घर की रसोई में कभी-कभी ऐसी स्थिति बन जाती है जब टोकरी में पकाने के लिए कोई हरी सब्जी मौजूद नहीं होती। ऐसे मौकों पर अक्सर यह चिंता सताने लगती है कि दोपहर या रात के भोजन में क्या पकाया जाए। अगर फ्रिज में थोड़ी सी दही रखी हो और डिब्बे में लहसुन मौजूद हो, तो बिना किसी परेशानी के बेहद स्वादिष्ट और तीखी दही तीखारी तैयार की जा सकती है। धौलपुर की गृहणी प्रभा शर्मा के अनुसार, यह व्यंजन न केवल कम समय में बनकर तैयार हो जाता है बल्कि इसके लिए बाजार से कोई अतिरिक्त सामग्री खरीदने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। घर में उपलब्ध साधारण देसी मसालों के साथ बनने वाली यह तीखारी सादे भोजन का स्वाद पूरी तरह बदल देती है।
लहसुन छीलने की आसान तरकीब और मसाला कूटने की विधि
दही तीखारी का मुख्य स्वाद लहसुन के तीखेपन और मसालों के सही संतुलन पर टिका होता है। प्रभा शर्मा बताती हैं कि इस व्यंजन को तैयार करने की शुरुआत लहसुन से होती है। लहसुन छीलने में समय न लगे, इसके लिए लहसुन की पूरी गांठ को गैस की मध्यम आंच पर हल्का सा गर्म कर लेना चाहिए। इस साधारण उपाय से लहसुन के छिलके ढीले पड़ जाते हैं और वे बहुत तेजी से उतर जाते हैं। इस रेसिपी के लिए लगभग 20 से 25 लहसुन की कलियां छीलकर तैयार की जाती हैं।
इसके बाद इन छिली हुई कलियों को पारंपरिक सिलबट्टे पर रखा जाता है। इसमें एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, थोड़ा सा हल्दी पाउडर, साबुत जीरा और स्वादानुसार सादा नमक मिलाया जाता है। सिलबट्टे पर इन सभी चीजों को एक साथ अच्छी तरह कूट लिया जाता है। सिलबट्टे पर कूटने से लहसुन का प्राकृतिक रस मसालों के साथ मिलकर एक महीन, गाढ़ा और सुगंधित पेस्ट तैयार कर देता है। इस बीच, एक कटोरी ताजी या बची हुई दही लेकर उसे चम्मच या मथानी की मदद से अच्छी तरह फेंट लिया जाता है ताकि उसमें कोई गांठ न रहे।
कड़ाही में छौंक लगाने और पकाने का सही तरीका
तीखारी पकाने के लिए गैस पर कड़ाही चढ़ाई जाती है और उसमें थोड़ा सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म किया जाता है। जब सरसों के तेल से कच्चापन निकल जाए, तब उसमें जीरे का तड़का लगाया जाता है। जीरा चटकने के तुरंत बाद सिलबट्टे पर कुटा हुआ लहसुन और मसालों का तैयार पेस्ट कड़ाही में डाल दिया जाता है। इस दौरान आंच को नियंत्रित रखना जरूरी होता है ताकि मसाले जलें नहीं।
इसके बाद कड़ाही में थोड़ा और लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, गरम मसाला और आवश्यकतानुसार नमक मिलाया जाता है। इस पूरे मिश्रण को चम्मच से चलाते हुए करीब पांच मिनट तक धीमी से मध्यम आंच पर अच्छी तरह भूना जाता है। पांच मिनट की भुनाई के बाद जब मसालों से खुशबू आने लगे और वे पूरी तरह पक जाएं, तब गैस का चूल्हा पूरी तरह बंद कर दिया जाता है।
दही मिलाने की कला और परोसने का अंदाज
दही तीखारी बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण चरण दही को गर्म मसाले में मिलाना है। गैस बंद करने के बाद पके हुए मसाले में पहले से फेंटी गई एक कटोरी दही डाली जाती है। दही डालते ही उसे लगातार चम्मच से एक ही दिशा में तेजी से चलाना होता है। ऐसा न करने पर दही के फटने का डर रहता है। दही को तब तक लगातार चलाया जाता है जब तक कि सारा मसाला और दही एकसार न हो जाएं और कड़ाही की सतह पर तेल तैरता हुआ दिखाई न देने लगे। जैसे ही तेल ऊपर तैरने लगता है, तीखी और चटपटी दही तीखारी पूरी तरह बनकर तैयार हो जाती है।
प्रभा शर्मा के मुताबिक, इस व्यंजन का खट्टा, तीखा और चटपटा स्वाद हर किसी को पसंद आता है। इसे गरमा-गरम सादी रोटी, तिकोने पराठे या फिर उबले हुए गर्म चावल के साथ थाली में परोसा जा सकता है। यह पारंपरिक व्यंजन न केवल रोजमर्रा के एक जैसे खाने के स्वाद में बदलाव लाता है, बल्कि अचानक घर आ पहुंचे मेहमानों के सामने भी एक झटपट और अनोखे विकल्प के रूप में पेश किया जा सकता है।























