कोटपूतली जिले के विराटनगर कस्बे में स्थित एक सरकारी संस्कृत स्कूल में उस समय भारी बवाल और हंगामा खड़ा हो गया, जब एक शिक्षक द्वारा लगभग आधा दर्जन स्कूली छात्रों के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट करने का मामला सामने आया। पीड़ित बच्चों के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक ने बिना किसी गलती के छात्रों की बेरहमी से पिटाई की। जैसे ही इस घटना की जानकारी बच्चों के माता-पिता और स्थानीय लोगों को मिली, उनका गुस्सा भड़क उठा। बड़ी संख्या में उग्र अभिभावक और ग्रामीण तुरंत राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय के मुख्य द्वार पर इकट्ठा हो गए और स्कूल प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।
गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना था कि विद्यालय जैसे पवित्र स्थान पर बच्चों के साथ इस तरह का अमानवीय और हिंसक व्यवहार किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। स्कूल गेट पर हो रहे इस जबरदस्त विरोध प्रदर्शन और हंगामे की खबर फैलते ही स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों में खलबली मच गई।
प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने और स्थिति के गंभीर होने पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी तुरंत हरकत में आए। विराटनगर के उपखंड अधिकारी (SDM) लालाराम यादव, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) रामेश्वर प्रसाद और विराटनगर थाने का भारी पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा। इन आला अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और माता-पिता से काफी देर तक बातचीत की और उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि इस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक को तुरंत निलंबित करने की मांग पर अड़े लोग
हालांकि, अधिकारियों के इस आश्वासन के बाद भी गुस्साए ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। वे अपनी इस मांग पर मजबूती से अड़े रहे कि आरोपी शिक्षक को बिना किसी देरी के तुरंत सेवा से निलंबित किया जाए। ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल बच्चों को शिक्षा, नैतिक मूल्य और सुरक्षा प्रदान करने वाली जगह है। अगर ज्ञान देने वाले शिक्षक ही बच्चों पर बिना किसी वजह के हाथ उठाने लगेंगे, तो विद्यार्थी खुद को स्कूल में कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक संबंधित अध्यापक के निलंबन का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।
विद्यालय के छात्रों में भय और चिंता का माहौल
यद्यपि प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी, लेकिन स्थानीय लोगों में शिक्षक के प्रति नाराजगी अभी भी कम नहीं हुई है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि वे इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की लीपापोती या ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस पूरी घटना के बाद से स्कूल के अन्य बच्चों के मन में भी डर का माहौल बन गया है। माता-पिता अपने बच्चों की शारीरिक सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं और उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूलों में ऐसा सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए ताकि भविष्य में फिर कभी ऐसी घटना न दोहराई जा सके।



















