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झज्जर की रेणु हरिवंशी 273 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पर, खाटूश्याम जी के दरबार में टेकेंगी मत्थाराजस्थान
31 अक्तू॰ 2026, 9:39 pm (9 मिनट पहले)· 0

झज्जर की रेणु हरिवंशी 273 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पर, खाटूश्याम जी के दरबार में टेकेंगी मत्था

हरियाणा के झज्जर जिले की रेणु हरिवंशी खाटूश्याम जी के दर्शन के लिए 273 किलोमीटर की कठिन दंडवत यात्रा कर रही हैं। साल 2018 से अन्न त्याग कर केवल नारियल पानी पर रहने वाली रेणु इस यात्रा के जरिए जनकल्याण और गौ संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।

धार्मिक आस्था और अटूट संकल्प जब एक साथ मिलते हैं, तो इंसान शारीरिक सीमाओं से कहीं आगे निकल जाता है। हरियाणा के झज्जर जिले के सुबाणा गांव की रहने वाली रेणु हरिवंशी इन दिनों इसी दृढ़ निश्चय के साथ सड़कों पर आगे बढ़ रही हैं। बाबा श्याम के प्रति गहरी निष्ठा रखने वाली रेणु खाटूश्याम जी के मंदिर तक की 273 किलोमीटर लंबी दूरी को दंडवत प्रणाम करते हुए पूरा कर रही हैं। कड़े रास्तों, भीषण थकान और घुटनों की तकलीफ के बावजूद उनका यह नियम थमा नहीं है। वह कुछ कदम आगे बढ़ती हैं, फिर जमीन पर पूरी तरह लेटकर दंडवत प्रणाम करती हैं और उठकर अगले पड़ाव की तरफ चल पड़ती हैं।

सुबाणा गांव से शुरू हुआ 273 किलोमीटर का कठिन सफर

रेणु की यह आध्यात्मिक यात्रा 5 जुलाई को उनके गृह गांव सुबाणा से आरंभ हुई थी। उनके इस कठिन सफर में उनके साथ करीब 15 लोगों का समूह भी मौजूद है, जो रास्ते भर जरूरी व्यवस्थाएं संभालता है। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए इस मौसम में पैदल चलना भी थका देने वाला साबित होता है, लेकिन रेणु बिना किसी रुकावट के पूरी श्रद्धा के साथ हर कदम को दंडवत प्रणाम में बदल रही हैं। हरियाणा से निकलकर राजस्थान की सीमा में प्रवेश करने के बाद भी उनके क्रम में कोई बदलाव नहीं आया है। सड़क पर सीधे लेटकर शरीर को धरती से स्पर्श कराना और फिर उठकर आगे बढ़ना ही उनके पूरे सफर का नियम बना हुआ है।

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साल 2018 में अन्न त्याग कर शुरू की कठोर जीवनशैली

रेणु का यह समर्पण सिर्फ इस यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी दिनचर्या सालों से बेहद सख्त रही है। उन्होंने वर्ष 2018 में ही पूरी तरह से अन्न का त्याग कर दिया था। इसके बाद से वह आहार के रूप में केवल नारियल पानी का ही सेवन करती आ रही हैं। इसी अवधि के दौरान उन्होंने एएनएम की अपनी नियमित नौकरी से भी इस्तीफा दे दिया था, ताकि समाज सेवा और धार्मिक साधना को अपने जीवन का मुख्य ध्येय बना सकें। उनके पति सिद्धार्थ मल्हान एक सहकारी बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए रेणु ने साधना का यह मार्ग चुना, जिसमें उनके पति सिद्धार्थ मल्हान भी उनका पूरा साथ दे रहे हैं और यात्रा के दौरान उनके साथ चल रहे हैं।

साल 2023 में 67 दिनों में नापी थी 237 किलोमीटर की दूरी

सिद्धार्थ मल्हान के अनुसार, रेणु के लिए इतनी लंबी दंडवत यात्रा का यह पहला अनुभव नहीं है। इससे पहले साल 2023 में भी उन्होंने 237 किलोमीटर की दूरी दंडवत करते हुए सफलतापूर्वक तय की थी। उस सफर को पूरा करने में उन्हें लगभग 67 दिनों का समय लगा था। उस यात्रा की सबसे खास बात यह थी कि जमीन की कठोरता से बचने के लिए उन्होंने किसी गद्दे या सुरक्षा साधन का सहारा नहीं लिया था। अब वह अपने पुराने रिकॉर्ड से भी आगे बढ़कर 273 किलोमीटर की यात्रा कर रही हैं और इस बार भी वह बिना किसी गद्दे के सीधे पक्की सड़क पर दंडवत करते हुए आगे बढ़ रही हैं।

जनकल्याण, गौ संरक्षण और धर्म का संदेश देने का संकल्प

इस साधना को रेणु केवल मंदिर दर्शन तक सीमित यात्रा नहीं मानती हैं। उनका कहना है कि इस सफर का बड़ा उद्देश्य जनकल्याण, गौ संरक्षण और सनातन धर्म के प्रति समाज को जगाना है। वह गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर भी लोगों के बीच जागरूकता फैला रही हैं। यात्रा के दौरान रास्ते में मिलने वाले ग्रामीणों और राहगीरों के साथ उनका सीधा संवाद होता है। लोगों से मिलने वाला स्नेह और समर्थन ही इस सफर में उनकी सबसे बड़ी ऊर्जा बनता है।

ब्रज चौरासी कोस की चार परिक्रमाएं और सालासर का अगला लक्ष्य

रेणु पहले भी कई बार कठिन धार्मिक अनुष्ठान कर चुकी हैं, जिनमें ब्रज चौरासी कोस की चार पैदल यात्राएं शामिल हैं। रास्ते में जब भी उनका काफिला किसी बस्ती या कस्बे से गुजरता है, तो लोग उनकी निष्ठा देखकर ठहर जाते हैं। कई जगह ग्रामीण उनका स्वागत करते हैं और सम्मान व्यक्त करते हैं, लेकिन अभिनंदन स्वीकार करने के तुरंत बाद रेणु दोबारा जमीन पर दंडवत लेटकर अपनी साधना में जुट जाती हैं। उनका वर्तमान लक्ष्य नवरात्रों के आसपास खाटूश्याम जी के मंदिर पहुंचना है। इसके बाद भी उनका सफर नहीं रुकेगा, क्योंकि खाटूश्याम जी में शीश नवाने के बाद वह सालासर बालाजी के लिए पदयात्रा शुरू करने का संकल्प ले चुकी हैं।

सवाल-जवाब

रेणु हरिवंशी कहां की रहने वाली हैं और वह कौन सी यात्रा कर रही हैं?
रेणु हरिवंशी हरियाणा के झज्जर जिले के सुबाणा गांव की रहने वाली हैं और वह खाटूश्याम जी के दर्शन के लिए 273 किलोमीटर की दंडवत यात्रा कर रही हैं।
रेणु ने यह दंडवत यात्रा कब और कहां से शुरू की थी?
उन्होंने अपनी यह कठिन यात्रा 5 जुलाई को अपने पैतृक गांव सुबाणा से शुरू की थी।
रेणु हरिवंशी के भोजन और दिनचर्या को लेकर क्या नियम है?
रेणु ने साल 2018 से अन्न का त्याग कर रखा है और वह भोजन के स्थान पर केवल नारियल पानी ग्रहण करती हैं।
क्या रेणु ने पहले भी ऐसी कोई दंडवत यात्रा की है?
हां, उन्होंने साल 2023 में 237 किलोमीटर की दंडवत यात्रा बिना किसी गद्दे के करीब 67 दिनों में पूरी की थी।
इस यात्रा का मुख्य सामाजिक संदेश क्या है?
रेणु जनकल्याण, सनातन धर्म के प्रचार और गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए जागरूकता फैलाने का संदेश दे रही हैं।
खाटूश्याम जी पहुंचने के बाद रेणु की अगली क्या योजना है?
खाटूश्याम जी के दर्शन करने के बाद रेणु का सालासर बालाजी के लिए पदयात्रा करने का संकल्प है।
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