भरतपुर जिले में चर्चित अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस ने मामले में नामजद फरार आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर इस वारदात में संलिप्त आठ मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक पर पांच-पांच हजार रुपये का नकद इनाम निर्धारित किया गया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों को दबोचने के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं, ताकि लंबे समय से बच रहे इन आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।
भौंडा गांव से ताल्लुक रखते हैं सभी वांछित आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जिन आठ लोगों के खिलाफ यह दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है, वे सभी भरतपुर जिले के वैर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भौंडा गांव के निवासी हैं। फरार चल रहे इन आरोपियों की पहचान राजवीर उर्फ मग्गु, जगत सिंह, हेमसिंह, गौरव कुमार, दानवीर, पप्पी, डिग्गो और राजू के रूप में हुई है। हत्याकांड के बाद से ही ये सभी अपने मूल पते से नदारद हैं। पुलिस की विशेष टीमें इनके संभावित शरणस्थलों और जान-पहचान वालों के नेटवर्क की गहन निगरानी कर रही हैं, ताकि उनके वर्तमान पते का सुराग हासिल किया जा सके।
कुल चालीस हजार रुपये का इनाम और पुलिस की घेराबंदी
जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से घोषित इनाम के तहत प्रत्येक आरोपी पर पांच हजार रुपये की राशि तय की गई है। इस हिसाब से आठों वांछितों पर घोषित कुल इनामी राशि चालीस हजार रुपये तक पहुंच जाती है। वैर थाने की पुलिस को इन सभी को दबोचने के लिए प्राथमिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्थानीय पुलिस का मानना है कि नकद इनाम की घोषणा से जमीनी स्तर पर मुखबिर तंत्र सक्रिय होगा और आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। पुलिस की टीमें सीमावर्ती इलाकों और संभावित सुरक्षित ठिकानों पर लगातार गश्त कर रही हैं।
गोपनीयता का भरोसा और आम लोगों से मदद का आह्वान
पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से भी इस जांच अभियान में सहयोग की स्पष्ट अपील की है। अधिकारियों ने आमजन को आश्वस्त किया है कि यदि किसी के पास भी इन आठों वांछित अपराधियों के छिपने की जगह या उनकी आवाजाही से संबंधित कोई पुख्ता जानकारी है, तो वह बिना किसी झिझक के सीधे वैर थाना पुलिस या वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। पुलिस ने यह स्पष्ट रेखांकित किया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, पता और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी, ताकि मुखबिर की सुरक्षा को किसी भी स्तर पर कोई खतरा न पहुंचे।
फॉरेंसिक साक्ष्य और मामले की पिछली जांच
इस हत्याकांड से जुड़े आपराधिक घटनाक्रम की पड़ताल के दौरान यह तथ्य भी सामने आया था कि पूर्व विधायक पर हमले के समय मौके पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी। वारदात स्थल का मुआयना करने पहुंची विधि विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल की जांच टीम को छानबीन के दौरान मौके से कारतूस के दो खाली खोल बरामद हुए थे। इन बैलिस्टिक साक्ष्यों ने घटनास्थल पर हुए आग्नेयास्त्रों के इस्तेमाल की पुष्टि की थी। पुलिस अब इन भौतिक साक्ष्यों, वैज्ञानिक रिपोर्टों और गवाहों के बयानों को जोड़कर अदालत में मजबूत अभियोजन पक्ष तैयार करने में जुटी है, जिसके लिए इन आठों वांछितों की भौतिक गिरफ्तारी सबसे अहम कड़ी बन चुकी है।





















