राजस्थान भर में शादियों और बड़े सामाजिक आयोजनों का दौर शुरू होने के साथ ही खानपान की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग सक्रिय हो गया है। कोटा सहित पूरे राज्य में भोजन की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वाले कैटरर्स पर नकेल कसने के लिए कड़े प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार द्वारा जुलाई माह में जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन अब देवउठनी एकादशी से आरंभ होने वाले वैवाहिक सीजन में कराया जाएगा। इस विशेष अभियान का बुनियादी मकसद बड़े आयोजनों में मिलावटी खाद्य सामग्रियों की खपत पर रोक लगाना और आम लोगों की सेहत को गंभीर खतरों से बचाना है।
बिना वैध लाइसेंस काम करने वालों पर दर्ज होगा सीधा केस
कोटा के खाद्य सुरक्षा अधिकारी मोजीलाल कुम्भाकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी कैटरर को बिना वैध लाइसेंस के संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। शादियों और बड़े सामूहिक सम्मेलनों का काम मिलने के बाद कई संचालक घटिया अथवा मिलावटी खाद्य सामग्री का उपयोग कर लोगों के स्वास्थ्य को दांव पर लगाते हैं। विभागीय टीमों द्वारा की जाने वाली सैंपलिंग के दौरान अगर कोई कैटरर बिना लाइसेंस काम करता पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ सीधा मुकदमा दर्ज कर चालान काटा जाएगा। शुरुआत में कैटरर्स को नियमानुसार दस्तावेज दुरुस्त करने की समझाइश दी जाएगी, लेकिन नियमों का उल्लंघन जारी रखने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
500 और 1,000 से अधिक लोगों की दावत पर पूर्व सूचना का नियम
नए प्रशासनिक आदेश के तहत जिन भी आयोजनों में 500 या 1,000 से ज्यादा लोगों के शामिल होने का अनुमान है, उनकी विस्तृत जानकारी पहले से ही संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी को देनी होगी। आयोजकों और कैटरिंग संचालकों को कार्यक्रम स्थल का पूरा विवरण भी विभाग के पास जमा कराना अनिवार्य किया गया है। सूचना दर्ज होते ही विभाग का विशेष जांच दस्ता मौके पर पहुंचेगा। यह टीम कार्यक्रम स्थल पर तैयार हो रहे भोजन के नमूने एकत्र करेगी और इसके साथ ही रसोई में साफ-सफाई तथा हाइजीन के पूरे प्रबंधों की बारीकी से पड़ताल करेगी।
सड़ी सब्जियां और मिलावटी मावा मौके पर ही नष्ट करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान यदि किसी भी रसोई या आयोजन स्थल पर खराब या सड़ी-गली सब्जियां, नकली मावा अथवा अन्य मिलावटी खाद्य सामग्री पाई जाती है, तो विभागीय जांच दल तुरंत प्रभाव से उसके नमूने सील करेगा। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी घटिया और मिलावटी सामग्री को उसी समय मौके पर नष्ट करवा दिया जाएगा। इस कड़े कदम से उन कारोबारियों में हड़कंप मचना तय है जो भारी मुनाफे के चक्कर में लोगों की जान जोखिम में डालते हैं।
फूड पॉइजनिंग की रोकथाम और ब्रांडेड सामग्रियों के उपयोग पर जोर
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस सख्त पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य बड़े सामूहिक भोज के दौरान सामने आने वाली फूड पॉइजनिंग की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करना है। अनिवार्य लाइसेंस प्रक्रिया और अचानक होने वाले औचक निरीक्षण के डर से कैटरिंग कारोबारी अब केवल गुणवत्तापूर्ण और ब्रांडेड सामग्रियों का उपयोग करने के लिए बाध्य होंगे। इस व्यवस्था से न केवल खानपान की स्वच्छता का स्तर ऊपर उठेगा, बल्कि बिना पंजीकरण और लाइसेंस के अवैध रूप से काम कर रहे संचालक भी कानूनी दायरे में आकर लाइसेंस लेने को मजबूर होंगे।



















