ड्रेसिंग रूम लीक मामला: पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान और इमाम उल हक से साइबर क्राइम एजेंसी ने की 4 घंटे पूछताछमीन राशिफल 12 सितंबर: पार्टनर का मिलेगा सहयोग, करियर और आर्थिक मोर्चे पर होगा फायदाखैबर की पहाड़ियों से निकलकर रजाउल्लाह खान ने टेस्ट क्रिकेट में मचाया तहलका, डेब्यू मैच में ही बने हीरोबेहोशी, बर्बर यातना और बदली हुई पहचान: इज़राइल के सबसे खतरनाक खुफिया एजेंट एली कोहेन के जासूस बनने की अनसुनी दास्तान12 सितंबर का वृश्चिक राशिफल: पैसों के मामलों में सावधानी और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपनाएं यह खास मंत्रजयपुर में खौफनाक वारदात: गीता और तीन बेटियों की हत्या के बाद पिता को चाय पिलाकर भागा राहुल, रात डेढ़ बजे का फोन कॉल खोलेगा राजधनु राशिफल 12 सितंबर: कार्यक्षेत्र में सुधार और रिश्तों में मिठास के साथ कैसा रहेगा आपका आज का दिनमकर राशि के जातकों के लिए 13 से 19 सितंबर का समय लाएगा करियर में सुनहरे अवसर और आर्थिक उन्नति के योगमुरादाबाद में हर्बल प्लांट शुरू करने पर मिल रही 10 लाख रुपये तक की सरकारी सब्सिडी, ऐसे करें आवेदनबिटकॉइन $77,000 के पास ठहरा, भारी तकनीकी रेजिस्टेंस और लॉन्ग-टर्म होल्डर्स की बिकवाली ने रोकी रफ्तार
कोटा कचौरी का अनोखा स्वाद चंबल के पानी और शुद्ध मसालों से जुड़ा हैराजस्थान
12 सित॰ 2026, 7:11 am (41 मिनट पहले)· 0

कोटा कचौरी का अनोखा स्वाद चंबल के पानी और शुद्ध मसालों से जुड़ा है

हाड़ौती अंचल की पहचान बनी कोटा कचौरी की मांग भारत और विदेशों दोनों में है. जोधपुर स्वीट्स के संचालक कमल पाठक इसके अलग स्वाद के लिए चंबल के पानी, शुद्ध मूंगफली के तेल, शुद्ध हींग और मसालों के मेल को बताते हैं.

राजस्थान के हाड़ौती इलाके में स्थित कोटा खान-पान की अलग परंपरा और संस्कृति की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में परिचित है. इस पहचान में कोटा कचौरी का नाम खास है, जिसकी मांग भारत में ही नहीं, विदेशों में भी बनी हुई है. जोधपुर स्वीट्स के संचालक कमल पाठक ने एक साक्षात्कार में इस व्यंजन के इतिहास और स्वाद की खासियतों पर बात की है. उनका कहना है कि चंबल के पानी की खास तासीर इसके अनूठे जायके में अहम भूमिका निभाती है.

1965 में कोटा से शुरू हुआ कारोबारी सफर

इस कारोबार की शुरुआत 1965 में हुई, जब मूल रूप से जोधपुर से आने वाले दिवंगत कुंदन लाल जी पाठक ने कोटा में ‘जोधपुर स्वीट्स’ खोला. परिवार की जड़ें जयपुर की मेजबानी और होटल कारोबार से भी जुड़ी हैं. गुलाबचंद जी के दादाजी दिवंगत जगदीश जी ने वहां ‘जगदीश होटल’ की नींव रखी थी और 65 कमरों से इसकी शुरुआत की. बाद में परिवार ने कोटा में जोधपुर स्वीट्स के नाम से कारोबार आगे बढ़ाया.

ये भी पढ़ें

तेल, हींग और मसालों की भूमिका

कचौरी की तलावट शुद्ध मूंगफली के तेल में होती है. तेल की शुद्धता और मसालों का बेहतरीन संतुलन इसकी मुख्य पहचान है. हींग का चुनाव बिल्कुल शुद्ध सामग्री तक सीमित रखा जाता है. मिश्रण में काली मिर्च का मसाला, अलग-अलग प्रकार के गरम मसाले और अन्य शुद्ध मसाले शामिल होते हैं. इन सबके मेल से जो स्वाद तैयार होता है, उसे देश के किसी दूसरे हिस्से में उसी रूप में नहीं पाया जाता.

सामान्य कचौरियां भारत के कई हिस्सों में मिल जाती हैं, लेकिन कोटा वाली पहचान पूरी तैयारी के मेल से बनती है. परिवार का जोर किसी एक मसाले पर नहीं, बल्कि पानी, तेल, हींग और मसालों की साझा भूमिका पर है. इसी मिली-जुली तैयारी की वजह से इसे सामान्य कचौरियों से अलग देखा जाता है.

नाश्ते से मेहमाननवाजी तक

यह कचौरी सुबह के नाश्ते का हिस्सा ही नहीं है. पिकनिक हो या शादी-ब्याह, छोटा समारोह हो या बड़ा आयोजन, इन मौकों पर इसे खास तौर पर रखा जाता है. घर में मेहमान आने पर पहले कोटा कचौरी या जोधपुर की प्याज कचौरी परोसकर स्वागत किया जाता है. इस तरह यह व्यंजन रोजमर्रा के खाने और मेहमाननवाजी, दोनों में जुड़ा हुआ है.

इन तमाम मौकों पर इसका शामिल होना दिखाता है कि यह केवल बाजार में मिलने वाला नाश्ता नहीं है. यह स्थानीय रस्मों, दैनिक खाने और मेहमानों का स्वागत करने के तरीके का भी हिस्सा बन गया है.

दुकान से शोरूम तक और कोटा से जोधपुर तक

जब जोधपुर स्वीट्स ने कोटा में काम शुरू किया, तब शहर को उद्योग नगरी कहा जाता था. वहां की दुकान धीरे-धीरे बड़े शोरूम में बदली और विरासत अगली पीढ़ियों के हाथ में पहुंची. कोटा और जोधपुर में अब इसकी शाखाएं चल रही हैं. 1965 में शुरू हुआ यह सफर अब आगे की पीढ़ियों के साथ कोटा और जोधपुर में बढ़ रहा है.

गुलाबचंद, अरुण और कमल दूसरी पीढ़ी के तौर पर संचालन संभाल रहे हैं. उनके बाद साहिल, तनय और कार्तिक तीसरी पीढ़ी से पूरी जिम्मेदारी के साथ काम में शामिल हैं. दूसरी और तीसरी पीढ़ी की भूमिका इस बात को स्पष्ट करती है कि कारोबार अब परिवार की साझा जिम्मेदारी बन चुका है.

जयपुर के होटल और कोटा की मिठाई दुकान की कहानियां मिलकर परिवार की मेजबानी और खान-पान कारोबार की पुरानी पृष्ठभूमि दिखाती हैं. कोटा की दुकान का बड़े शोरूम में बदलना इसी लंबे सफर का अगला चरण है.

सवाल-जवाब

कोटा kachori का स्वाद अलग क्यों माना जाता है?
कमल पाठक के अनुसार चंबल के पानी की खास तासीर, शुद्ध मूंगफली का तेल, शुद्ध हींग और मसालों का मेल इसकी पहचान बनाते हैं.
कचौरी में हींग और मसालों का क्या खास है?
हींग पूरी तरह शुद्ध होनी चाहिए और शुद्ध मसालों के साथ विभिन्न गरम मसाले व काली मिर्च का मसाला इस्तेमाल होता है.
जोधपुर स्वीट्स की शुरुआत कब और कहां हुई?
मूल रूप से जोधपुर के रहने वाले दिवंगत कुंदन लाल जी पाठक ने 1965 में कोटा में जोधपुर स्वीट्स के नाम से कारोबार शुरू किया था.
परिवार का जयपुर से क्या पुराना कारोबारी संबंध है?
गुलाबचंद जी के दादाजी दिवंगत जगदीश जी ने जयपुर में जगदीश होटल की नींव रखी थी, जहां 65 कमरों वाला होटल शुरू हुआ था.
कोटा कचौरी किन मौकों पर खाई जाती है?
यह सुबह के नाश्ते, पिकनिक, शादी-ब्याह, छोटे-बड़े समारोहों और मेहमानों के स्वागत में शामिल की जाती है.
अभी कारोबार कौन संभाल रहा है?
दूसरी पीढ़ी में गुलाबचंद, अरुण और कमल हैं, जबकि तीसरी पीढ़ी से साहिल, तनय और कार्तिक भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
जोधपुर स्वीट्स की शाखाएं कहां चल रही हैं?
कोटा के अलावा जोधपुर में भी जोधपुर स्वीट्स की शाखाएं चल रही हैं.
कोटा को कारोबार की शुरुआत के समय किस नाम से जाना जाता था?
उस समय कोटा को उद्योग नगरी कहा जाता था.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR