राजस्थान के सभी सात संभाग मुख्यालयों और प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर अधिकांश जगहों पर मध्यम श्रेणी में दर्ज किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निगरानी केंद्रों से सामने आए नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी जयपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 109 रिकॉर्ड किया गया। जयपुर के वातावरण में इस समय हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला मुख्य प्रदूषक तत्व पार्टिकुलेट मैटर 10 यानी पीएम-10 पाया गया है। पूरे राज्य में वातावरण की स्थिति मिली-जुली बनी हुई है, जहां कुछ शहरों में हवा सांस लेने योग्य है, वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में धुंध और प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है।
संभाग मुख्यालयों में हवा की स्थिति
राज्य के अन्य प्रशासनिक संभाग मुख्यालयों पर नजर डालें तो वहां भी प्रदूषण का स्तर मध्यम दायरे में ही बना हुआ है। पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख शहर जोधपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 126 दर्ज हुआ, जबकि झीलों की नगरी उदयपुर में यह आंकड़ा 125 रहा। अजमेर शहर में एक्यूआई 110 दर्ज किया गया, जिससे वहां की हवा तुलनात्मक रूप से थोड़ी बेहतर रही। इसके विपरीत बीकानेर में वायु प्रदूषण अधिक देखा गया और वहां एक्यूआई 163 तक पहुंच गया। हाड़ौती क्षेत्र के कोटा शहर में सूचकांक लगभग 120 के आसपास मापा गया, जबकि पूर्वी राजस्थान के भरतपुर में यह स्तर करीब 150 दर्ज किया गया। इन सभी संभागों में प्रदूषण का स्तर मध्यम वर्ग में आने के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता को सचेत रहने को कहा है।
औद्योगिक शहरों का हाल और भिवाड़ी में सबसे ज्यादा प्रदूषण
राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक नगरों में वायु गुणवत्ता के स्तर में काफी अंतर देखने को मिला है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे अलवर में एक्यूआई 107 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में है। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 128 रहा, जबकि शेखावाटी के सीकर में यह आंकड़ा लगभग 160 तक पहुंच गया, जिसे मध्यम से खराब स्थिति की ओर बढ़ता माना जा रहा है। हालांकि, पूरे प्रदेश में सबसे अधिक प्रदूषित हवा औद्योगिक शहर भिवाड़ी में रिकॉर्ड की गई, जहां एक्यूआई 184 के आसपास दर्ज हुआ। भिवाड़ी में निरंतर संचालित होने वाली औद्योगिक गतिविधियों, कारखानों के धुएं और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को इस उच्च प्रदूषण की मुख्य वजह बताया जा रहा है।
स्वास्थ्य परामर्श और आगामी दिनों का पूर्वानुमान
यद्यपि राज्य के अधिकांश हिस्सों में हवा आम लोगों के लिए बेहद गंभीर स्थिति में नहीं है, फिर भी सांस, हृदय और फेफड़ों की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्तर परेशानी खड़ी कर सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अस्थमा और सांस के मरीज सुबह और शाम के समय बाहरी गतिविधियों, तेज दौड़ और कसरत को सीमित रखें। बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित कदम साबित होगा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, आने वाले दिनों में आसमान साफ रहने और धूप खिलने के आसार हैं, जिससे प्रदूषक तत्वों के बिखरने और हवा की गुणवत्ता में धीरे-धीरे सुधार आने की संभावना है।
























