संतान की दीर्घायु का पावन पर्व अहोई अष्टमी 1 नवंबर को, जानें पूजा मुहूर्त और तारों को अर्घ्य का सही समयपंचकूला में स्पेशल बच्ची पर सहपाठी का बर्बर हमला, बाल मनोवैज्ञानिकों ने बताए बच्चों में हिंसक व्यवहार के मुख्य कारणबिना डेटा वाले 4 सस्ते कॉलिंग पैक लेकर आई वोडा-आइडिया, 179 रुपये से शुरुआतदक्षिण पश्चिम रेलवे ने तय किया बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत स्लीपर का समय, नवंबर से छह दिन चलेगी ट्रेनउत्तरी कॉरिडोर को केंद्र की हरी झंडी, दिल्ली और काशी के बीच बुलेट ट्रेन से सफर सिमटेगाअलवर में त्योहार से पहले दुकानें हटाने पर भड़के मिट्टी के दीपक और पूजन सामग्री बेचने वालेराजस्थान में शारीरिक शिक्षक मंदोदरी चौधरी को मिली पुरुष के रूप में पहचान, अब सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हुआ रुद्र जाटजमशेदपुर में चक्रवाती तूफान ने बढ़ाई कुम्हारों की मुश्किलें, दीयों को सुखाना बना बड़ी चुनौतीबाघ और भेड़ियों के बच्चों का वह अनोखा खेल, जिसने रखी हरियाणा में अग्रोहा धाम की ऐतिहासिक नींवमासिक धर्म में थक्के निकलने का क्या है विज्ञान, कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी
दीपावली पर मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग, कुम्हारों के चेहरों पर लौटी मुस्कानराजस्थान
31 अक्तू॰ 2026, 1:40 pm (1 मिनट पहले)· 0

दीपावली पर मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग, कुम्हारों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

बीकानेर में दीपावली से पहले पारंपरिक मिट्टी के दीयों की भारी मांग देखने को मिल रही है, जिससे स्थानीय कुम्हारों में अच्छी कमाई की उम्मीद जगी है।

दीपावली का पावन पर्व जैसे-जैसे करीब आ रहा है, बीकानेर के बाजारों और कुम्हारों की बस्तियों में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है। मिट्टी को चाक पर आकार देकर सुंदर दीये गढ़ने वाले कारीगर दिन-रात मेहनत में जुटे हैं। इस बार बाजारों में ग्राहकों का रुझान मिट्टी के दीयों की तरफ तेजी से बढ़ा है, जिससे कारीगरों को बेहतर आमदनी और एक खुशहाल त्योहार की पक्की उम्मीद बंधी है।

सजावटी रोशनी के दौर में भी कायम है मिट्टी के दीयों का महत्व

घरों को रोशन करने के लिए भले ही आज बाजार में इलेक्ट्रॉनिक लड़ियां और आधुनिक सजावटी बल्बों की भरमार हो, लेकिन सदियों पुरानी मिट्टी के दीयों की परंपरा आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है। दीपावली के मौके पर पूजा घर, मुख्य द्वार, घर के आंगन और छत पर तेल के दीये जलाने की प्रथा को लोग पूरी आस्था के साथ निभाते हैं। यही अटूट श्रद्धा है जिसके चलते त्योहार से काफी पहले ही बाजारों में मिट्टी के दीयों की मांग में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

इलेक्ट्रॉनिक लड़ियों से पारंपरिक दीयों की ओर मुड़े खरीदार

हाल के समय में लोगों के त्योहार मनाने के तौर-तरीकों में एक सुखद बदलाव देखा जा रहा है। चीनी रोशनी और बिजली के उपकरणों की चकाचौंध से आगे निकलकर लोग अब अपनी जड़ों की ओर लौटने लगे हैं। स्थानीय खरीदारों का साफ मानना है कि दीपावली की असली रौनक और आत्मा मिट्टी के दीयों को प्रज्वलित करने में ही बसती है। इसके अलावा, लोग स्थानीय दस्तकारों और कुम्हारों से खरीदारी करने को तरजीह दे रहे हैं, ताकि त्योहार की खुशियां और कमाई उन गरीब परिवारों की चौखट तक भी सीधे पहुंच सकें।

आकर्षक डिजाइन और नए रंगों में तैयार हो रहे दीये

बदलते जमाने की पसंद को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के दीयों में भी कारीगरों ने नए प्रयोग किए हैं। साधारण दीयों के साथ-साथ अब विभिन्न आकारों, मनमोहक डिजाइनों और चटख रंगों से सजे डिजाइनर दीये भी बाजार में उपलब्ध हैं। घर को नए अंदाज में सजाने के लिए युवा वर्ग और महिलाएं इन नए रूप-रंग वाले दीयों को खास तौर पर पसंद कर रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के इस दौर में भी स्थानीय हाट-बाजारों में इन दीयों की खरीदारी के लिए अच्छी-खासी भीड़ उमड़ रही है। कुम्हारों के अनुसार पूरे साल में दीपावली का सीजन ही उनके रोजगार का सबसे मुख्य आधार होता है, जिसकी तैयारी वे हफ्तों पहले से शुरू कर देते हैं। इस बार की बढ़ती मांग ने उनके चेहरों पर संतोष और खुशहाली बिखेर दी है।

सवाल-जवाब

बीकानेर में दीपावली से पहले किस वस्तु की मांग तेजी से बढ़ी है?
बीकानेर के बाजारों में इस समय मिट्टी के पारंपरिक और डिजाइनर दीयों की मांग में भारी उछाल देखा जा रहा है।
लोग आधुनिक रोशनी के बजाय मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता क्यों दे रहे हैं?
लोग त्योहार की सदियों पुरानी परंपरा को निभाने और स्थानीय कुम्हारों के रोजगार को आर्थिक सहारा देने के लिए मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं।
बाजार में सामान्य दीयों के अलावा और किस तरह के दीये बिक रहे हैं?
बाजार में अलग-अलग आकारों, आकर्षक डिजाइनों और सुंदर रंगों से सजे डिजाइनर मिट्टी के दीये भी खूब बिक रहे हैं।
इस मांग से स्थानीय कुम्हारों को क्या लाभ होगा?
बिक्री बढ़ने से कुम्हारों को अच्छी आमदनी मिलेगी और उनके परिवारों के लिए दीपावली का त्योहार अधिक खुशहाल बनेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp