राजस्थान के कोटा स्थित जेके लॉन अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद बारां जिले की एक 26 वर्षीय महिला की जान जाने की दुखद घटना सामने आई है। पिछले नौ दिनों की अवधि में कोटा के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूताओं की जान जाने का यह तीसरा मामला बन गया है। जान गंवाने वाली महिला की शिनाख्त बारां जिले के छबड़ा इलाके के अंतर्गत आने वाले बारी गांव की रहने वाली शबनम बानो के तौर पर की गई है। इस घटना के सामने आने के बाद पीड़िता के परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के नाम पर महिला को लंबे समय तक भूखा रखा गया और फिर ड्रिप लगाने के बाद उसकी शारीरिक स्थिति अचानक बेहद नाजुक हो गई थी।
दूसरी ओर, पूरे मामले पर जेके लॉन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. निर्मल शर्मा का आधिकारिक पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि जब महिला को उनके अस्पताल लाया गया था, तब वह पहले से ही कोमा जैसी अत्यंत गंभीर स्थिति में थी। परिजनों के आरोपों और अस्पताल प्रशासन के बयानों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। इस दर्दनाक घटनाक्रम ने कोटा संभाग के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रसूताओं की देखभाल, आपातकालीन सेवाओं और मातृत्व सुरक्षा प्रबंधों को लेकर एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही के दिनों में सिजेरियन प्रसव के बाद महिलाओं की स्थिति बिगड़ने के अन्य मामले भी देखे गए थे, जिसके कारण नौ दिनों के भीतर यह तीसरी मौत स्थानीय लोगों और परिजनों में गहरी चिंता का कारण बन गई है।
प्रसव के बाद गिरता गया रक्तचाप, रात में हुई मौत
पीड़िता के परिजनों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बारी गांव की निवासी 26 वर्षीय शबनम बानो को सुरक्षित प्रसव की उम्मीद के साथ अस्पताल में दाखिल कराया गया था। परिजनों ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन पूरा किया, जिसके जरिए महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। हालांकि, सर्जरी पूरी होने के कुछ ही समय बाद शबनम के स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट दर्ज की जाने लगी। परिजनों का कहना है कि प्रसव के तुरंत बाद उसका ब्लड प्रेशर लगातार अनियंत्रित होकर नीचे गिरता चला गया। तमाम प्रयासों के बावजूद महिला की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ और शनिवार रात करीब 10 बजे उसने अंतिम सांस ली।
परिजनों का आरोप: भूखा रखा और गलत ड्रिप से बिगड़ी तबीयत
मृतका के भाई सरफराज ने उपचार प्रक्रिया में बरती गई कमियों को विस्तार से साझा करते हुए बताया कि शबनम को सबसे पहले बारां के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां मौजूद चिकित्सा दल ने परिजनों को जानकारी दी थी कि 23 अक्टूबर को महिला का ऑपरेशन किया जाएगा। परिजनों का सीधा आरोप है कि सर्जरी की तैयारी का हवाला देते हुए 22 अक्टूबर की रात से ही शबनम का खान-पान पूरी तरह बंद करवा दिया गया था। लगभग 12 घंटे का समय बीत जाने के बाद भी तय समय पर उसका ऑपरेशन नहीं किया जा सका।
परिजनों के अनुसार, अस्पताल परिसर में जब शबनम को ड्रिप चढ़ाई गई, तो उसके कुछ ही पलों के बाद उसे अचानक तेज दौरे पड़ने लगे। दौरे आने और रक्तचाप में भारी गिरावट के चलते जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो वहां के डॉक्टरों ने जोखिम को देखते हुए महिला को तत्काल बारां से कोटा रेफर करने का निर्णय लिया। कोटा पहुंचने पर भी महिला की जान नहीं बचाई जा सकी, जिसके चलते परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन का दावा: कोमा की स्थिति में हुआ था दाखिला
परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोपों के बीच जेके लॉन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. निर्मल शर्मा ने संस्थान का रुख स्पष्ट किया है। अधीक्षक के अनुसार, मरीज को जब अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था, तब उसकी हालत पहले से ही अत्यंत नाजुक थी और वह कोमा की स्थिति में पहुंच चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन का यह बयान परिजनों के उन दावों को पूरी तरह खारिज करता दिखता है जिनमें उपचार में देरी या गलत दवा देने की बात कही जा रही है।
फिलहाल यह बात चिकित्सा जगत और प्रशासन दोनों के लिए जांच का विषय बनी हुई है कि आखिर महिला के शरीर में किस कारण से दौरे पड़े और किस वजह से उसका स्वास्थ्य इतनी तेजी से बिगड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए बारां से लेकर कोटा तक के पूरे मेडिकल रिकॉर्ड, दवाओं की सूची और ऑपरेशन थियेटर की परिस्थितियों की तकनीकी जांच बेहद जरूरी होगी।
स्वास्थ्य तंत्र पर उठे सवाल, जांच से ही साफ होगी तस्वीर
कोटा संभाग के सरकारी अस्पतालों में केवल नौ दिनों के अंतराल में तीन प्रसूताओं की मौत की घटनाओं ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। इससे पहले भी सिजेरियन डिलीवरी के उपरांत महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने और उनकी जान जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें से एक मामले में पेट में खून जमा होने और दूसरे में किडनी खराब होने जैसी गंभीर समस्याएं देखी गई थीं। लगातार घट रहे ऐसे मामलों से आम जनता का सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर भरोसा डगमगाने लगा है।
हालांकि, अभी तक स्वास्थ्य विभाग या किसी विशेषज्ञ समिति ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि इन तीनों मामलों में मौत की वजहें एक समान थीं या वे अलग-अलग जटिलताओं के चलते हुईं। शबनम की मौत के बाद जहां पीड़ित परिवार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़ा है, वहीं जेके लॉन अस्पताल प्रशासन इसे एक जटिल और गंभीर स्थिति में आए मरीज का मामला बता रहा है। अब संपूर्ण चिकित्सकीय जांच और डेथ ऑडिट के बाद ही यह तस्वीर साफ हो सकेगी कि प्रसूता की मौत किस मेडिकल कंडीशन की वजह से हुई और क्या इसमें किसी भी स्तर पर डॉक्टरों की चूक रही थी।
























