राजस्थान के पाली जिले में स्थित विश्व विख्यात जवाई क्षेत्र में वन्यजीवों के प्राकृतिक ठिकाने को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बहुत बड़ा न्यायिक कदम सामने आया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई में तेंदुओं के प्राकृतिक पर्यावास, गुफाओं और वन्यजीव गलियारों के चारों ओर एक किलोमीटर के क्षेत्र को लेपर्ड हैबिटेट कंस्ट्रक्शन-कंट्रोल जोन घोषित करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। इस ऐतिहासिक व्यवस्था के लागू होने से अब चिन्हित परिधि के भीतर किसी भी प्रकार के नए होटल, लक्जरी रिसॉर्ट, व्यावसायिक गेस्ट हाउस या पर्यटन कैंप के निर्माण पर पूरी तरह से रोक लग गई है।
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यटन के नाम पर प्राकृतिक पहाड़ियों को नुकसान पहुंचाना, अवैध खनन करना और अंधाधुंध तरीके से जमीनों का लैंड यूज बदलना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायिक पीठ के इस कड़े हस्तक्षेप से अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण और तेंदुओं के प्राकृतिक आवास पर हो रहे मानवीय अतिक्रमण पर सख्त लगाम लग सकेगी।
जवाई के विशिष्ट पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा
इस न्यायिक निर्देश का मूल उद्देश्य जवाई के उस अनोखे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है जो पूरी दुनिया में मिसाल माना जाता है। जवाई एक ऐसा विरला भूभाग है जहां स्थानीय ग्रामीण और तेंदुए बिना किसी गंभीर टकराव के पीढ़ियों से एक साथ रहते आए हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में लेपर्ड सफारी के भारी आकर्षण के चलते इलाके में व्यावसायिक होड़ शुरू हो गई थी। बड़े पैमाने पर पहाड़ियों को काटा जा रहा था, डायनामाइट से ब्लास्टिंग की जा रही थी और बड़े रिसॉर्ट्स का जाल फैलाया जा रहा था। साथ ही रात के समय गाड़ियों की सफारी से तेंदुओं के प्राकृतिक जीवन चक्र में भारी खलल पड़ने लगा था, जिसे रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।
व्यावसायिक गतिविधियों और भूमि रूपांतरण पर सख्त रोक
उच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए नए नियमों के तहत जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व और तेंदुओं के आवास के एक किलोमीटर के दायरे में कई सख्त प्रतिबंध लागू किए गए हैं
- नए व्यावसायिक निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध: तय एक किलोमीटर की सीमा के भीतर नए होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, गेस्ट हाउस, पर्यटन टेंट और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना पर पूरी पाबंदी रहेगी।
- भूमि रूपांतरण पर पाबंदी: इस नियंत्रण क्षेत्र में आने वाली कृषि या अन्य भूमियों को व्यावसायिक अथवा औद्योगिक उपयोग में बदलने की कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
- खनन और पहाड़ कटाई बंद: पहाड़ियों में किसी भी तरह की ब्लास्टिंग, गहरी खुदाई, पहाड़ काटने और नए वाहनों के रास्ते या पक्की सड़कें बनाने की गतिविधियों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है, ताकि वन्यजीवों का आवागमन बाधित न हो।
- सफारी और पर्यटन के सख्त कायदे: रात के समय सफारी करने, तेंदुओं पर तेज सर्चलाइट डालने, ड्रोन कैमरे उड़ाने, मांस डालकर तेंदुओं को लालच देने और उनकी गुफाओं के पास पर्यटकों का हुजूम जुटाने पर सख्त प्रतिबंध रहेगा।
जियो-मैपिंग और बुनियादी जनसुविधाओं की व्यवस्था
अदालत ने पाली वन विभाग को बेहद अहम प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी है। वन विभाग को आगामी आठ सप्ताह यानी दो महीने की समय सीमा के भीतर तेंदुओं के संपूर्ण आवास क्षेत्र की विस्तृत जियो-रेफरेंस्ड मैपिंग पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इस डिजिटल मैपिंग के माध्यम से नियंत्रण क्षेत्र की सटीक सीमाएं तय की जाएंगी ताकि भविष्य में किसी भी तरह का कानूनी या प्रशासनिक विवाद न रहे।
इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ किया है कि स्थानीय निवासियों की बुनियादी जरूरतों पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। ग्रामीणों के रहने के लिए बनने वाले जायज रिहायशी मकानों, पुराने मकानों की साधारण मरम्मत, सरकारी स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, चिकित्सालयों, पेयजल परियोजनाओं और जनहित की अनिवार्य सुविधाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। हालांकि, इन आवश्यक निर्माणों के दौरान भी यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि वन्यजीवों की सामान्य आवाजाही में कोई रुकावट पैदा न हो।
जमीन निवेशकों और खरीदारों के लिए जरूरी सतर्कता
जवाई, बेरा और आसपास के ग्रामीण अंचलों में पर्यटन व्यवसाय के इरादे से जमीन खरीदने या भारी निवेश करने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण चेतावनी है। यदि कोई व्यक्ति एक किलोमीटर के कंस्ट्रक्शन-कंट्रोल जोन के भीतर जमीन खरीदता है, तो उसे वहां किसी भी नए होटल, रिसॉर्ट या कमर्शियल प्रोजेक्ट के निर्माण की सरकारी अनुमति नहीं मिलेगी।
प्रॉपर्टी डीलरों और दलालों के उन झूठे दावों से सावधान रहने की सख्त जरूरत है जो कृषि भूमि का व्यावसायिक रूपांतरण आसानी से कराने का झांसा देते हैं। अदालत के स्पष्ट रुख के बाद ऐसे सभी रूपांतरणों पर पूर्ण विराम लग चुका है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी सौदे पर हस्ताक्षर करने या रकम का भुगतान करने से पहले वन विभाग और स्थानीय राजस्व प्रशासन से यह तस्दीक जरूर कर लें कि संबंधित खसरा नंबर लेपर्ड हैबिटेट या नियंत्रण क्षेत्र में तो नहीं आता। बिना वैध अनुमति या नियमों की अनदेखी कर किया गया कोई भी नया निर्माण गैर-कानूनी माना जाएगा और उसे प्रशासनिक ध्वस्तीकरण का सामना करना पड़ेगा।





















