राजस्थान के कोटा स्थित अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में वन्यजीव प्रेमियों को अब उम्रदराज बाघिन महक देखने को नहीं मिलेगी। 23 वर्ष की बेहद बुजुर्ग अवस्था में पहुंच चुकी इस बाघिन की शारीरिक क्षमता कमजोर पड़ने लगी है। हाल ही में किए गए चिकित्सकीय मुआयने के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि बाघिन के पिछले हिस्से ने सामान्य रूप से काम करना काफी कम कर दिया है। इस कमजोरी की वजह से वह चलते समय अपने शरीर का भार और संतुलन सही से नहीं संभाल पा रही है, जिससे उसके लड़खड़ाकर गिरने और गंभीर रूप से जख्मी होने की आशंका लगातार बनी हुई थी। इसी खतरे को भांपते हुए वन महकमे ने उसे फिलहाल खुले बाड़े में छोड़ने पर रोक लगा दी है।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर लिया गया फैसला
बाघिन की तेजी से ढलती उम्र और उठने-बैठने की दिक्कतों को देखते हुए एक विशेष जांच दल गठित किया गया था। इस दल में सहायक वन संरक्षक पंकज मीणा के अलावा दो वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार पाण्डेय और डॉ. त्रिलोक गोचर शामिल रहे। डॉक्टरों के इस पैनल ने महक के स्वास्थ्य की बारीकी से पड़ताल करने के बाद यह स्पष्ट राय दी कि उसे आम पर्यटकों के लिए बने खुले डिस्प्ले क्षेत्र में रखना सुरक्षित नहीं होगा। इसके बाद मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक एवं मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) टी. मोहनराज तथा उप वन संरक्षक (वन्यजीव) प्रमोद कुमार धाकड़ ने आपसी विमर्श के बाद बाघिन को बाड़े से दूर रखने का प्रशासनिक आदेश जारी किया।
खानपान और अहम स्वास्थ्य संकेत
विशेषज्ञों की टीम बाघिन की डाइट और जैविक क्रियाओं पर भी पैनी नजर बनाए हुए है। मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक, 17 अक्टूबर को महक ने बिल्कुल भी खाना नहीं खाया था, जिससे टीम की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अगले ही दिन 18 अक्टूबर को उसने राहत देते हुए लगभग 2.8 किलोग्राम चिकन का सेवन किया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उम्र संबंधी कमजोरी के बावजूद बाघिन के शरीर का तापमान और उसकी सांस लेने की गति सामान्य मानकों के भीतर दर्ज की गई है, जो चिकित्सकों के लिए तसल्ली की बात है।
नाइट शेल्टर और कराल में रखी जाएगी महक
सुरक्षा और एकांत को प्राथमिकता देते हुए वन प्रशासन ने तय किया है कि महक को अब नाइट शेल्टर तथा कराल परिसर में ही रखा जाएगा। यहां उसे बिना किसी तनाव और दौड़-भाग के पर्याप्त विश्राम मिल सकेगा, साथ ही चिकित्सा दल समय-समय पर उसे जरूरी दवाएं और देखरेख मुहैया करा पाएगा। पार्क के केयरटेकर और वरिष्ठ पशु चिकित्सकों को चौबीसों घंटे उसकी गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि उसकी शारीरिक स्थिति में होने वाले किसी भी बदलाव पर फौरन एक्शन लिया जा सके।


















