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जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचे आसाराम को नहीं मिली एंट्री, तय समय पर सरेंडर न करने पर प्रशासन ने रोकाराजस्थान
28 अक्तू॰ 2026, 8:35 am (2 घंटे पहले)· 2

जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचे आसाराम को नहीं मिली एंट्री, तय समय पर सरेंडर न करने पर प्रशासन ने रोका

पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद देर रात जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचे आसाराम को प्रशासन ने प्रवेश देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी पैरोल बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी थी।

जोधपुर के बहुचर्चित यौन शोषण और नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। बीस दिन की पैरोल अवधि समाप्त होने के बावजूद तय समय सीमा के भीतर जोधपुर सेंट्रल जेल वापस न लौट पाने के कारण जेल प्रशासन ने उन्हें परिसर के भीतर प्रवेश देने से साफ इंकार कर दिया। पैरोल समाप्त होने के तुरंत बाद हवाई अड्डे से सीधे सेंट्रल जेल के बाहर पहुंचे आसाराम को देर रात का हवाला देते हुए मुख्य द्वारों पर ही रोक दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जोधपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक प्रमोद सिंह द्वारा की गई है।

तय समय सीमा का पालन न होना बना वजह

नियमों के अनुसार आसाराम को अपनी बीस दिन की पैरोल अवधि पूरी होने पर 27 अक्टूबर 2026 को शाम पांच बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करना था। उनकी यह पैरोल अवधि ठीक उसी दिन समाप्त हो रही थी। हालांकि निर्धारित समय सीमा बीत जाने और काफी रात को जेल पहुंचने के कारण जेल नियमावली का हवाला देते हुए अधिकारियों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी।

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सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली किसी तरह की राहत

तय समय सीमा में राहत पाने के उद्देश्य से उनके वकीलों ने देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। हालांकि अदालत ने चिकित्सा आधार पर राहत प्रदान करने या पैरोल की अवधि को और आगे बढ़ाने की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट निर्देश दिए थे कि तय तिथि यानी 27 अक्टूबर को शाम पांच बजे तक हर हाल में जोधपुर जेल पहुंचकर सरेंडर करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ कर दिया था कि आत्मसमर्पण करने के बाद ही उनकी सजा के खिलाफ दायर की गई मुख्य अपील पर आगे की सुनवाई की जाएगी।

नाबालिग से दुष्कर्म मामले में काट रहे हैं उम्रकैद

इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि की बात करें तो आसाराम को एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के गंभीर मामलों में दोषी करार दिया जा चुका है और अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वह पिछले काफी समय से जोधपुर सेंट्रल जेल में ही अपनी सजा काट रहे हैं। हाल ही में उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते बीस दिनों की अंतरिम पैरोल दी गई थी। अब पैरोल अवधि खत्म होने पर समय पर न पहुंचने और सर्वोच्च अदालत से याचिका खारिज होने के बाद उनकी मुश्किलें एक बार फिर काफी बढ़ गई हैं।

सवाल-जवाब

आसाराम को किस मामले में सजा हुई है?
आसाराम को एक नाबालिग से दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
आसाराम को कितने दिन की पैरोल मिली थी?
उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते 20 दिनों की अंतरिम पैरोल प्रदान की गई थी।
सरेंडर करने की अंतिम तिथि और समय क्या था?
उन्हें 27 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करना था।
जोधपुर जेल प्रशासन ने उन्हें अंदर जाने क्यों नहीं दिया?
पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद वे तय समय पर नहीं पहुंचे और देर रात जेल पहुंचे, जिसके कारण नियम के तहत प्रवेश नहीं दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने चिकित्सा आधार पर पैरोल बढ़ाने की उनकी याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया था।
इस घटना की पुष्टि किसने की है?
इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह ने की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·1 घंटे पहले

मुझे वो दिन अच्छे से याद है जब आसाराम की गिरफ्तारी के बाद जोधपुर में तनाव का माहौल था और हम लोग रिपोर्टिंग के लिए जेल के बाहर ही डटे हुए थे। समय पर न पहुँचने के ऐसे मामलों में प्रशासन कभी ढील नहीं देता, और कल रात भी वही हुआ जब उसे बाहर ही रोक दिया गया। कानून सबके लिए बराबर है, चाहे कोई बाबा हो या आम आदमी।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

समय पर न पहुँच पाने को महज़ देर होना बता रहे हैं, पर जेल के नियम सबके लिए बराबर होते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

रविकेश जी, बात बिल्कुल सही है। सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश होने के बाद भी समय पर न पहुँचना जेल नियमों की सीधी अनदेखी है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

नियम तो सबके लिए बराबर होने चाहिए, चाहे कोई बाबा हो या आम कैदी। तय वक्त पर जेल नहीं पहुंचे तो भुगतना ही पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, बात तो सही है, पर इतनी रात को जेल के बाहर रोकना भी कौन सा नया पेच है? सुप्रीम कोर्ट का रुख भी तो देखो, लग रहा है मामला थोड़ा और उलझेगा।

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