राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माउंट आबू में आबकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की अनदेखी का फायदा उठाकर शराब माफिया पूरी तरह बेखौफ हो चुके हैं। शहर के मुख्य बाजार में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से कारोबार चल रहा है। निर्धारित समय के विपरीत रात ग्यारह बजे के बाद भी शराब की दुकानें खुली रहती हैं और खुलेआम बिक्री की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार पुलिस थाने से महज तीस मीटर की दूरी पर फलफूल रहा है।
पुलिस थाने के पास नियमों की धज्जियां
बाजार से सामने आए विभिन्न दृश्यों और वीडियो साक्ष्यों में यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानें रात ग्यारह बजे के बाद भी संचालित हो रही हैं। ग्राहक बिना किसी डर के वहां पहुंच रहे हैं और विक्रेता भी कानून का खौफ छोड़े बिना धड़ल्ले से माल बेच रहे हैं। कानून के रखवालों के इतनी नजदीक इस तरह की गतिविधियां चलना इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रशासनिक भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है और इस अवैध काम को रोकने वाला कोई नहीं है।
प्रशासन पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का सीधा आरोप है कि बिना आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की मिलीभगत के इस तरह का अवैध कारोबार चलना असंभव है। निवासियों का कहना है कि आबकारी महकमे में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद से शराब माफिया और अधिक बेखौफ हो गए हैं। ऐसा लगता है कि इन कारोबारियों को जिम्मेदार अधिकारियों का मौन समर्थन प्राप्त है, जिससे उनके हौसले सातवें आसमान पर हैं और वे नियमों की धज्जियां उड़ाने से जरा भी नहीं हिचकिचा रहे हैं।
पर्यटन नगरी की प्रतिष्ठा को धक्का
माउंट आबू देश का एक प्रमुख हिल स्टेशन है, जहां हर साल देश और दुनिया के कोने-कोने से लाखों सैलानी घूमने आते हैं। पर्यटन के चरम सीजन में इस प्रकार खुलेआम नियमों का उल्लंघन होने से शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। रात के वक्त तक शराब की बिक्री जारी रहने के कारण इलाके में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे न केवल सैलानियों बल्कि स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है और इस खूबसूरत पर्यटन केंद्र की छवि पर भी बट्टा लग रहा है।
कार्रवाई होगी या खानापूर्ति?
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद अब आम जनता के जेहन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या उच्च अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कोई सख्त कदम उठाएंगे। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या नियम तोड़ने वाली दुकानों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे और इस नाकामी के लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर हमेशा की तरह केवल कागजी खानापूर्ति करके मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा। फिलहाल इस इलाके की निगाहें आबकारी विभाग और पुलिस के आला अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।



















