जयपुर नगर निगम की उद्यान शाखा में फूल-मालाओं की खरीद को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विकास कार्यों के उद्घाटन, शिलान्यास और अन्य छोटे-बड़े आयोजनों में अतिथियों के स्वागत के नाम पर मात्र आठ महीनों में 17 लाख रुपये से अधिक की राशि फूल-मालाओं पर खर्च कर दी गई। शुरुआती जांच और सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, कई ऐसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए जहां मेहमानों की संख्या केवल 5 से 10 के बीच थी, लेकिन उनके स्वागत के लिए आधिकारिक तौर पर 100 से लेकर 700 तक मालाएं खरीदे जाने का दावा किया गया। एक विशिष्ट कार्यक्रम में तो अकेले 400 मालाएं खरीदे जाने का हिसाब सामने आया है, जिससे इस पूरी प्रक्रिया पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरी खरीद प्रक्रिया की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि फूल-मालाओं की यह पूरी आपूर्ति एक ही फर्म फ्लोरिना एंटरप्राइजेज के माध्यम से की गई। ऐसा आरोप है कि अधिकांश सामग्री बाजार में मिलने वाली सामान्य दरों से लगभग दोगुनी कीमत पर खरीदी गई। इसके अलावा, अलग-अलग कार्यक्रमों में एक जैसी ही सामग्री के लिए अलग-अलग दरें वसूली गईं और बिलों में भारी फेरबदल देखा गया। इसके बावजूद, उद्यान शाखा के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस फर्म के 17 लाख रुपये से अधिक के भुगतान को आधिकारिक रूप से मंजूरी भी दे दी। अब यह बड़ा सवाल बन गया है कि आखिर इतने सीमित मेहमानों के लिए इतनी भारी मात्रा में मालाएं क्यों मंगाई गईं और खरीद दरों में इस तरह का भारी अंतर क्यों रखा गया।
जून से फरवरी के बीच आयोजित 35 कार्यक्रमों में हुई खरीदारी
जयपुर नगर निगम की ओर से पिछले साल जून से लेकर इस साल फरवरी तक लगभग 35 अलग-अलग कार्यक्रमों में फूल-मालाओं की इस खरीद को दिखाया गया है। इन आयोजनों में विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह, सरकारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के कार्यक्रम, अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के समारोह, बधाई देने के आयोजन, जोन स्तर पर आयोजित जनसुनवाई तथा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विभिन्न जोन कार्यालयों में हुए कार्यक्रम शामिल हैं। इन तमाम कार्यक्रमों में जब अतिथियों की मौजूदगी गिनती के 5 से 10 लोगों की थी, तब भी स्वागत के मद में 100 से 700 मालाएं खरीदे जाने का रिकॉर्ड पेश किया गया। इन आंकड़ों ने खरीद की वास्तविक आवश्यकता और मौके पर इस्तेमाल की गई मालाओं की असल संख्या पर गहरे संदेह पैदा कर दिए हैं।
एक ही फर्म से हुई खरीद पर अलग-अलग दरों का खेल
इस पूरे वित्तीय मामले के केंद्र में फ्लोरिना एंटरप्राइजेज नामक फर्म का नाम सामने आया है, जिसे निगम द्वारा बार-बार ऑर्डर दिए गए। आरोप है कि निगम ने इसी एक फर्म से विभिन्न अवसरों पर फूल, मालाएं और सजावट का अन्य सामान खरीदा। सबसे अजीब बात यह है कि खरीद की दरें हर कार्यक्रम में एक समान नहीं थीं, बल्कि उनमें भारी उतार-चढ़ाव था। कई वस्तुएं बाजार मूल्य से लगभग दोगुनी कीमत पर बिल में दर्शाई गईं। यदि एक ही विक्रेता से निरंतर व्यापार किया जा रहा था, तो हर बार दरों में इतना बड़ा अंतर आने का क्या कारण था? क्या खरीद से पहले स्थानीय बाजार के भावों की कोई तुलना की गई थी? और भुगतान को हरी झंडी देने से पहले किस स्तर पर सामग्री की गुणवत्ता, मात्रा और कीमत की जांच की गई थी?
गुलाब और मोगरे से लेकर कई प्रकार की फूल सामग्री की खरीद
निगम द्वारा जून से फरवरी के बीच जिस फर्म से खरीदारी की गई, उसमें विभिन्न प्रकार के फूल और सजावटी उत्पाद शामिल थे। इनमें गुलाब की पत्तियां, हरे पत्तों की माला, गुलाब की माला, गेंदे या हजारे की माला, साधारण बास्केट, साधारण बुक्का, विशेष बुक्का, गेंदे के गजरे, गुलाब के गजरे, मध्यम आकार की नौरंगा माला, नौरंगा गजरे, फूलों के बंच, विशेष बास्केट, रोज स्टीक और मोगरे के गजरे जैसी सामग्री शामिल है। केवल इन आयोजनों में खरीदे गए बुक्कों और फूलों की बास्केट की कुल कीमत ही दो लाख रुपये से ज्यादा बताई गई है। इससे साफ है कि वित्तीय अनियमितता का यह दायरा सिर्फ मालाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि अतिथियों को भेंट करने के लिए बड़े पैमाने पर बुक्के और बास्केट भी खरीदे गए थे।
उद्यान शाखा का पुराना और विवादित इतिहास
जयपुर नगर निगम की उद्यान शाखा का कामकाज पहले भी कई बार भ्रष्टाचार और अनियमिताओं के मामलों को लेकर चर्चा के केंद्र में रहा है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी के अधिकारी पूर्व में भी इस शाखा के कामकाज को लेकर कई बार छापेमारी और कानूनी कार्रवाई कर चुके हैं। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, उद्यान शाखा से जुड़े कुछ पुराने मामले अभी भी एसीबी के पास लंबित चल रहे हैं। इन सबके बावजूद फूल-मालाओं की खरीद का यह नया मामला सामने आ जाना सरकारी महकमों में कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है। आलोचकों और जानकारों का मानना है कि अधिकारी और ठेकेदार मिलकर किस तरह सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं, यह इसका ताजा उदाहरण है।
प्रताप सिंह खाचरियावास ने उठाए नगर निगम और जेडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने जयपुर नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण दोनों पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम और जेडीए पूरी तरह भ्रष्टाचार की गिरफ्त में डूबे हुए हैं। उनका यह भी कहना था कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो तभी कोई ठोस कार्रवाई करती है जब राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से उसे हरी झंडी मिलती है। खाचरियावास के मुताबिक, मुख्यमंत्री की स्पष्ट अनुमति के बिना एसीबी कोई स्वतंत्र कार्रवाई नहीं कर सकती है। फूल-मालाओं की खरीद के इस प्रकरण पर उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह तो बहुत छोटी बात है और इस तरह के विभागों में इससे भी बड़े घोटाले चल रहे हैं। हालांकि ये सभी आरोप एक राजनीतिक दल के नेता की ओर से लगाए गए हैं, इसलिए इन दावों पर संबंधित प्रशासनिक विभागों और सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी उतना ही आवश्यक है।























