को रोज नए-नए स्वाद और अनूठे व्यंजन आकर्षित करते हैं। इसी कड़ी में इन दिनों जमशेदपुर के खानपान परिदृश्य में एक विशेष स्ट्रीट फूड स्टॉल काफी चर्चा बटोर रहा है। इस स्टॉल का नाम 'सत्तू और सांभर' रखा गया है। पहली बार सुनने में यह नाम किसी को भी थोड़ा अजीब या अलग लग सकता है, लेकिन जब दोनों राज्यों के व्यंजनों की जुगलबंदी एक ही थाली में परोसी जाती है, तो इसका स्वाद स्थानीय लोगों को खूब भा रहा है।
उत्तर और दक्षिण भारतीय व्यंजनों का अनूठा संगम
इस अभिनव स्टॉल का संचालन कन्हैया नामक व्यक्ति कर रहे हैं, जो खानपान के व्यवसाय से काफी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। कन्हैया बताते हैं कि जमशेदपुर में विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं और यहां के लोग हमेशा नए और पारंपरिक स्वादों की तलाश में रहते हैं। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उत्तर भारत और दक्षिण भारत के दो सबसे लोकप्रिय व्यंजनों को एक साथ पेश करने का निर्णय लिया। उनका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को एक ही स्थान पर बिहार व उत्तर प्रदेश के देसी सत्तू का स्वाद देना और साथ ही दक्षिण भारत के मशहूर सांभर की ताजगी व मसालेदार जायके का आनंद प्रदान करना था। यही वजह है कि जो लोग पहली बार केवल उत्सुकतावश यहां आते हैं, वे भी इस जायके के मुरीद होकर बार-बार लौटने लगते हैं।
सुबह 6 बजे से सजती है हावड़ा ब्रिज के पास दुकान
हर दिन तड़के सुबह से ही इस स्टॉल पर स्वाद के शौकीनों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। कन्हैया प्रतिदिन सुबह लगभग 6 बजे जमशेदपुर के ऐतिहासिक हावड़ा ब्रिज के समीप अपना स्टॉल लगाकर तैयार हो जाते हैं। सुबह के समय काम पर निकलने वाले नौकरीपेशा लोग, आसपास के दुकानदार, सुबह की सैर करने वाले नागरिक और नाश्ते की तलाश में निकले भोजन प्रेमी सबसे पहले इसी स्टॉल का रुख करते हैं। सुबह-सुबह गरमागरम नाश्ता उपलब्ध कराने के कारण यह छोटा सा स्टॉल बहुत तेजी से क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है।
एक ही जगह पर अलग-अलग राज्यों के व्यंजनों का स्वाद
यदि इस स्टॉल के मेन्यू की बात करें, तो यहां विविधता का बेहतरीन उदाहरण देखने को मिलता है। एक तरफ जहां दक्षिण भारतीय श्रेणी में हल्की इडली, कुरकुरा डोसा, गरमागरम सांभर और नारियल व मिर्च की चटाकेदार चटनी मिलती है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर भारतीय जायके के रूप में सत्तू से भरी कचौड़ी, गरमागरम पूरी, छोला-भटूरा और काबुली चना का नाश्ता भी परोसा जाता है। ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार किसी भी व्यंजन का चुनाव कर सकते हैं या फिर दोनों शैलियों के व्यंजनों को मिलाकर एक अनूठी थाली तैयार करवा सकते हैं। एक ही टेबल पर विभिन्न राज्यों के पारंपरिक खानपान का यह मेल ही इस स्टॉल को शहर के अन्य नाश्ते के ठिकानों से अलग बनाता है।
जमशेदपुर में स्ट्रीट फूड का नया आकर्षण
कन्हैया के अनुसार, खानपान के क्षेत्र में काम करने के लंबे अनुभव ने उन्हें सिखाया है कि लोग जाने-पहचाने स्वाद में थोड़ा नयापन हमेशा पसंद करते हैं। इसी व्यावहारिक अनुभव के आधार पर उन्होंने मेन्यू में ऐसे पकवान जोड़े जो लोगों को घरेलूपन का अहसास भी कराएं और एक नया स्वाद अनुभव भी दें। सत्तू से तैयार व्यंजन जहां उत्तर भारतीय प्रवासियों को अपने गांव-घर के स्वाद की याद दिलाते हैं, वहीं सांभर और इडली दक्षिण भारतीय परंपरा का बेहतरीन प्रतिनिधित्व करते हैं। जमशेदपुर में स्ट्रीट फूड का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है, और ऐसे में हावड़ा ब्रिज के पास स्थित 'सत्तू और सांभर' का यह ठिकाना लोगों के लिए सुबह के नाश्ते का एक पसंदीदा केंद्र बन गया है।





















