राजस्थान के कोटा शहर में रविवार को एक अनोखा और ऊर्जावान दृश्य देखने को मिला, जहां स्वास्थ्य, अनुशासन और नागरिक-सैन्य तालमेल का शानदार समन्वय नजर आया। अवसर था भारतीय सेना के प्रतिष्ठित गांडिव डिवीजन के स्वर्ण जयंती समारोह का, जिसके उपलक्ष्य में 'कोटा गांडिव मैराथन-1.0' का भव्य आयोजन किया गया। इस दौड़ ने न केवल सैन्य कर्मियों बल्कि स्थानीय निवासियों को भी एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया। इस पहल का मुख्य ध्येय आम जनता के बीच स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और नागरिकों व सेना के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाना था। उम्मेद सिंह स्टेडियम से शुरू हुई इस दौड़ ने पूरे कोटा शहर में नए उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। इस भव्य दौड़ के दौरान पूरा शहर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया और लोगों ने सेना के जवानों का हौसला बढ़ाया।
उम्मेद सिंह स्टेडियम में उमड़ा जनसैलाब
अलसुबह से ही कोटा के ऐतिहासिक उम्मेद सिंह स्टेडियम में लोगों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। इस दौड़ में हिस्सा लेने के लिए 1500 से अधिक धावक पहुंचे, जिससे यह आयोजन अत्यंत सफल रहा। मैराथन का आकर्षण इस बात में था कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। बच्चे, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी सुबह-सुबह मैदान पर पहुंचे। इस मैराथन की सबसे अनूठी विशेषता यह रही कि इसमें वर्तमान में देश की सेवा कर रहे सैन्य अधिकारियों व जवानों के साथ-साथ सेवानिवृत्त पूर्व सैनिकों और स्थानीय रनिंग क्लबों के धावकों ने भी हिस्सा लिया। विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए इन लोगों ने मिलकर यह दर्शाया कि जब स्वास्थ्य और राष्ट्र की बात आती है, तो सभी एक साथ मिलकर खड़े होते हैं। स्टेडियम के बाहर का पूरा मार्ग धावकों की कदमताल से गूंज उठा।
गांडिव डिवीजन के गौरवशाली 50 वर्ष
गांडिव डिवीजन भारतीय सेना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, वीर और गौरवशाली अंग है। इस सैन्य डिवीजन की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसी ऐतिहासिक उत्सव के हिस्से के रूप में कोटा गांडिव मैराथन का आयोजन किया गया। यह आयोजन मात्र एक दौड़ तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से समाज को जीवन में अनुशासन, धैर्य और अटूट संकल्प का संदेश दिया गया। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के सामूहिक शारीरिक कार्यक्रम न केवल मानव की शारीरिक क्षमता को परखते हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में मानसिक दृढ़ता को भी सुदृढ़ करते हैं। मैराथन के दौरान धावकों के चेहरों पर दिख रही मुस्कान और संकल्प ने यह साबित किया कि फिटनेस कोई अस्थायी कार्य नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक जीवनशैली है जिसे हर किसी को अपनाना चाहिए।
युवाओं में देशप्रेम और अनुशासन की भावना
इस मैराथन में युवाओं की भारी और सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण रही। सेना के अधिकारियों तथा कोटा पुलिस प्रशासन के अनुसार, इस प्रकार के साझा कार्यक्रमों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को एक अनुशासित, व्यसनमुक्त और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। जब आम युवा अपने सामने देश के बहादुर सैनिकों को दौड़ते हुए देखते हैं, तो उनके भीतर राष्ट्र सेवा, देशभक्ति और शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति एक नई चेतना जागृत होती है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों और युवा प्रतिभागियों ने इस शानदार समन्वय की खुले दिल से प्रशंसा की और इसे समाज के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। इस आयोजन ने यह भी प्रदर्शित किया कि खेल किस प्रकार समाज के विभिन्न अंगों को एक सूत्र में पिरो सकता है।
राष्ट्र निर्माण और भविष्य की उम्मीदें
कुल मिलाकर, कोटा गांडिव मैराथन-1.0 ने सामाजिक एकजुटता, आपसी भाईचारे और देश के निर्माण में व्यक्तिगत स्वास्थ्य के महत्व को बहुत ही खूबसूरती से प्रस्तुत किया है। 1500 से अधिक धावकों की सामूहिक ऊर्जा, सेना के कठोर अनुशासन और कोटा के निवासियों के असीम उत्साह ने इस मैराथन को शहर के गौरवशाली इतिहास में दर्ज करा दिया है। भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर होता रहेगा, ताकि युवा पीढ़ी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सके और एक स्वस्थ व सुदृढ़ समाज की नींव रखी जा सके। इस दौड़ के सफल समापन के बाद सभी प्रतिभागियों ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में भाग लेने का संकल्प लिया।





















