देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक माने जाने वाले कोटा-नागदा रेलखंड पर इस समय बुनियादी ढांचे को अत्याधुनिक बनाने के लिए विशेष स्तर पर काम चल रहा है। इस अहम खंड पर यात्रियों की यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बनाने के मकसद से रेलवे प्रशासन ने पटरियों के कायाकल्प का जिम्मा उठाया है। खासकर लूनी रिच्छा और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशनों के बीच के हिस्से में पटरियों को आधुनिक और पूरी तरह से मशीनीकृत तरीकों से दुरुस्त किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में मानवीय गलतियों की गुंजाइश को लगभग खत्म करने और कार्य की गति को तेज करने के लिए सिंप्लेक्स क्विक रिलेइंग सिस्टम (एसक्यूआरएस) मशीन का उपयोग प्रमुखता से किया जा रहा है, जिसकी मदद से पुराने और जर्जर हो चुके स्लीपरों को बहुत कम समय में बदला जा रहा है।
हाल ही में इस आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए रेलवे ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। रेलवे की तकनीकी टीम ने महज तीन घंटे के संक्षिप्त यातायात ब्लॉक के दौरान ही कुल 43 ट्रैक पैनल यानी करीब 516 मीटर लंबे हिस्से को पूरी तरह से नया रूप दे दिया। यदि पिछले पंद्रह दिनों के कुल कामकाज का लेखा-जोखा देखा जाए, तो इस आधुनिक एसक्यूआरएस मशीन के जरिए लगभग 2800 मीटर यानी 2.8 किलोमीटर लंबाई के ट्रैक को पूरी तरह से नया और मजबूत बना दिया गया है। सबसे सराहनीय पहलू यह रहा कि इस पूरी अवधि के दौरान मूसलाधार बारिश और बेहद खराब मौसम की तमाम बाधाओं के बावजूद रेलवे के कर्मचारियों और इंजीनियरों के हौसले में कोई कमी नहीं आई और उन्होंने बिना रुके इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।
थ्रू स्लीपर रिन्यूअल से ट्रैक को मिल रही मजबूती
इस पूरे तकनीकी अभियान के तहत मुख्य रूप से थ्रू स्लीपर रिन्यूअल की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत वर्षों पुराने और घिस चुके स्लीपरों को पूरी तरह से हटाकर उनकी जगह उच्च गुणवत्ता वाले और आधुनिक कंक्रीट स्लीपर लगाए जा रहे हैं। समय बीतने के साथ पुराने स्लीपर अपनी मजबूती खो देते हैं जिससे पटरियों के खिसकने या दुर्घटना होने का जोखिम पैदा हो जाता है। नए कंक्रीट स्लीपरों के आ जाने से पटरियों की ज्यामितीय स्थिति और उनकी पकड़ लंबे समय तक बहुत मजबूत बनी रहती है। ट्रैक का अलाइनमेंट बिल्कुल सटीक रहने से ट्रेनों के पटरी से उतरने जैसी किसी भी अनहोनी की आशंका न के बराबर हो जाती है और रेलगाड़ियां बिना किसी रुकावट के सरपट दौड़ सकती हैं।
भारी दबाव झेलने की बढ़ी क्षमता
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कोटा-नागदा रेलखंड रणनीतिक रूप से बेहद अहम दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग का एक मुख्य हिस्सा है। इस व्यस्त मार्ग से प्रत्येक दिन दर्जनों की संख्या में सुपरफास्ट यात्री ट्रेनें और भारी-भरकम मालगाड़ियां गुजरती हैं, जिसके कारण पटरियों पर हमेशा अत्यधिक दबाव बना रहता है। ऐसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्ग पर पटरियों का मजबूत होना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। नए कंक्रीट स्लीपरों के जुड़ जाने से इस रेलखंड की कुल वहन क्षमता में भारी इजाफा हुआ है। तेज गति से दौड़ने वाली ट्रेनों और भारी मालगाड़ियों के भारी वजन के कारण ट्रैक पर पड़ने वाले दबाव को यह नया ढांचा बहुत आसानी से सहन कर लेगा। कोटा मंडल प्रशासन का यह कदम न केवल रखरखाव के तरीकों को बदल रहा है, बल्कि यह भविष्य के सुरक्षित रेल सफर की नींव भी मजबूत कर रहा है।



















