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कोटा का अनूठा खड़े गणेश मंदिर, जहां 600 साल पुरानी प्रतिमा और सीधी सूंड के दर्शन के लिए उमड़ती है भारी भीड़राजस्थान
10 सित॰ 2026, 9:18 am (53 मिनट पहले)· 2

कोटा का अनूठा खड़े गणेश मंदिर, जहां 600 साल पुरानी प्रतिमा और सीधी सूंड के दर्शन के लिए उमड़ती है भारी भीड़

राजस्थान के कोटा में स्थित खड़े गणेश जी का मंदिर अपनी अनोखी खड़ी मुद्रा और 600 साल पुरानी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहां बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

राजस्थान का कोटा शहर आज भले ही देश भर में कोचिंग और शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, लेकिन इसके आंचल में सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत भी समेटे हुए है। शहर के रंगबाड़ी इलाके में स्थित खड़े गणेश जी का यह मंदिर इस प्राचीन परंपरा का एक बेहद खास प्रतीक है। आम तौर पर देश भर के मंदिरों में भगवान गणेश की बैठी हुई मूर्तियां ही देखने को मिलती हैं, लेकिन इस पावन स्थल पर गणपति बप्पा की प्रतिमा बिल्कुल अलग और अनूठी खड़ी मुद्रा में विराजमान है। प्राकृतिक वातावरण और चंबल नदी के करीब स्थित होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक अलग ही प्रकार की शांति और दिव्यता का अनुभव होता है।

साढ़े छह सौ साल पुरानी प्रतिमा और सीधी सूंड

मंदिर से जुड़े जानकार और पुजारी बताते हैं कि यहां स्थापित भगवान गणेश की यह दुर्लभ प्रतिमा करीब छह सौ साल से भी ज्यादा प्राचीन है। इस मूर्ति की एक और बड़ी विशेषता इसकी सीधी सूंड है, जो इसे अन्य सामान्य गणेश मंदिरों से बिल्कुल अलग पहचान देती है। जब कोटा शहर अपने आधुनिक स्वरूप में विकसित भी नहीं हुआ था और चारों तरफ घना इलाका या जंगल हुआ करता था, तब से इस स्थान पर पूजा-अर्चना का सिलसिला चला आ रहा है। वक्त के साथ शहर का विस्तार होता गया, कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए और आसपास की बसाहट पूरी तरह बदल गई, लेकिन इस पवित्र मंदिर के प्रति लोगों की अटूट आस्था में कभी कोई कमी नहीं आई। हाड़ौती अंचल के स्थानीय परिवारों के लिए यह सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि उनकी पीढ़ियों की आस्था का केंद्र है जो आज भी पूरी जीवंतता के साथ कायम है।

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बुधवार और गणेश चतुर्थी पर उमड़ती है भारी भीड़

भगवान गणेश को समर्पित इस अनूठे दरबार में सप्ताह के हर बुधवार को विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है। सुबह सूरज निकलते ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाता है और लोग कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। कोई परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की दुआ मांगता है, तो कोई अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य या करियर में सफलता की कामना लेकर यहां पहुंचता है। श्रद्धालुओं के बीच ऐसी गहरी मान्यता है कि इस मंदिर में खड़े गणेश जी के सामने सच्चे दिल से जो भी मनोकामना मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। लोग यहां पहुंचकर भगवान को फूल, मोदक और पारंपरिक प्रसाद अर्पित करते हैं तथा विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न करते हैं।

भक्तिमय माहौल और सांस्कृतिक महत्व

सालाना आने वाले गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर इस मंदिर का नजारा और भी ज्यादा भव्य और अलौकिक हो जाता है। उस दौरान पूरे परिसर को सजाया जाता है और विशेष धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू होता है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। गणपति बप्पा के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठता है और छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर आयु वर्ग के लोग इस उत्सव में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं। कुछ भक्त अपनी नई मन्नतें मांगने आते हैं, तो कई ऐसे भी होते हैं जिनकी मुराद पूरी होने के बाद वे आभार प्रकट करने और प्रसाद चढ़ाने के लिए दोबारा हाजिरी लगाने पहुंचते हैं। कोटा की आधुनिक पहचान चाहे जो भी हो, लेकिन यह प्राचीन मंदिर शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से जोड़े हुए है।

सवाल-जवाब

खड़े गणेश जी का मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के कोटा शहर के रंगबाड़ी इलाके में चंबल नदी के पास स्थित है।
इस मंदिर की मूर्ति की मुख्य विशेषता क्या है?
यहाँ भगवान गणेश की प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा के बजाय खड़ी मुद्रा में है और उनकी सूंड सीधी है।
यह प्रतिमा कितनी पुरानी मानी जाती है?
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार भगवान गणेश की यह प्रतिमा करीब 600 साल से भी अधिक पुरानी है।
मंदिर में किस दिन सबसे ज्यादा भीड़ होती है?
हर बुधवार के दिन और गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
श्रद्धालुओं के बीच यहाँ क्या मान्यता है?
भक्तों का विश्वास है कि खड़े गणेश जी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·37 मिनट पहले

यह समाचार कोटा के सांस्कृतिक और धार्मिक पक्ष को उजागर करता है, लेकिन एक क्राइम और कानून-व्यवस्था संवाददाता के दृष्टिकोण से बड़े आयोजनों में सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन (क्राउड मैनेजमेंट) सबसे बड़ी चुनौती होती है। बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन भारी भीड़ जुटने के कारण स्थानीय प्रशासन और पुलिस को यातायात नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे ताकि किसी भी प्रकार की भगदड़ या अप्रिय घटना से बचा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·36 मिनट पहले

भीड़ प्रबंधन के मामले में केवल मंदिर परिसर तक सुरक्षा सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हाड़ौती क्षेत्र से आने वाले यातायात और पार्किंग की सटीक योजना भी उतनी ही आवश्यक है। चूंकि इस धार्मिक स्थल पर स्थानीय निवासियों के अलावा दूर-दराज के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं, इसलिए पुलिस प्रशासन को बुधवार और गणेश चतुर्थी जैसे विशेष अवसरों पर मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी, जिससे आम नागरिकों को असुविधा न हो।

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