राजस्थान के डूंगरपुर जिले में जाली मुद्रा तैयार करने और उसे खपाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। लोकप्रिय वेब सीरीज 'फर्जी' की कहानी से प्रेरित होकर कुछ नौजवानों ने तकनीक का सहारा लिया और देखते ही देखते कई राज्यों में फैला नकली नोटों का धंधा शुरू कर दिया। डूंगरपुर पुलिस ने इस संगठित सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए 'ऑपरेशन नोटफ्लिक्स' नाम से विशेष अभियान चलाया, जिसके तहत गिरोह के मुख्य सरगना सहित छह लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस गिरोह की सक्रियता राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ तक फैली हुई थी।
माडा स्कूल मैदान से पकड़े गए पहले दो आरोपी
इस पूरे गिरोह की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब 29 सितंबर को डूंगरपुर के माडा स्कूल ग्राउंड में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर पुलिस ने जाल बिछाया। पुलिस टीम ने मौके से डूंगरपुर निवासी 23 वर्षीय भावेश खटीक और 19 वर्षीय नयन जोशी को रंगे हाथ धर दबोचा। तलाशी के दौरान दोनों के कब्जे से 4 लाख 95 हजार 500 रुपये मूल्य की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की गई। दोनों आरोपियों से जब पुलिस हिरासत में कड़ी पूछताछ की गई, तो पता चला कि यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार देश के कई अन्य राज्यों से जुड़े हुए हैं। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने तकनीकी कड़ियां जोड़ते हुए गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश तेज कर दी।
वेब सीरीज, यूट्यूब और फोटोशॉप से सीखी जालसाजी
पुलिस अनुसंधान में सामने आया कि जाली नोट तैयार करने के लिए डिजिटल फाइलों और खास किस्म के कागजों का प्रबंध किया जाता था। इस पूरे काम में आधुनिक ऑनलाइन माध्यमों का भरपूर उपयोग किया जा रहा था। हरियाणा के अंबाला कैंट निवासी 20 वर्षीय आनंद राजपूत की जांच में मुख्य भूमिका पाई गई। आनंद ने ही ओटीटी प्लेटफॉर्म की वेब सीरीज 'फर्जी' देखने के बाद नकली नोट छापने की योजना बनाई थी। उसने नोटों की डिजाइनिंग और नकल तैयार करने के लिए फोटोशॉप सॉफ्टवेयर तथा यूट्यूब वीडियोज का सहारा लिया। तकनीकी हुनर सीखकर उसने असली नोट जैसी बनावट तैयार करने की कोशिश की।
टेलीग्राम चैनल से कागज और दुर्ग से मिली डिजिटल फाइल
नकली नोटों को असली जैसा रूप देने के लिए गिरोह ने कच्चे माल की आपूर्ति भी डिजिटल माध्यमों से जुटाई। जांच के अनुसार उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी मोहम्मद आरिफ ने टेलीग्राम पर 'अंकित पेपर सेलर' नाम से चैनल बना रखा था, जिसके जरिए वह खास तरह का कागज उपलब्ध कराता था। पुलिस ने दबिश देकर मोहम्मद आरिफ को कानपुर से गिरफ्तार कर लिया। वहीं पांच सौ रुपये के नोट की उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल फाइल छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी 27 वर्षीय तरुण मालेकर द्वारा उपलब्ध कराई जा रही थी, जिसे पुलिस टीम ने दुर्ग से हिरासत में ले लिया। इस प्रकार इस गिरोह ने हर काम को अलग-अलग राज्यों में बैठे सदस्यों के बीच बांट रखा था।
1300 किलोमीटर पीछा कर लुधियाना स्टेशन पर पकड़ा गया सरगना
जैसे ही डूंगरपुर में शुरुआती गिरफ्तारियां हुईं, गिरोह के मुख्य सूत्रधार रवि कुमार मिश्रा को पुलिस कार्रवाई की भनक लग गई। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का रहने वाला 25 वर्षीय रवि कुमार मिश्रा तुरंत भूमिगत हो गया और लगातार अपने छिपने के ठिकाने और मोबाइल नंबर बदलने लगा। इसके बाद डूंगरपुर पुलिस की विशेष टीम और साइबर सेल ने तकनीकी निगरानी का सहारा लिया। पुलिस टीम ने करीब 1300 किलोमीटर तक लगातार पीछा करते हुए रवि कुमार मिश्रा को पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
एसपी ने पुलिस टीमों को पुरस्कृत करने का किया ऐलान
डूंगरपुर के पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस अंतरराज्यीय गिरोह को बेनकाब करने वाली साइबर सेल, विशेष दल और संबंधित थानों की पुलिस टीमों की कार्यशैली की एसपी मनीष कुमार ने सराहना की है। उन्होंने इस सफल कार्रवाई में शामिल पुलिस कर्मियों को पुरस्कृत करने की भी घोषणा की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में अनुसंधान अभी जारी है। जांच दल अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस सिंडिकेट ने अब तक कुल कितनी जाली मुद्रा बाजार में उतारी है, नोटों की आपूर्ति किन-किन शहरों में की गई और गिरोह से कौन से अन्य लोग जुड़े हुए हैं।



















