राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर के दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना है। यदि आप आने वाले दिनों में अपने परिवार या मित्रों के साथ बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाने का मन बना रहे हैं, तो घर से प्रस्थान करने से पहले इस जानकारी को अच्छी तरह पढ़ लें। ऐसा न हो कि मंदिर पहुंचने के बाद आपको बिना दर्शन किए ही निराश होकर लौटना पड़े। दरअसल, विशेष पूजा-आराधना के कारण बाबा का यह पावन दरबार लगातार 19 घंटों के लिए पूरी तरह से बंद रहने वाला है। इस संबंध में श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से आधिकारिक रूप से आवश्यक दिशानिर्देश और सूचना जारी कर दी गई है ताकि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े।
विशेष पूजा और अलौकिक तिलक श्रृंगार के कारण बंद रहेंगे पट
श्री श्याम मंदिर कमेटी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बाबा श्याम की विशेष सेवा, पूजा और पारंपरिक तिलक श्रृंगार की वजह से आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में प्रवेश को अस्थाई रूप से रोका जाएगा। मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने इस धार्मिक अनुष्ठान के विषय में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि सदियों पुरानी मंदिर परंपरा के तहत बाबा श्याम का समय-समय पर विशेष तिलक श्रृंगार किया जाता है। इस अत्यंत पवित्र और विशेष धार्मिक प्रक्रिया को पूर्ण होने में काफी समय लगता है, जिसे पूरी तरह से वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया जाता है।
चौहान ने कहा, "प्राचीन परंपराओं के अनुसार बाबा श्याम का विशेष तिलक श्रृंगार किया जाता है, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार के बीच काफी समय लगता है।"
इस पूरी गुप्त और विशेष पूजा प्रक्रिया के दौरान गर्भगृह में विराजमान बाबा श्याम के विग्रह के मस्तक पर विशेष रूप से तैयार किए गए चंदन का लेप लगाया जाता है। इसके साथ ही, लगातार मंत्रोच्चार के बीच उनकी विशेष आराधना की जाती है। चूंकि यह एक बेहद गोपनीय और पवित्र पूजा विधान है, इसलिए इस दौरान केवल मंदिर के मुख्य सेवादार और चुनिंदा पुजारी ही गर्भगृह में उपस्थित रहते हैं। इसी वजह से इस अवधि के दौरान बाहरी लोगों या आम दर्शनार्थियों के प्रवेश पर पूरी तरह से पाबंदी रहती है और सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता कर दी जाती है।
श्रद्धालुओं के लिए मंदिर बंद होने और पुनः खुलने का सही समय
भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए मंदिर प्रशासन ने बंद और खुलने के समय की सटीक समय-सारणी जारी की है। कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान के अनुसार, आगामी 16 सितंबर (बुधवार) की रात को 10 बजे होने वाली शयन आरती के तुरंत बाद मंदिर के पट पूरी तरह से बंद कर दिए जाएंगे। इसके अगले दिन यानी 17 सितम्बर (गुरुवार) को पूरे दिन मंदिर के कपाट बंद रहेंगे और किसी को भी दर्शन की अनुमति नहीं होगी। इस पूरे अंतराल में बाबा श्याम का विशेष तिलक श्रृंगार और गुप्त पूजा का कार्य संपन्न किया जाएगा।
श्रृंगार की यह लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 17 सितम्बर (गुरुवार) को ही शाम 4:30 बजे होने वाली संध्या आरती के पावन अवसर पर मंदिर के पट पुनः श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस तय समय-सारणी का विशेष ध्यान रखें। मंदिर बंद रहने की अवधि के दौरान दर्शन के लिए कतारों में न लगें, ताकि उन्हें और उनके परिजनों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
हारे के सहारे बाबा श्याम की पौराणिक महिमा और इतिहास
बाबा श्याम को पूरे देश में 'हारे का सहारा' के नाम से जाना जाता है और करोड़ों श्रद्धालु उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का कलयुगी स्वरूप मानकर पूजते हैं। इस पावन विश्वास के पीछे महाभारत काल की एक अत्यंत प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार, महाभारत के भीषण युद्ध के समय महाबली भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध भूमि में उतरने की तैयारी कर रहे थे। बर्बरीक की असीम शक्ति और उनके पास मौजूद अमोघ बाणों को देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने एक साधारण ब्राह्मण का रूप धारण किया और उनसे उनका शीश दान में मांग लिया।
परम दानी बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के तत्काल अपना शीश काटकर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। बर्बरीक के इस महान बलिदान और अटूट भक्ति से अत्यंत प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें एक अद्भुत वरदान दिया। उन्होंने कहा कि कलयुग में उन्हें स्वयं श्रीकृष्ण के 'श्याम' नाम से पूजा जाएगा और वे इस संसार में हर हारे हुए, निराश और असहाय व्यक्ति का सबसे बड़ा संबल बनेंगे। तभी से बाबा श्याम को 'हारे का सहारा' कहा जाता है और भक्तों का अटूट विश्वास है कि बाबा के दरबार से कोई भी याचक कभी खाली हाथ नहीं लौटता।


















