पड़ोसी जिले मथुरा में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामले सामने आने के बाद भरतपुर का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है। सीमावर्ती इलाके में पैर पसार रहे इस वायरस के खतरे को देखते हुए भरतपुर में सुरक्षात्मक और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने संभावित मरीजों के इलाज और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अस्पतालों में विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।
अस्पताल में 30 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 30 बेड का एक विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। यह आइसोलेशन वार्ड संदिग्ध और पुष्ट मामलों को सामान्य मरीजों से अलग रखने के लिए बनाया गया है ताकि अस्पताल के भीतर संक्रमण फैलने का कोई खतरा न रहे। अस्पताल में 30 बेड के इस वार्ड को तैयार करना आपातकालीन योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे होने के कारण भरतपुर में संक्रमण फैलने की आशंका अधिक रहती है, इसलिए राजस्थान के इस सीमावर्ती जिले में पहले से ही बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इस वार्ड में जरूरी चिकित्सकीय उपकरण और स्टाफ तैनात कर दिया गया है। अगर कोई भी संदिग्ध मरीज सामने आता है, तो उसे तुरंत इस वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया जाएगा।
दवाओं का पर्याप्त स्टॉक और स्वास्थ्य निगरानी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नागेंद्र भदौरिया ने इन तैयारियों की पुष्टि करते हुए बताया कि विभाग स्वाइन फ्लू के किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए आवश्यक एंटीवायरल दवा टैमीफ्लू का पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित कर लिया गया है। इस दवा की उपलब्धता सुनिश्चित होने से जरूरत पड़ने पर मरीजों का इलाज बिना किसी देरी के शुरू किया जा सकेगा। डॉ. भदौरिया ने जोर देकर कहा कि H1N1 संक्रमण के मामलों में समय पर इलाज शुरू होना बेहद जरूरी है। इसके लिए डॉक्टरों, नर्सों और लैब तकनीशियनों सहित पूरे मेडिकल स्टाफ को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। गंभीर संक्रमण प्रबंधन से जुड़े सभी नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की सलाह
राहत की बात यह है कि अभी तक भरतपुर जिले में स्वाइन फ्लू का कोई भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग राज्य सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का कड़ाई से पालन कर रहा है। अस्पताल आने वाले ऐसे मरीजों पर कड़ी नजर रखी जा रही है जिनमें सर्दी, जुकाम, खांसी, तेज बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसे फ्लू के गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध मरीजों की पहचान कर आवश्यकतानुसार उनकी जांच कराई जाए ताकि संक्रमण की स्थिति स्पष्ट हो सके। स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से भी इस बीमारी को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर इसे आम मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचने, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकने और हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।



















