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मुंडवा नगर पालिका में 10 सीटें जीतकर भी भाजपा शून्य पर सिमटी, आरएलपी और कांग्रेस समर्थित अलका कंदोई बनीं अध्यक्षराजस्थान
22 सित॰ 2026, 8:17 am (34 मिनट पहले)· 0

मुंडवा नगर पालिका में 10 सीटें जीतकर भी भाजपा शून्य पर सिमटी, आरएलपी और कांग्रेस समर्थित अलका कंदोई बनीं अध्यक्ष

राजस्थान के नागौर स्थित मुंडवा नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव में 10 पार्षदों वाली भाजपा प्रत्याशी गीता देवी को शून्य वोट मिले, जबकि आरएलपी और कांग्रेस समर्थित अलका देवी कंदोई ने 13 वोट पाकर एक वोट से जीत हासिल की।

राजस्थान के नागौर जिले में संपन्न हुए नगरीय निकाय चुनाव 2026 के उपरांत मुंडवा नगर पालिका की सियासत में एक हैरान कर देने वाला उलटफेर दर्ज किया गया। स्थानीय नगर निकाय के कुल 25 वार्डों में हुए पार्षदों के सीधे मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी सर्वाधिक 10 सीटें हासिल करके सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। सामान्य राजनीतिक आकलन के अनुसार 10 पार्षदों के साथ भाजपा का पलड़ा सबसे भारी माना जा रहा था, लेकिन जब पालिका अध्यक्ष पद के लिए आंतरिक मतदान संपन्न हुआ तो नतीजे पूरी तरह से अप्रत्याशित साबित हुए। भाजपा द्वारा अधिकृत रूप से मैदान में उतारी गईं प्रत्याशी गीता देवी को मतदान में एक भी वोट हासिल नहीं हुआ, जिसके चलते दस निर्वाचित पार्षदों वाली पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका।

गठबंधन की रणनीति और अलका कंदोई की नाटकीय जीत

अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) और कांग्रेस ने परस्पर रणनीतिक तालमेल बिठाते हुए संयुक्त रूप से अलका देवी कंदोई को अपना साझा समर्थन दिया। यदि दोनों राजनीतिक दलों के निर्वाचित पार्षदों का गणित देखा जाए, तो आरएलपी के पास 7 और कांग्रेस के पास 3 पार्षद थे, यानी कुल मिलाकर उनके पास 10 सदस्यों का आधार मौजूद था। इसके बावजूद जब मतपेटियों से मतों की गिनती सामने आई, तो अलका देवी कंदोई के खाते में 13 मत दर्ज पाए गए। इसका सीधा अर्थ यह निकला कि गठबंधन के 10 पार्षदों के अतिरिक्त तीन अन्य पार्षदों ने भी उनके पक्ष में गुप्त मतदान किया था।

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दूसरी तरफ मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद रोमांचक बनाने वाले निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सादावत उर्फ विक्की को कुल 12 वोट मिले। अंतिम नतीजों में अलका देवी कंदोई ने घनश्याम सादावत को महज एक मत के बेहद बारीक अंतर से शिकस्त देकर मुंडवा नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर विजय हासिल कर ली। सिर्फ एक मत के फासले से तय हुए इस चुनाव ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।

भाजपा के अंदरूनी समीकरण और बागी प्रत्याशी की चुनौती

इस पूरे चुनावी घटनाक्रम में घनश्याम सादावत उर्फ विक्की की उम्मीदवारी सबसे प्रमुख केंद्र बिंदु बनकर उभरी। स्थानीय चुनावी पृष्ठभूमि के अनुसार सादावत स्वयं भाजपा के चुनाव चिह्न पर पार्षद पद का चुनाव जीतकर आए थे। इसके साथ ही वह राजस्थान भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति मिर्धा के निजी सलाहकार के रूप में भी स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। जब नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार तय करने की बारी आई, तो भाजपा संगठन ने घनश्याम सादावत के स्थान पर गीता देवी को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया।

पार्टी की ओर से टिकट न दिए जाने के फैसले के विरोध में घनश्याम सादावत ने स्वतंत्र रूप से निर्दलीय ताल ठोकने का निर्णय ले लिया। अध्यक्ष पद के मतदान में सादावत ने जबर्दस्त सेंधमारी करते हुए 12 पार्षदों का समर्थन अपनी तरफ खींच लिया और वह शीर्ष पद हासिल करने से महज एक कदम पीछे रह गए। उनकी इस बगावत ने भाजपा के आधिकारिक पैनल के सारे समीकरण ध्वस्त कर दिए।

10 पार्षद होने के बावजूद शून्य पर अटकने की पहेली

मुंडवा नगर पालिका के 25 वार्डों के जनादेश में जहां भाजपा ने 10 सीटें जीती थीं, वहीं आरएलपी को 7, कांग्रेस को 3 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 5 वार्डों में सफलता मिली थी। संख्या बल के लिहाज से पूर्ण बहुमत के 13 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए भाजपा को केवल तीन अतिरिक्त पार्षदों के सहारे की दरकार थी। विडंबना यह रही कि भाजपा के अपने 10 निर्वाचित पार्षदों में से किसी एक ने भी अधिकृत प्रत्याशी गीता देवी के पक्ष में मतदान नहीं किया। चुनाव परिणाम में उनके नाम के आगे शून्य दर्ज होना इस चुनाव का सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल बन गया है।

पार्टी पार्षदों द्वारा अधिकृत प्रत्याशी को पूरी तरह नकारने और बागी तथा विरोधी खेमों की ओर मत स्थानांतरित करने को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, हालांकि भाजपा पार्षदों के इस मतदान व्यवहार को लेकर कोई अलग कारण या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। महज एक मत से अलका कंदोई की ताजपोशी और भाजपा के अपने पार्षदों द्वारा प्रत्याशी को वोट न देने की इस घटना ने मुंडवा के स्थानीय सत्ता संग्राम को प्रदेश भर में सुर्खियों में ला दिया है।

सवाल-जवाब

मुंडवा नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में किसकी जीत हुई?
आरएलपी और कांग्रेस समर्थित अलका देवी कंदोई 13 वोट पाकर अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुईं।
अलका देवी कंदोई ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कितने वोटों के अंतर से हराया?
अलका कंदोई ने निर्दलीय प्रत्याशी घनश्याम सादावत उर्फ विक्की को महज 1 वोट से पराजित किया।
भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी गीता देवी को कितने वोट मिले?
भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी गीता देवी को चुनाव में एक भी वोट नहीं मिला और उनका खाता शून्य पर रहा।
मुंडवा नगर पालिका में कुल कितने वार्ड हैं और शुरुआती परिणाम में दलों की क्या स्थिति थी?
मुंडवा में कुल 25 वार्ड हैं, जिनमें भाजपा ने 10, आरएलपी ने 7, कांग्रेस ने 3 और निर्दलीयों ने 5 सीटें जीती थीं।
निर्दलीय प्रत्याशी घनश्याम सादावत उर्फ विक्की को कितने वोट हासिल हुए?
घनश्याम सादावत उर्फ विक्की को अध्यक्ष पद के चुनाव में 12 वोट हासिल हुए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·1 मिनट पहले

दस पार्षद होने के बाद भी भाजपा उम्मीदवार को एक भी वोट न मिलना हैरान करने वाला है। क्या पार्टी के अपने लोगों ने ही भीतरघात करके वोट दूसरे को दे दिए?

Arjun Mehta@arjun-mehta·अभी

रविकेश, बिल्कुल सही पकड़े। पिछली बार जब नागौर गया था, तब भी देखा था कि स्थानीय चुनाव में भीतरघात पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं के समीकरण बिगाड़ देता है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 मिनट पहले

दस पार्षद होने के बाद भी ज़ीरो वोट मिलना थोड़ा गले नहीं उतरता। पार्टी के भीतर ही कुछ बहुत बड़ा खेल हुआ है, वरना ऐसा सन्नाटा तो मुमकिन ही नहीं है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 मिनट पहले

रोहन, बिल्कुल सही पकड़े। पार्टी के भीतर बगावत तो साफ दिख रही है, पर क्या वो तीन गुप्त वोट आखिर किसके थे जो कांग्रेस-आरएलपी के पाले में चले गए?

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