दीपावली के त्योहारी सीजन में राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों को भीषण जाम से बचाने के लिए यातायात पुलिस ने व्यापक ट्रैफिक प्रबंधन योजना लागू की है। त्योहारी भीड़ और अनियंत्रित वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से शहर की अंदरूनी सीमा में भारी और स्लीपर बसों के आवागमन पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है। यह व्यवस्था 3 नवंबर से शुरू होकर 9 नवंबर तक प्रभावी रहेगी, जिससे परकोटा और मुख्य बाजार क्षेत्रों में खरीदारी के लिए निकलने वाले स्थानीय नागरिकों तथा आगंतुकों को जाम से राहत मिल सके।
शहर के बाहरी छोरों पर 20 किलोमीटर दूर बने चार नए ठिकाने
शहरी सीमा में स्लीपर और निजी बसों का प्रवेश रुकने के बाद प्रशासन ने शहर के चारों कोनों पर लगभग 20 किलोमीटर की परिधि में अस्थायी बस संचालन केंद्र तय किए हैं। अलग-अलग राजमार्गों की ओर जाने वाले यात्रियों को अब शहर के इन बाहरी बिंदुओं से बसें पकड़नी होंगी
- दिल्ली और आगरा मार्ग: इस दिशा में यात्रा करने वाली तमाम बसों का संचालन ट्रांसपोर्ट नगर स्थित बजरी मंडी बस स्टैंड सर्किल के पास से किया जा रहा है।
- अजमेर मार्ग: अजमेर रोड की ओर प्रस्थान करने वाली समस्त निजी और स्लीपर बसों का ठहराव भांकरोटा क्षेत्र के हीरापुरा बस स्टैंड पर तय किया गया है।
- टोंक मार्ग: टोंक रोड की ओर जाने वाले मुसाफिरों के लिए बसों की रवानगी पुरानी बाईपास बी-2 बाईपास क्लोवरलीफ के नीचे से सुनिश्चित की गई है।
- सीकर और झुंझुनूं मार्ग: शेखावाटी अंचल की तरफ जाने वाली बसों का नया संचालन केंद्र विद्याधर नगर स्टेडियम के समीप बनाया गया है।
मुसाफिरों पर तिहरी मार, 500 रुपये तक बढ़ा लोकल ट्रांसपोर्ट का खर्च
त्योहार पर अपने गृह नगर लौटने वाले आम यात्रियों के लिए यह नई यातायात व्यवस्था गंभीर आर्थिक परेशानी का सबब बन गई है। मानसरोवर, सांगानेर, प्रताप नगर, जवाहर नगर और पुराने परकोटे के रिहायशी इलाकों में रहने वाले परिवारों को इन सुदूर ठिकानों तक पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। शहर में बाहरी बस स्टैंड्स को जोड़ने वाली पर्याप्त फीडर बसों और सार्वजनिक लोकल परिवहन के अभाव के चलते लोगों को निजी ऑटो और ऑनलाइन ऐप कैब का सहारा लेना पड़ रहा है। दूरी अधिक होने के कारण कैब और ऑटो चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट नगर या हीरापुरा पहुंचने के लिए यात्रियों को अपनी जेब से 400 से 500 रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।
मूल बस टिकट से महंगा साबित हो रहा बस स्टैंड तक का सफर
इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद एक विरोधाभासी स्थिति पैदा हो गई है, जहां कई रूटों पर गंतव्य तक जाने वाली मुख्य बस के टिकट से ज्यादा पैसा यात्रियों का शहर के भीतर बस स्टैंड तक पहुंचने में खर्च हो रहा है। सीकर के लिए सामान्य बस किराया महज 141 रुपये, बूंदी के लिए 249 रुपये और कोटा के लिए राजस्थान रोडवेज का किराया 260 रुपये है। दिल्ली मार्ग पर सामान्य बस टिकट करीब 380 रुपये से शुरू होता है, जबकि एसी स्लीपर बसों का टिकट 800 रुपये से अधिक रहता है। ऐसे में 141 से 260 रुपये के टिकट वाले यात्रियों को 20 किलोमीटर दूर स्थित स्टैंड तक पहुंचने के लिए ही 500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे दीपोत्सव के पावन अवसर पर घर जा रहे मध्यमवर्गीय परिवारों का यात्रा बजट पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।


















