राजस्थान के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने जा रहा है क्योंकि मानसून का एक नया दौर शुरू हो रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में बना शुष्क मौसम का प्रभाव अब समाप्त होने की कगार पर है और इसकी जगह बारिश की लंबी अवधि शुरू होने वाली है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के नए पूर्वानुमानों से पता चलता है कि एक नई मौसम प्रणाली राज्य के कई संभागों में बारिश की गतिविधियों को तेज करेगी। इससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत तो मिलेगी ही, साथ ही प्रशासनिक और कृषि स्तर पर भी चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि बारिश का यह नया दौर 12 सितंबर से शुरू होकर 16 सितंबर तक जारी रहेगा, जिससे राज्य के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में व्यापक वर्षा और कुछ जगहों पर भारी बौछारें पड़ने की संभावना है।
मौसम प्रणाली की स्थिति और इसकी भौगोलिक गतिशीलता
इस बार राजस्थान में मानसून को फिर से सक्रिय करने वाली मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी में बना एक कम दबाव का क्षेत्र है। यह वायुमंडलीय प्रणाली वर्तमान में दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से सटे क्षेत्र के ऊपर बनी हुई है। मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के अनुसार, इस कम दबाव वाले क्षेत्र के आगामी दिनों में धीरे-धीरे पश्चिम की ओर बढ़ने और मध्य भारत के रास्ते आगे बढ़ने की प्रबल संभावना है। जैसे-जैसे यह मौसमी तंत्र आगे बढ़ेगा, यह अपने साथ भारी मात्रा में नमी लाएगा, जिसका सीधा असर राजस्थान के वायुमंडल पर पड़ेगा और बादलों का निर्माण तेज होगा।
इसके अतिरिक्त, मानसून की ट्रफ रेखा भी इस समय बेहद सक्रिय है। यह ट्रफ रेखा वर्तमान में श्रीगंगानगर और जबलपुर से होती हुई बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के केंद्र तक फैली हुई है। यह विशाल ट्रफ रेखा उत्तरी राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रास्ते होते हुए सीधे तटीय क्षेत्र की मौसम प्रणाली को जोड़ती है। इसके साथ ही, उत्तरी पंजाब और उससे सटे इलाकों में एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है। इन दोनों प्रणालियों का एक साथ काम करना राजस्थान के आसमान में घने बादलों के छाने और गरज-चमक के साथ बारिश की अनुकूल परिस्थितियां बना रहा है।
पूर्वी राजस्थान के जिलों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, 12 सितंबर से पूर्वी राजस्थान के संभागों में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही के साथ बारिश का नया दौर शुरू होगा। इस दौरान मौसम में अचानक बदलाव आएगा और कई इलाकों में बिजली चमकने, मेघगर्जन होने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को इस बदलते मौसम के दौरान सतर्क रहने को कहा है।
इस पूरे दौर में 13 और 14 सितंबर को बारिश की तीव्रता सबसे अधिक रहने का अनुमान है। इन दो दिनों में कोटा और उदयपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। विशेष रूप से कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों में भारी बारिश को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पूर्वी हिस्से के अन्य जिलों जैसे अजमेर, अलवर, ब्यावर, भीलवाड़ा, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, करौली, खैरथल तिजारा, कोटपुतली बहरोड़, राजसमंद, सलूंबर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही और टोंक में भी मेघगर्जन और वज्रपात के साथ बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। तेज हवाओं और वज्रपात के कारण कमजोर ढांचों और बिजली की लाइनों को नुकसान पहुंच सकता है।
पश्चिमी राजस्थान के शुष्क इलाकों में भी बदलेगा मौसम
आमतौर पर पश्चिमी राजस्थान के रेतीले इलाकों में मानसून के इस चरण में मौसम मुख्यतः शुष्क रहता है, लेकिन वर्तमान प्रणाली इतनी प्रभावी है कि इसका असर इन शुष्क क्षेत्रों में भी दिखाई देगा। नए सिस्टम के प्रभाव से 12 और 13 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मौसमी बदलाव शुरू हो जाएंगे। इसके बाद 13 से 16 सितंबर के दौरान जोधपुर और बीकानेर संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम स्तर की बारिश होने की प्रबल संभावना बन रही है।
इस पश्चिमी क्षेत्र में बारिश का यह दौर स्थानीय स्तर पर विकसित होने वाले बादलों के कारण होगा। बालोतरा, चूरू, डीडवाना-कुचामन, जालौर, जोधपुर, नागौर और पाली जैसे जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने की आशंका है। इसके साथ ही जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने के संकेत हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरे पश्चिमी राजस्थान में एक साथ लगातार बारिश नहीं होगी, बल्कि अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय प्रभाव के कारण दोपहर, शाम या रात के समय बौछारें गिरेंगी। यह खंडवृष्टि के रूप में होगा, जिससे कुछ तहसीलें भीग सकती हैं जबकि पास के इलाके सूखे रह सकते हैं।
कृषि विभाग की ओर से किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
आगामी मौसमी परिस्थितियों और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए राज्य के कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक विस्तृत और बेहद जरूरी एडवाइजरी जारी की है। इस समय खेतों में खरीफ की फसलें पककर तैयार हो रही हैं और कई जगहों पर कटाई का काम भी शुरू हो चुका है। ऐसे में अचानक आने वाली बारिश फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे कृषि उपज मंडियों और खुले खेतों में रखे अपने अनाज और जिंसों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दें ताकि वे भीगने से बच सकें।
इसके अतिरिक्त, किसानों को निर्देशित किया गया है कि वे मौसम के साफ होने तक फसलों पर किसी भी तरह के कीटनाशकों या अन्य कृषि रसायनों का छिड़काव न करें। बारिश के दौरान रसायनों का छिड़काव करने से वे पानी के साथ बह जाते हैं, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि पर्यावरण और स्थानीय जल स्रोतों को भी नुकसान पहुंचता है। किसानों को मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही अपनी कृषि गतिविधियों की योजना बनाने की सलाह दी गई है, ताकि इस बेमौसम जैसी दिखने वाली बारिश से फसलों को बचाया जा सके।



















