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अनूपगढ़ में सिंचाई पानी की मांग पर अड़े किसान, हनुमान बेनीवाल के दखल से बढ़ी राजनीतिक हलचलराजस्थान
12 अक्तू॰ 2026, 5:27 pm (49 मिनट पहले)· 0

अनूपगढ़ में सिंचाई पानी की मांग पर अड़े किसान, हनुमान बेनीवाल के दखल से बढ़ी राजनीतिक हलचल

पश्चिमी राजस्थान के घड़साना में 32 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन तेज हो गया है, जहां आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल के समर्थन के बाद भजनलाल सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

पश्चिमी राजस्थान के अनूपगढ़ क्षेत्र स्थित घड़साना में किसानों का असंतोष गहराता जा रहा है। श्रीगंगानगर जिले के इस इलाके में पिछले 32 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन अब प्रदेश प्रशासन के लिए एक बेहद पेचीदा स्थिति पैदा कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं, और ऐसे नाजुक समय में अन्नदाताओं का यह रोष सत्ता पक्ष की चिंताओं को बढ़ाने वाला साबित हो रहा है। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हुई हालिया बातचीत किसी सहमति पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद आंदोलन की राह देख रही संघर्ष समिति अपनी पुरानी मांगों पर अडिग बनी हुई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम और यातायात का संकट

अपनी मांगों पर सरकार का ध्यान खींचने के लिए आंदोलनकारी किसानों ने रविवार को लगातार दूसरे दिन भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग 911 पर 12 एमडी टोल नाके के निकट पड़ाव डाले रखा। इस रुकावट के चलते अनूपगढ़, घड़साना और बीकानेर के बीच चलने वाला सड़क यातायात पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। लंबी दूरी की गाड़ियों और दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

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सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर इस चक्का जाम की सीधी मार पड़ी। अनूपगढ़ डिपो प्रबंधक के अनुसार इस महत्वपूर्ण मार्ग पर राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की लगभग 60 प्रतिशत बसों का आवागमन ठप पड़ गया। निजी वाहनों, व्यापारिक ट्रकों और छोटे वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकलने में पसीने छूट गए। कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जो स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

पानी की बारी पर तकरार और बेनतीजा रही वार्ता

इस पूरे टकराव की मुख्य जड़ फसलों की सिंचाई के लिए नहर के पानी का वितरण है। आंदोलन कर रहे किसानों की स्पष्ट मांग है कि उन्हें सिंचाई के लिए 6+2 की पानी की बारी दी जाए। दूसरी ओर, सरकार का रुख 5+2 सिंचाई बारी देने पर अड़ा हुआ है। दोनों पक्षों के बीच घंटों चली चर्चा के बावजूद इस बुनियादी गणित पर कोई सहमति नहीं बन सकी और बातचीत बेनतीजा समाप्त हो गई।

गतिरोध गहराने के बीच रविवार देर रात राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल धरना स्थल पर पहुंचे। उनके आगमन से आंदोलनकारियों में नया उत्साह देखने को मिला। बेनीवाल ने संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर राज्य सरकार के रुख का आकलन किया, लेकिन जब सरकारी पक्ष से कोई लचीलापन नहीं दिखा तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।

चुनावी व्यस्तता के बीच आंदोलन को नई धार देने का संकल्प

धरना स्थल पर मौजूद किसानों की जमीनी परेशानियों और सड़क पर फंसे आम नागरिकों की दिक्कतों को देखते हुए हनुमान बेनीवाल ने फिलहाल राजमार्ग से जाम हटाने की सलाह दी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पीछे हटना नहीं बल्कि एक अल्पकालिक रणनीति है। बेनीवाल ने बताया कि पंचायती राज चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन दाखिल करने में अब केवल दो दिन का समय बचा हुआ है, जिसके कारण वह चुनावी जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं।

सांसद ने दो टूक कहा कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, यानी 13 और 14 अक्टूबर के उपरांत, वह पूरी ताकत के साथ वापस किसानों के बीच लौटेंगे। उन्होंने आगामी रणनीति का पूरा फैसला आंदोलन की स्थानीय संघर्ष समिति पर छोड़ दिया है। बेनीवाल ने जोर देकर कहा कि किसानों के हक, सम्मान और आजीविका की इस लड़ाई में वह पीछे नहीं हटेंगे और आने वाले दिनों में प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया जाएगा।

साल 2004 के ऐतिहासिक संघर्ष की यादें और सरकार की चुनौतियां

घड़साना का यह इलाका सिंचाई जल विवादों को लेकर पहले भी चर्चा में रहा है। किसान संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं तो वे दो दशक पुराने रावला घड़साना किसान आंदोलन के इतिहास को दोहराने से पीछे नहीं हटेंगे। साल 2004 में हुए उस बड़े जनांदोलन ने राज्य की राजनीति को हिलाकर रख दिया था।

वर्तमान में भजनलाल सरकार के समक्ष इस सुलगते मुद्दे का शांतिपूर्ण हल तलाशने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। आगामी पंचायत चुनाव के पहले चरण के दौरान किसानों की यह नाराजगी चुनावी नतीजों पर सीधा असर डाल सकती है। यदि 13-14 अक्टूबर के बाद आंदोलन नए तेवर के साथ दोबारा तेज हुआ, तो पश्चिमी राजस्थान के इस सीमावर्ती इलाके में प्रशासनिक मशीनरी के लिए शांति बनाए रखना और अधिक मुश्किल हो सकता है।

सवाल-जवाब

घड़साना में किसान आंदोलन कितने दिनों से चल रहा है?
यह आंदोलन पिछले करीब 32 दिनों से अनूपगढ़ इलाके के घड़साना में अपनी मांगों को लेकर जारी है।
किसानों की मुख्य मांग क्या है?
किसान फसलों की सिंचाई के लिए नहर के पानी की 6+2 बारी देने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार 5+2 बारी पर अड़ी है।
चक्का जाम से कौन सा राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हुआ?
किसानों के धरने से भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग 911 पर अनूपगढ़-घड़साना-बीकानेर मार्ग पर यातायात बाधित हुआ।
रोडवेज बसों के संचालन पर कितना असर पड़ा?
अनूपगढ़ डिपो प्रबंधक के अनुसार इस रूट पर लगभग 60 प्रतिशत रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित हुआ।
सांसद हनुमान बेनीवाल ने आंदोलन को लेकर क्या घोषणा की?
उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव के नामांकन के दो दिन बाद, यानी 13-14 अक्टूबर के बाद, वह किसानों के साथ खड़े होकर आंदोलन को और तेज करेंगे।
किसानों ने किस पुराने आंदोलन को दोहराने की चेतावनी दी है?
किसानों ने चेताया है कि मांगें न मानने पर वे साल 2004 में हुए ऐतिहासिक रावला घड़साना किसान आंदोलन को दोहराने से पीछे नहीं हटेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 मिनट पहले

32 दिन से पानी के लिए सड़क जाम है और सरकार 5+2 पर अड़ी है, समझौता कैसे हो!

Rohan Verma@rohan-verma·10 मिनट पहले

करण भाई, बात तो सही है आपकी। पर ये बताइए कि हनुमान बेनीवाल के आने से क्या सरकार सच में मान जाएगी?

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