राजस्थान के जालोर में स्थापित लख चौरासी धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. सनातन परंपरा में 84 लाख योनियों का विशेष उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार आत्मा लगातार जन्म और पुनर्जन्म के लंबे चक्र से होकर गुजरती है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मानव जीवन ही वह अनमोल अवसर है, जिसके जरिए व्यक्ति साधना, सत्कर्म और ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलकर इस बंधन से छुटकारा पा सकता है. इसी आध्यात्मिक भाव को साकार करते हुए जालोर के मुक्ति धाम परिसर में लख चौरासी चक्र का निर्माण किया गया है, जिसके चारों ओर परिक्रमा कर भक्त सांसारिक बंधनों से मुक्ति की कामना करते हैं.
परिक्रमा के पीछे श्रद्धा, संकल्प और सकारात्मक विचारों का महत्व
इस पवित्र स्थल पर परिक्रमा को केवल औपचारिक चक्कर लगाने तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे गहरे आत्मसंयम, श्रद्धा और संकल्प की एक आंतरिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, जब कोई श्रद्धालु इस चक्र के फेरे लगाता है, तो उसके चित्त में पूरी तरह सकारात्मक विचार रहने चाहिए. इस दौरान किसी भी अन्य व्यक्ति के प्रति मन में दुर्भाव, ईर्ष्या या कटु विचार नहीं लाने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि निर्मल हृदय और शुद्ध अंतःकरण के साथ किए गए फेरे ही व्यक्ति को आध्यात्मिक पुण्य दिलाते हैं और जीवन को मोक्ष की ओर अग्रसर करते हैं. यही कारण है कि स्थानीय लोग और दूर-दराज से आने वाले भक्त इसे अपनी आस्था और मोक्ष की साधना से जोड़कर देखते हैं.
द्वारिका धाम की तर्ज पर तैयार हुआ जालोर का यह पवित्र चक्र
गुजरात के सुप्रसिद्ध द्वारिका धाम में लख चौरासी से जुड़ी एक अत्यंत प्राचीन और प्रतिष्ठित धार्मिक परंपरा मौजूद है. उसी पावन परिपाटी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान के जालोर में भी इस विशिष्ट लख चौरासी चक्र की स्थापना की गई. मुक्ति धाम के अध्यक्ष कालूराम के अनुसार, लख चौरासी की परिक्रमा को लेकर श्रद्धालुओं के मन में अटूट श्रद्धा देखने को मिलती है. लोग यहां आकर अपने जीवन के कष्टों के निवारण के साथ-साथ परिवार के लिए सुख-शांति और अंततः मोक्ष की प्रार्थना करते हैं. द्वारिका जैसी पवित्र परंपरा का स्थानीय स्तर पर विस्तार होने से इस क्षेत्र के लोगों को अपने ही अंचल में जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति की कामना का एक महत्वपूर्ण केंद्र मिल गया है.
पूर्णिमा, अमावस्या और दीवाली पर उमड़ती है भारी भीड़
सामान्य दिनों के अलावा विशेष धार्मिक तिथियों पर जालोर के इस चक्र की महत्ता और भी ज्यादा बढ़ जाती है. हर महीने पड़ने वाली पूर्णिमा और अमावस्या के पावन अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में लोग परिक्रमा करने पहुंचते हैं. इसके अतिरिक्त दीवाली के त्योहार के आसपास जब विभिन्न तीर्थों पर भक्तों का आवागमन तेज होता है, तब लख चौरासी स्थल पर भी श्रद्धालुओं का विशेष जमावड़ा देखने को मिलता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार मोक्ष का वास्तविक अर्थ जन्म और मृत्यु के अंतहीन चक्र से छूटकर परमपिता परमात्मा के चरणों में विलीन हो जाना है. इसी सर्वोच्च आध्यात्मिक लक्ष्य को पाने की इच्छा से श्रद्धालु जालोर पहुंचकर लख चौरासी चक्र के फेरे लगाते हैं और अपनी आस्था प्रकट करते हैं.
















