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भीलवाड़ा के प्राचीन तेजाजी धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, तेजा दशमी पर लगा तीन दिवसीय मेलाराजस्थान
21 सित॰ 2026, 9:56 pm (43 मिनट पहले)· 0

भीलवाड़ा के प्राचीन तेजाजी धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, तेजा दशमी पर लगा तीन दिवसीय मेला

भीलवाड़ा शहर की स्थापना से भी पुराने तेजाजी चौक स्थित मंदिर में तेजा दशमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। जहरीले जीवों के दंश और चर्म रोगों से राहत की मान्यता के बीच तीन दिवसीय मेले का आयोजन जारी है।

भीलवाड़ा शहर के हृदय स्थल तेजाजी चौक में स्थित लोक देवता वीर तेजाजी महाराज का ऐतिहासिक धाम इन दिनों गहरी आस्था और धार्मिक उत्साह का केंद्र बना हुआ है। शहर की बसावट से भी पहले अस्तित्व में आया यह पवित्र स्थान न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि पूरे मेवाड़ और राजस्थान भर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। जन आस्था के अनुसार, यहां वीर तेजाजी महाराज भक्तों को सर्प रूप में साक्षात दर्शन देते हैं। सदियों पुराने इस पावन धाम में एक ही परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना की परंपरा का निर्वहन करता आ रहा है।

तेजा दशमी पर उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

लोक देवता वीर तेजाजी महाराज की पावन स्मृति में मनाए जाने वाले तेजा दशमी पर्व के अवसर पर अलसुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का तांता लग गया। बड़ी तादाद में महिलाएं, पुरुष और बच्चे कतारबद्ध होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते नजर आए। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की, शीश नवाकर धोक लगाई और अपने परिवार के कल्याण, उत्तम स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। इस वार्षिक उत्सव के अवसर पर यहां तीन दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दूर-दराज के अंचलों से आए लोग बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

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जहरीले दंश और चर्म रोगों से मुक्ति का अटूट विश्वास

इस पावन स्थल से जुड़ी जन मान्यताएं बेहद अनूठी और चमत्कारी मानी जाती हैं। धार्मिक आस्था के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को सांप, बिच्छू या अन्य कोई विषैला जीव काट ले, तो तेजाजी महाराज के नाम का पवित्र रक्षासूत्र या धागा बांधने और मंदिर में दर्शन करने मात्र से पीड़ित को पीड़ा से अभूतपूर्व राहत मिलती है। इसके अलावा, श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि सच्चे मन से यहां माथा टेकने और प्रसाद अर्पित करने से असाध्य चर्म रोगों और शारीरिक विकारों से हमेशा के लिए निजात मिल जाती है। परंपरा का पालन करते हुए भक्तों ने मंदिर में श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित किया और अपनी विशेष मन्नतें मांगीं।

सदियों पुरानी परंपरा और पुजारी का अनुभव

मंदिर के पुजारी बालू राम जाट ने मंदिर के गौरवशाली अतीत को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि इस धाम की स्थापना भीलवाड़ा नगर की बसावट की शुरुआत से भी पहले की है। उन्होंने बताया कि यह स्थान अपने आप में गहरा आध्यात्मिक प्रभाव समेटे हुए है। प्रतिवर्ष तेजा दशमी के पावन अवसर पर यहां तीन दिवसीय मेले की परंपरा उत्साहपूर्वक निभाई जाती है। दशमी तिथि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु विशेष रूप से मंदिर पहुंचकर तेजाजी महाराज को भोग अर्पित कर रहे हैं और निरंतर आरती व धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित हो रहे हैं।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा का प्राचीन तेजाजी मंदिर कहां स्थित है?
यह ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान के भीलवाड़ा शहर के तेजाजी चौक में स्थित है।
इस मंदिर का इतिहास कितना पुराना बताया जाता है?
मंदिर पुजारी बालू राम जाट के अनुसार, यह धाम भीलवाड़ा शहर के बसने की शुरुआत से भी पहले का है।
मंदिर में तेजाजी महाराज किस रूप में दर्शन देते हैं?
धार्मिक मान्यता है कि तेजाजी महाराज यहां श्रद्धालुओं को सर्प रूप में दर्शन देते हैं।
मंदिर से जुड़ी मुख्य चिकित्सीय और लोक मान्यताएं क्या हैं?
मान्यता है कि यहां तेजाजी के नाम का धागा बांधने से जहरीले जीवों के दंश से राहत मिलती है और चर्म रोग भी दूर होते हैं।
तेजा दशमी पर यहां किस आयोजन की परंपरा है?
तेजा दशमी के पावन अवसर पर यहां प्रतिवर्ष तीन दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
मंदिर में पूजा-अर्चना का कार्य कौन संभालता है?
इस मंदिर में पुराने समय से एक ही परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी सेवा और पूजा-अर्चना करता आ रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·14 मिनट पहले

शहर बसने से भी पुराना मंदिर! ऐसी जगहें अपने इलाके का इतिहास खुद बयान करती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 मिनट पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। मैं खुद बचपन में तेजाजी के मेले में गया था, वहाँ का वो माहौल आज भी याद है।

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