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अलवर में त्योहार से पहले दुकानें हटाने पर भड़के मिट्टी के दीपक और पूजन सामग्री बेचने वालेराजस्थान
31 अक्तू॰ 2026, 1:26 pm (7 मिनट पहले)· 0

अलवर में त्योहार से पहले दुकानें हटाने पर भड़के मिट्टी के दीपक और पूजन सामग्री बेचने वाले

दीपावली से पहले अलवर नगर निगम द्वारा पारंपरिक जगहों से दुकानें हटाने के विरोध में छोटे व्यापारियों और महिलाओं ने नगर निगम दफ्तर पर प्रदर्शन कर जाम लगाया।

दीपावली के बड़े पर्व की तैयारियों के बीच अलवर शहर के बाजारों में अस्थाई दुकानें लगाने को लेकर नगर निगम प्रशासन और छोटे व्यापारियों के बीच विवाद काफी बढ़ गया है। पीढ़ियों और वर्षों से स्थानीय बाजारों में मिट्टी के बर्तन, दीये, फूल-मालाएं तथा अन्य जरूरी पूजन सामग्री बेचकर अपने परिवारों का गुजर-बसर करने वाले छोटे दुकानदारों ने नगर निगम द्वारा की जा रही विस्थापन की कार्रवाई के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिला और पुरुष दुकानदार नगर निगम दफ्तर के बाहर जमा हुए, जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए सड़क पर जाम लगा दिया और प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का सीधा कहना है कि वे सालों से तय अपनी पुरानी जगहों पर ही व्यवसाय करेंगे और किसी भी हाल में नई जगह जाने को राजी नहीं हैं।

पारंपरिक ठिकानों से कंपनी बाग रोड भेजे जाने का कड़ा विरोध

विरोध प्रदर्शन में शामिल पूनम नाम की एक महिला और अन्य महिला दुकानदारों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे लंबे अर्से से होप सर्कस, घंटाघर और बाजार के अन्य केंद्रीय स्थानों पर अपनी अस्थाई दुकानें सजाती आई हैं। उनके परिवार के कई सदस्य भी वर्षों से इन्हीं प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर पर्व के दौरान कारोबार करते रहे हैं। इन बाजारों में शहर भर से खरीदारों की निरंतर चहल-पहल रहती है, जिससे त्योहारी सीजन में उनकी सालभर की बुनियादी कमाई निकलती है। व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम प्रशासन इस बार उन्हें इन पारंपरिक और स्थापित ठिकानों से बेदखल कर कंपनी बाग रोड पर तैयार किए गए स्टालों पर जाने के लिए मजबूर कर रहा है। अचानक ठिकाना बदलने से उनका व्यापार पूरी तरह ठप होने का डर बना हुआ है, क्योंकि नई जगह पर खरीदारों के पहुंचने को लेकर भारी अनिश्चितता है।

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मारपीट और सामान को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कार्रवाई के दौरान एक महिला होमगार्ड पर दुकानदारों के साथ मारपीट करने और उनकी पूजन सामग्री व मिट्टी के बर्तन तोड़ने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। महिलाओं का कहना था कि उन्होंने त्योहार की बिक्री के लिए पहले ही काफी पूंजी लगाकर माल खरीद लिया था और अपनी दुकानें लगाने की तैयारी में जुटी थीं। ऐसे नाजुक समय में प्रशासन द्वारा उन्हें जबरन हटाने और कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने से उनकी आजीविका पर संकट और गहरा गया है। व्यापारियों ने नगर निगम पर एकतरफा मनमानी का आरोप लगाते हुए दोहराया कि ग्राहक उन्हें घंटाघर और होप सर्कस जैसे मुख्य बाजारों में ही ढूंढते हैं, इसलिए वे कंपनी बाग रोड पर कतई नहीं जाएंगे।

जाम से यातायात प्रभावित, पुरानी जगह बहाली की मांग

नगर निगम कार्यालय के बाहर हुए इस उग्र प्रदर्शन और सड़क पर लगाए गए जाम के कारण आसपास के मार्गों पर कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही बाधित रही, जिससे राहगीरों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी दुकानदारों ने अंत तक अपनी मांग पर अड़े रहते हुए कहा कि प्रशासन उनकी रोजी-रोटी और परिवारों के आर्थिक संकट को समझे। उन्होंने निगम अधिकारियों से स्पष्ट मांग की है कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार को देखते हुए उन्हें होप सर्कस और घंटाघर जैसे उनके पारंपरिक स्थानों पर ही पूर्ववत दुकानें लगाने की अनुमति तुरंत दी जाए।

सवाल-जवाब

अलवर में छोटे दुकानदार किस बात को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?
नगर निगम द्वारा दीपावली से पहले होप सर्कस और घंटाघर जैसे पारंपरिक स्थानों से दुकानें हटाकर कंपनी बाग रोड भेजने के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा है।
प्रदर्शन में शामिल दुकानदारों द्वारा मुख्य रूप से क्या सामान बेचा जाता है?
ये दुकानदार मुख्य रूप से मिट्टी के बर्तन, दीये, फूल-मालाएं और अन्य त्योहारी पूजन सामग्री बेचते हैं।
दुकानदारों ने नगर निगम की नई जगह पर जाने से क्यों इनकार किया?
दुकानदारों का कहना है कि कंपनी बाग रोड पर ग्राहकों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता है, जिससे त्योहार के समय उनके कारोबार पर भारी आर्थिक संकट आ सकता है।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने प्रशासन पर क्या गंभीर आरोप लगाए?
महिलाओं ने एक महिला होमगार्ड पर उनके साथ मारपीट करने और बिक्री के लिए रखी गई पूजन सामग्री व सामान तोड़ने के आरोप लगाए हैं।
दुकानदारों की नगर निगम प्रशासन से क्या मांग है?
दुकानदारों की मांग है कि उनकी आजीविका को देखते हुए उन्हें होप सर्कस और घंटाघर जैसी उनकी पुरानी जगहों पर ही दुकानें लगाने की अनुमति दी जाए।
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