उत्तराखंड के प्रसिद्ध धाम केदारनाथ में फिल्म अभिनेत्री सारा अली खान की धार्मिक यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश में एक नया मजहबी विवाद खड़ा हो गया है। हालिया रिलीज के बाद वह तीन दिनों तक रुद्रप्रयाग जिले के गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित बाबा केदार के पावन धाम में ठहरी थीं। वहां उन्होंने विधि-विधान से शिवलिंग के दर्शन किए, पूजा-अर्चना संपन्न की और संध्या आरती में भी सम्मिलित हुईं। इस यात्रा के दृश्य इंटरनेट पर व्यापक रूप से साझा किए जाने के बाद इस्लामिक संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात की ओर से एक सख्त फरमान जारी किया गया है।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात का कड़ा रुख
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने अभिनेत्री की इस यात्रा को मजहबी नियमों की अवहेलना करार दिया है। उन्होंने औपचारिक फतवा घोषित करते हुए कहा कि किसी भी मुस्लिम के लिए मंदिर प्रांगण में अनुष्ठान करना अनुचित है। मौलाना का तर्क है कि इस्लामिक कानून किसी भी व्यक्ति को अन्य धार्मिक स्थानों पर जाकर देव पूजा करने की अनुमति नहीं देता। उनके अनुसार, इस तरह के अनुष्ठानों में भागीदारी करना शरीयत के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है।
युवाओं के सवालों के बाद सामने आया मजहबी आदेश
मौलाना ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ नवयुवकों ने उनसे अभिनेत्री के मंदिर जाने और वहां आरती करने की वैधता को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। इसी जिज्ञासा और सवालों के प्रत्युत्तर में यह मजहबी हुक्मनामा सामने आया। मौलाना ने अपने वक्तव्य में कहा, "सारा अली खान केदारनाथ मंदिर गई, उन्होंने मंदिर में पूजा-पाठ की, ये तमाम धार्मिक काम शरीयत के मुताबिक नाजायज और हराम है।"
फतवे में कहा गया है कि चाहे कोई पुरुष हो या महिला, मूर्ति स्थल पर जाकर पूजा या दर्शन करना शरीयत के पैमानों पर कतई जायज नहीं माना जा सकता। मौलाना ने जोर देकर कहा कि इस आचरण के कारण अभिनेत्री धार्मिक कायदों के तहत गुनहगार की श्रेणी में आती हैं, इसलिए उन्हें अपने किए पर तत्काल तौबा यानी पश्चाताप कर क्षमा मांगनी चाहिए।
तीन दिनों तक केदारनाथ धाम में रही थीं सारा
अपनी नई सिनेमाई प्रस्तुति के दर्शकों के बीच आने के तुरंत बाद सारा अली खान देवभूमि पहुंची थीं। हिमालय की ऊंची वादियों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ मंदिर में उन्होंने लगातार तीन दिनों तक उपस्थिति दर्ज कराई थी। गर्भगृह में दर्शन करने के अलावा वह भक्तों के साथ आरती में भी बैठी नजर आई थीं। उनकी आस्था और भक्ति भाव को प्रदर्शित करते कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हुए, जिसे देखकर कई लोगों ने जहां उनकी सराहना की, वहीं मजहबी हलकों में बहस छिड़ गई।
गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर पहले भी मथ चुका है विवाद
भगवान शिव के इस प्राचीन तीर्थ स्थल पर बाहरी लोगों के आगमन को लेकर पूर्व में भी प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं हो चुकी हैं। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के स्तर पर इससे पूर्व ऐसे सुझावों पर विचार-विमर्श हुआ था कि क्या गैर-सनातन धर्मावलंबियों के मंदिर परिसर में प्रवेश को सीमित किया जाना चाहिए। हालांकि उस समय समिति ने आधिकारिक तौर पर यह रुख साफ किया था कि सनातन परंपरा में आस्था, सम्मान और विश्वास रखने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का धाम में पूर्ण स्वागत है। इसके बावजूद, अब एक मुस्लिम अभिनेत्री के वहां वैदिक अनुष्ठानों में भाग लेने को लेकर बरेलवी उलमा की ओर से दर्ज कराई गई यह तीखी आपत्ति राष्ट्रीय पटल पर फिर से चर्चा का विषय बन गई है।



















