राजस्थान की राजधानी जयपुर में साइबर धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां ठगों ने एक बुजुर्ग दंपती को लगभग बीस दिनों तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखकर दो करोड़ रुपए की भारी-भरकम रकम ठग ली। इस सनसनीखेज वारदात के मुख्य आरोपी ललित विश्वास को पुलिस ने पश्चिम बंगाल से धर दबोचा है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में सक्रियता और बढ़ गई है क्योंकि इस तरह के अपराधों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है।
फर्जी अधिकारी बनकर बनाया दबाव
साइबर अपराधियों ने बेहद शातिर तरीके से इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। आरोपियों ने फोन और वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग दंपती से संपर्क साधा और खुद को पुलिस, आतंकवाद रोधी दस्ते यानी एटीएस, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण यानी एनआईए और भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई का बड़ा अधिकारी बताया। ठगों ने दंपती पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे आतंकी गतिविधियों की फंडिंग में लिप्त हैं और जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। इस झूठे और डरावने आरोप ने बुजुर्ग दंपती को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया और वे अपराधियों के झांसे में आ गए।
बीस दिनों तक रखा निगरानी में
दंपती को इस बात का जरा भी अहसास नहीं हुआ कि वे किसी साजिश का शिकार हो रहे हैं। आरोपियों ने उन्हें लगातार बीस दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर निगरानी में रखा। इस दौरान दंपती को किसी से भी संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें लगातार इस बात का भय दिखाया गया कि यदि उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी निरंतर मानसिक दबाव और खौफ के माहौल का फायदा उठाकर ठगों ने अलग-अलग माध्यमों से उनके खातों से दो करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थी। इस प्रकरण की जानकारी देते हुए डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों और पुख्ता सुरागों के आधार पर पश्चिम बंगाल में दबिश देकर मुख्य आरोपी ललित विश्वास को गिरफ्तार किया गया है। इस हाई-प्रोफाइल ठगी के मामले में अब तक कुल तीन आरोपियों को कानून के शिकंजे में लिया जा चुका है। पुलिस अब गिरफ्तार किए गए आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस संगठित साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी गई रकम के ठिकाने का पता लगाया जा सके।
डिजिटल अरेस्ट से जुड़े खतरे और बचाव
डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का एक ऐसा खतरनाक तरीका बन गया है जिसमें ठग कानून का खौफ दिखाकर लोगों को अपने घरों के भीतर ही वर्चुअल रूप से कैद कर लेते हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीड़ित पर चौबीस घंटे नजर रखते हैं और किसी भी बाहरी व्यक्ति से बात करने पर रोक लगा देते हैं। जांच या बैंक खातों के सत्यापन के नाम पर करोड़ों रुपए हड़प लिए जाते हैं। इस तरह के मामलों को लेकर पुलिस लगातार लोगों को जागरूक कर रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी किसी भी प्रक्रिया का कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई फोन पर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर धमकाता है या पैसों की मांग करता है, तो डरने के बजाय तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।





















