अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को मिली बीजेपी आईटी सेल की कमान, जानिए कौन हैं नए डिजिटल कैप्टनगॉल टेस्ट में अजीबोगरीब रन आउट, यशस्वी जायसवाल के सीने से लगकर कैच हुए केशरा नुवंताडोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य कार्रवाई की चेतावनीईरान संघर्ष की आग से दुनिया भर में शिक्षा पर संकट, करोड़ों बच्चों का भविष्य दांव परअंतरंग पलों के दौरान सिर में उठने वाला तेज दर्द बन रहा है बड़ी समस्या, जानिए इसके कारणसावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी पर बलिया में दिखा सर्प जोड़ा, जगदीशपुर में लोगों की उमड़ी भीड़ओडिशा के केंद्रपाड़ा में बाढ़ का तांडव, रेजिडेंशियल स्कूल में फंसे 300 से ज्यादा बच्चेजेम्स स्ट्रॉन की अनूठी कहानी: टेक कंपनी में 25 साल की नौकरी जाने के बाद अब चला रहे हैं स्कूल बसबिना सब्सक्रिप्शन वाले VETO प्लेटफॉर्म को मिला डेविस कप 2026 का एक्सक्लूसिव प्रसारण अधिकारडार्विन में बांग्लादेश के खिलाफ मिली हार से पैट कमिंस के करियर पर लगा दाग, बना शर्मनाक रिकॉर्ड
नागौर के चाम्पावत परिवार की चार पीढ़ियों ने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल तक सेना में सेवा देकर पेश की मिसालराजस्थान
26 जुल॰ 2026, 12:52 pm (22 दिन पहले)· 0

नागौर के चाम्पावत परिवार की चार पीढ़ियों ने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल तक सेना में सेवा देकर पेश की मिसाल

कारगिल विजय दिवस के मौके पर नागौर के चाम्पावत परिवार की कहानी सामने आई है, जिसकी लगातार चार पीढ़ियों ने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल संघर्ष तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दी हैं।

कारगिल विजय दिवस का पावन अवसर केवल 1999 के ऐतिहासिक युद्ध में मिली जीत का जश्न मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के उन वीर परिवारों के प्रति सम्मान प्रकट करने का भी दिन है जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा को ही अपना परम धर्म मान लिया है। नागौर जिले के अंतर्गत आने वाली डेह तहसील के नोसरिया गांव का चाम्पावत परिवार एक ऐसी ही अद्भुत और अनुकरणीय मिसाल पेश करता है। इस गौरवशाली परिवार की लगातार चार पीढ़ियों ने भारतीय सेना का हिस्सा बनकर देश की सीमाओं की रखवाली की है। प्रथम विश्व युद्ध के मैदानों से लेकर कारगिल की दुर्गम चोटियों तक, इस परिवार की वीरता और राष्ट्रभक्ति भारत के सैन्य इतिहास का एक अटूट हिस्सा बन चुकी है।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रखी गई थी देशभक्ति की मजबूत नींव

चाम्पावत परिवार का भारतीय सेना के साथ जुड़ाव भारत की आजादी से काफी पहले का है। इस देशभक्ति की परंपरा की शुरुआत पहली पीढ़ी के सदस्य लालसिंह ने की थी। उन्होंने साल 1914 से लेकर 1918 तक चले प्रथम विश्व युद्ध के दौरान राजपूत राइफल्स में बतौर हवलदार अपनी सेवाएं दी थीं। उस ऐतिहासिक कालखंड में लालसिंह ने भारत-जर्मन मोर्चे पर तैनात रहकर बेहद कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का पालन किया और अपनी बहादुरी का परिचय दिया। उस दौर में सेना में भर्ती होना महज एक नौकरी पाना नहीं था, बल्कि देश के प्रति पूर्ण समर्पण का मार्ग था, और लालसिंह ने अपनी निष्ठा से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहद मजबूत मार्गदर्शक का काम किया।

ये भी पढ़ें

द्वितीय विश्व युद्ध और स्वतंत्रता के बाद मिला सम्मान

इस समृद्ध सैन्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए लालसिंह के बेटे जसवंत सिंह ने दूसरी पीढ़ी के रूप में सेना का रुख किया। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना में शामिल होकर अदम्य साहस और युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। सैन्य क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें साल 1939, 1945 और 1947 से संबंधित विभिन्न सैन्य पदकों से अलंकृत किया गया। स्वतंत्रता दिवस के विशेष अवसर पर भारत सरकार ने भी उनकी विशिष्ट सेवाओं का सम्मान किया था। जसवंत सिंह का निधन 7 जून 2018 को 96 वर्ष की लंबी आयु में हुआ, लेकिन उनके द्वारा अर्जित किए गए पदक और उपलब्धियां आज भी चाम्पावत परिवार की सबसे अनमोल धरोहर के रूप में सहेज कर रखी गई हैं।

कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों पर तीसरी पीढ़ी का पराक्रम

देश सेवा का यह अटूट सिलसिला जब तीसरी पीढ़ी तक पहुंचा, तो हवलदार हुकम सिंह ने इस मशाल को थाम लिया। साल 1999 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध छिड़ा, तब हुकम सिंह ने इस संघर्ष में सक्रिय रूप से भाग लेकर अपने पूर्वजों की विरासत को गौरवान्वित किया। बेहद दुर्गम पहाड़ियों, हाड़ कँपा देने वाली ठंड और विपरीत परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपनी मातृभूमि की सुरक्षा का दायित्व बखूबी निभाया। भारतीय सेना के अन्य जांबाज जवानों के साथ मिलकर उन्होंने कारगिल युद्ध में दुश्मनों का सामना किया और परिवार की युद्ध परंपरा को एक नया शिखर दिया।

बदलते समय के साथ चौथी पीढ़ी ने संभाली प्रशासनिक कमान

समय के साथ युद्ध के तरीके बदल गए और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी बदल गईं, लेकिन देश की सेवा करने का चाम्पावत परिवार का दृढ़ संकल्प तनिक भी नहीं डगमगाया। इसी परंपरा को चौथी पीढ़ी के सदस्य राजू सिंह आगे बढ़ा रहे हैं, जो साल 2011 में भारतीय सेना का हिस्सा बने। वर्तमान में राजू सिंह हवलदार क्लर्क के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सेना के प्रशासनिक और कार्यालयी कामकाज को संभालते हुए भी वे देश की रक्षा प्रणाली के एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में अपना योगदान दे रहे हैं।

अनुशासन और देशप्रेम से सराबोर पारिवारिक माहौल

इस परिवार के लिए सेना की वर्दी धारण करना केवल एक पेशा या आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक पवित्र जिम्मेदारी है। हवलदार हुकम सिंह के अनुसार, उनके घर में बचपन से ही देशभक्ति और कठोर अनुशासन का वातावरण रहा है। घर के बुजुर्गों से सेना के पराक्रम की सच्ची कहानियां सुनते हुए ही नई पीढ़ी के बच्चों का पालन-पोषण हुआ, जिससे उनके मन में भी सेना के प्रति गहरी श्रद्धा और सेवा का भाव पैदा हुआ। पूरे परिवार का यही अटूट विश्वास है कि मातृभूमि की सेवा से बढ़कर दुनिया में कोई दूसरा धर्म नहीं है, और यही संस्कार वे अपनी आने वाली पीढ़ियों को सौंप रहे हैं।

सवाल-जवाब

चाम्पावत परिवार में सैन्य विरासत की शुरुआत किसने की थी?
इस विरासत की शुरुआत लालसिंह ने की थी, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान साल 1914 से 1918 तक राजपूत राइफल्स में बतौर हवलदार सेवा दी थी।
जसवंत सिंह को द्वितीय विश्व युद्ध में उनकी सेवा के लिए क्या सम्मान मिला था?
उन्हें साल 1939, 1945 और 1947 से जुड़े विभिन्न सैन्य पदकों से सम्मानित किया गया था और स्वतंत्रता दिवस पर भारत सरकार द्वारा भी उनका सम्मान किया गया था।
परिवार की तीसरी पीढ़ी ने किस युद्ध में भाग लिया था?
परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व हवलदार हुकम सिंह ने किया था, जिन्होंने साल 1999 के कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था।
चौथी पीढ़ी वर्तमान में भारतीय सेना में क्या भूमिका निभा रही है?
राजू सिंह, जो साल 2011 में सेना में शामिल हुए थे, वर्तमान में हवलदार क्लर्क के रूप में प्रशासनिक और कार्यालयी कामकाज संभाल रहे हैं।
चाम्पावत परिवार कहां का रहने वाला है?
यह परिवार राजस्थान के नागौर जिले की डेह तहसील के अंतर्गत आने वाले नोसरिया गांव का रहने वाला है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR