रेगिस्तान के जहाज के रूप में पहचाने जाने वाले ऊंट का श्रृंगार किसी शाही ठाठ-बाट से कम नहीं होता है। पैरों में छनकती पायल, नाक में चमकता फूल, गले में बंधा घंटियों का हार और शरीर पर जड़ी गोरबंध की सजावट इसकी शान बढ़ाती है। ऊंट के ये पारंपरिक आभूषण केवल इसकी सुंदरता को ही नहीं निखारते, बल्कि पशुपालकों की समृद्ध संस्कृति और उनके शौक की अनूठी दास्तान भी बयां करते हैं।
पारंपरिक मेलों में सजती है ऊंटों के श्रृंगार की दुकानें
इन खास आभूषणों को खरीदने के लिए पशुपालकों को किसी आधुनिक आभूषण शोरूम का रुख नहीं करना पड़ता है, बल्कि वे पारंपरिक पशु मेलों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। मेलों में लगने वाली रंग-बिरंगी दुकानें ऊंटों और घोड़ियों के साज-समान से सजी रहती हैं, जो हर आने-जाने वाले को अपनी ओर खींचती हैं। इन मेलों में एक तरफ जहां मवेशियों की खरीद-फरोख्त का दौर चलता है, वहीं दूसरी तरफ उनके संवारने के लिए पारंपरिक सामानों की खरीदारी भी जोरों पर होती है। मेला स्थल पर पहुंचने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए यह नजारा किसी अनोखी दुनिया से कम नहीं लगता है।
बीस प्रकार के आभूषणों से संवरता है ऊंट
ऊंट को पूरी तरह से सजाने और संवारने के लिए कई तरह के विशेष आभूषणों का उपयोग किया जाता है। महाशिवरात्रि पशु मेले में पिछले लगभग तीस साल से अपनी दुकान लगाने वाले व्यापारी घनश्याम पटवा के अनुसार, ऊंट के श्रृंगार में करीब बीस प्रकार के विभिन्न आभूषण शामिल होते हैं। इनमें पैरों की पायल, मुंह को ढकने वाला मोहरा, नाक का फूल, नकेल, गले का गजरा, घंटियों का मनमोहक हार, गोरबंध, काली मेहंदी, अलगगीर और पैरों पर लपेटे जाने वाले रंग-बिरंगे कपड़े मुख्य रूप से शामिल हैं।
बदल जाता है रेगिस्तानी जहाज का पूरा रूप
इन सभी आभूषणों को पहनाने के बाद ऊंट का पूरा हुलिया ही बदल जाता है। जब वह चलता है, तो उसके पैरों में बंधी पायल और गले की घंटियों की आवाज माहौल को जीवंत बना देती है और रंग-बिरंगे गहने सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। यही मुख्य वजह है कि पशुपालक अपने लाड़ले और पसंदीदा ऊंट को सजाने के लिए इन दुकानों से दिल खोलकर खरीदारी करते हैं। इसके अलावा मेलों में घूमने और सवारी का लुत्फ उठाने वाले लोगों के लिए भी ऐसा सजा-धजा ऊंट मुख्य आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
गोरबंध होता है सबसे महंगा और खास आभूषण
इन तमाम गहनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें ऊंट के शरीर की बनावट और अलग-अलग अंगों के हिसाब से विशेष रूप से तैयार किया जाता है। पशुपालक अपनी पसंद, जरूरत और बजट के अनुसार इनकी खरीदारी करते हैं। ऊंट के तमाम आभूषणों में गोरबंध को सबसे ज्यादा कीमती और खास माना जाता है। सवारी के वक्त इसे विशेष रूप से ऊंट के ऊपर सजाया जाता है। इसकी जटिल बनावट और शानदार रंग-बिरंगी कारीगरी ऊंट के रूप को और ज्यादा भव्य बना देती है, जिसके चलते पशुपालकों के बीच इसकी हमेशा भारी मांग बनी रहती है।
दस रुपये से लेकर पंद्रह हजार तक है कीमत
व्यापारी घनश्याम पटवा ने जानकारी दी है कि महाशिवरात्रि पशु मेले में ऊंट के ये श्रृंगारिक आभूषण दस रुपये की शुरुआती कीमत से लेकर पंद्रह हजार रुपये तक के दाम में बिक रहे हैं। मेले में छोटे और सामान्य आभूषण कम कीमत पर आसानी से मिल जाते हैं, जबकि बेहतरीन डिजाइन और उम्दा कारीगरी से तैयार किए जाने वाले गोरबंध की कीमत पंद्रह हजार रुपये तक पहुंच जाती है।






















