राजस्थान के झालावाड़ स्थित जिला जनाना अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात शिशु की अदला-बदली का एक संदेहास्पद मामला सामने आया है। कोटा जिले के सुकेत क्षेत्र से आए एक परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही बरतने का दावा किया है। प्रसूता के पति ने लिखित शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया है कि जन्म के समय उनकी पत्नी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी, लेकिन बाद में उन्हें एक बालिका सौंप दी गई। इस घटनाक्रम के बाद चिकित्सालय परिसर में काफी देर तक अनिश्चितता और तनाव का माहौल बना रहा।
दो प्रसव और अस्पताल में पैदा हुआ विवाद
पीड़ित परिवार के अनुसार प्रसूता मुस्कान को रविवार को प्रसव पीड़ा के चलते झालावाड़ के जिला जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पति असलम का कहना है कि रविवार सुबह उनकी पत्नी की सफल डिलीवरी हुई। हालांकि प्रसव के तुरंत बाद परिजनों को नवजात नहीं दिखाया गया और न ही प्रसूता कक्ष में जाने की अनुमति दी गई। करीब दो घंटे के लंबे इंतजार के पश्चात जब स्वास्थ्य कर्मी शिशु को बाहर लेकर आए, तो वह एक नवजात बच्ची थी। परिजनों का दावा है कि इस दौरान दो घंटे के अंतराल में अस्पताल में एक अन्य महिला का भी प्रसव हुआ था, जिससे नवजात शिशुओं के आपस में बदलने की आशंका उत्पन्न हो गई।
अधीक्षक से शिकायत और डीएनए जांच की मांग
अस्पताल परिसर में हंगामा बढ़ता देख पति असलम ने तुरंत अस्पताल अधीक्षक को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और नवजात शिशु की जैविक पहचान स्थापित करने की मांग की गई है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि जब तक वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक वे इस स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे। इस विवाद के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सभी प्रसव कक्षों के दाखिल रिकॉर्ड खंगाले जाने लगे।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष और मेडिकल रिकॉर्ड्स का सत्यापन
शिकायत मिलने के पश्चात अस्पताल प्रबंधन ने प्रसव रजिस्टर, ड्यूटी रोस्टर तथा संबंधित मेडिकल दस्तावेजों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है। प्राथमिक स्तर पर अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड्स की जांच के आधार पर अधिकारियों का मानना है कि यह मामला एक प्रकार की गलतफहमी का परिणाम हो सकता है। दो घंटे की समयावधि में दो अलग-अलग डिलीवरी होने के कारण परिजनों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है।
डीएनए परीक्षण से होगा अंतिम फैसला
विवाद के पूर्ण समाधान के लिए अब डीएनए परीक्षण का सहारा लिए जाने की तैयारी है। वैज्ञानिक आधार पर होने वाली इस जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात बालिका किस दंपति की जैविक संतान है। इस बीच सोशल मीडिया पर भी अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और नवजात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी और यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो उसके अनुसार आगे का कदम उठाया जाएगा।






















